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बसपा सिर्फ दलितों की नहीं सर्वसमाज की पार्टी: सतीश

Sat, 08 Nov 2014 09:58 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 08 Nov 2014 09:58 PM IST
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BSP represents whole society not only dalits.

बसपा कोटे की दोनों ही सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारने से सवर्ण मतदाताओं में पार्टी के प्रति गलत संदेश जाने के सवाल पर राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि बसपा सर्व समाज की पार्टी है।

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सवर्ण समाज से वह राज्यसभा के सदस्य और पार्टी के राज्यसभा में नेता हैं। सदस्य संख्या कम होने की वजह से पार्टी सिर्फ दो सीटें जीत सकेंगी, इसलिए सिर्फ दलित समाज को प्रतिनिधित्व दिया जा सका है।
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उन्होंने दावा किया कि 2018 के राज्यसभा चुनाव में बसपा 6-7 सीटें जीतेगी, तब सर्व समाज को भागीदारी मिल सकेगी।

उनका संकेत था कि 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी इतनी सीटें जीतेगी कि वह राज्यसभा की ज्यादा सीटें जीत पाएगी। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को सपा का समर्थन के मुद्दे पर कहा कि दोनों पार्टियां पहले से ही मिली हुई हैं।
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बसपा उम्मीदवारों ने भरा नामांकन

BSP represents whole society not only dalits.

राज्यसभा की दस सीटों के लिए हो रहे चुनाव में दो सीटों के लिए बसपा प्रत्याशियों राजाराम व वीर सिंह एडवोकेट ने शनिवार को नामांकन पत्र भरा। बसपा दस में से दो सीटें ही जीत सकती है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने राजाराम को दूसरी बार तो वीर सिंह को तीसरी बार राज्यसभा के लिए प्रत्याशी बनाया है।

दोनों प्रत्याशी शनिवार को बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, बसपा विधानमंडल दल के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी, पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय व अनंत कुमार मिश्र उर्फ अंटू मिश्र समेत बड़ी संख्या में पार्टी विधायकों के साथ नामांकन करने के लिए विधान भवन के सेंट्रल हॉल पहुंचे। यहां दोनों प्रत्याशियों ने प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप कुमार दुबे के समक्ष नामांकन किया।

नामांकन में हुई देरी, ये बोले प्रत्याशी

BSP represents whole society not only dalits.

बसपा ने प्रत्याशियों व विधायकों को नामांकन के  लिए 11 बजे बुलाया था। पार्टी के नेता व विधायक समय से पहुंच गए थे। जब एक बजे तक प्रत्याशी नामांकन को नहीं पहुचे तो तमाम तरह की अटकलबाजी शुरू हो गई।

बाद में बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि विधायकों को जरूर 11 बजे बुलाया गया था लेकिन नामांकन एक बजे तक होना था। मगर, नामांकन के साथ नोटरी शपथपत्र में कुछ शब्द फार्मेट से बाहर के टाइप हो गए थे। इसके लिए नोटरी फिर से बनवानी पड़ी। इससे कुछ देर हो गई।

पूरी जिंदगी न भुला पाऊंगा एहसान
बसपा की ओर से राज्यसभा प्रत्याशी घोषित किए गए एडवोकेट वीर सिंह का कहना है कि बसपा अध्यक्ष ने लगातार तीसरी बार राज्यसभा में भेजने का फैसला किया। पूरी जिंदगी इस एहसान को नहीं भुला सकता। पार्टी नेता के निर्देश पर मैं पूरी ईमानदारी, निष्ठा व वफादारी के साथ काम करता रहूंगा।

मजदूर के बेटे को दोबारा दिया मौका
वहीं प्रत्याशी राजाराम ने कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुझ मजदूर के बेटे को पहले एमएलसी बनाया। इसके बाद लगातार दूसरी बार राज्यसभा में भेजने का फैसला किया। वह बसपा को आगे बढ़ाने के लिए पहले की तरह पूरी ताकत से काम करते रहेंगे।

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