दलितों के सीने पर एससी व एसटी लिखने पर मोदी चुप क्यों, मायावती ने उठाए सवाल
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने मध्य प्रदेश के धार जिले में सिपाही भर्ती के दौरान अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों के सीने पर ‘एससी व एसटी‘ अंकित करने को दुखद बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया है। कहा, यह घटना भाजपा में उभर रहे नए दलित प्रेम का अशोभनीय नमूना है।
मायावती ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में दलितों, आदिवासियों व पिछड़ों पर जातिवादी जुल्म-ज्यादती, अन्याय व शोषण की खबरें लगातार आती रहती हैं। लेकिन, यह ताजा घटना भाजपा के दलित प्रेम के पाखंड की पोल खोलती है।
भाजपा के लोग चुनाव के समय वोटों के स्वार्थ में दलित प्रेम का नाटक तो बहुत करते हैं लेकिन इनकी केंद्र व राज्य सरकारों का दलितों, आदिवासियों व पिछड़ों के प्रति हीन, जातिवादी व द्वेषपूर्ण रवैये का परिणाम है कि इस वर्ग के लोग धर्म परिवर्तन करने को मजबूर हो रहे हैं। ताजा उदाहरण गुजरात के ऊना दलित कांड के पीड़ित परिवारों का है, जिन्होंने सामूहिक तौर पर बौद्ध धर्म की दीक्षा ले ली है।
'दलितों के घर जानें ने नहीं होगा कोई बदलाव'
मायावती ने कहा, भाजपा के मंत्री व नेताओं ने वोटों के स्वार्थ व मीडिया में पब्लिसिटी के लिए कांग्रेस की तर्ज पर दलितों के घर जाने का नया फैशन शुरू किया है। इससे दलितों के जीवनस्तर में कोई बदलाव नहीं आने पर इनकी काफी किरकिरी हो रही है।
भाजपा को समझ लेना चाहिए कि दलित व पिछड़े वर्ग के लोग अपने हित व कल्याण के लिए जागरूक हैं। वे किसी के बहकावे में नहीं आने वाले।