लगातार दो हार से मायावती के सामने गंभीर चुनौती, आज दिखाएंगी दम
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बसपा सुप्रीमो मायावती को सियासत में लाने वाले बसपा संस्थापक कांशीराम थे। 2012 का विधानसभा चुनाव और 2014 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद बसपा जब सबसे गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, मायावती के लिए कांशीराम ही फिर सहारे के रूप में नजर आए हैं।
कांशीराम की 10वीं पुण्यतिथि पर रविवार को जब वे राजधानी में बड़ी तादाद में अपने समर्थकों से मुखातिब होंगी, कांशीराम के मूवमेंट, मिशन और सपनों के सहारे सत्ता में वापसी का ताना-बाना बुनती नजर आएंगी।
मायावती विधानसभा चुनाव के पहले ऐसे वक्त यह रैली कर रही हैं, जब सियासी समीकरण लगातार बन और बिगड़ रहे हैं। पिछले पंचायत चुनाव के नतीजे आए तो बसपा को सपा के विकल्प के रूप में देखा जाने लगा था, मगर कुछ दिनों बाद से उनकी पार्टी के जिम्मेदार नेताओं व विधायकों का बसपा छोड़ने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह अब भी बंद नहीं हुआ है।
भाजपा के खिलाफ उल्टा पड़ गया बसपा का दांव
वहीं, भाजपा के पूर्व नेता दयाशंकर सिंह ने बसपा सुप्रीमो के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया तो बसपा का ग्राफ फिर तेजी से ऊपर चढ़ा। भाजपा को भी बचाव की मुद्रा में आना पड़ा और सपा सरकार को दयाशंकर को गिरफ्तार तक कराना पड़ा।
हालांकि जल्दबाजी में इस घटनाक्रम का सियासी फायदा लेने के चक्कर में बसपा नेताओं ने जिस तरह दयाशंकर की बेटी को निशाना बनाया, दांव उल्टा हो गया।
उसी नासमझी का नतीजा है कि दयाशंकर की पत्नी स्वाति सिंह भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष तक बन गईं। इसके अलावा बसपा के आधार दलित मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए भाजपा ने तमाम जमीनी प्रयास किए हैं। इसके बाद से मायावती भाजपा के खिलाफ ज्यादा आक्रामक हो गई हैं।
पाक पर सर्जिकल स्ट्राइक से फिर बदल गया सियासी माहौल
इधर समाजवादी पार्टी में कलह बढ़ी तो राजनीतिक विश्लेषक उसका कुछ फायदा भाजपा और बड़ा लाभ बसपा को होने की बात करने लगे थे, मगर पाकिस्तान स्थित आतंकी अड्डों पर सेना की सर्जिकल स्ट्राइक से सियासी माहौल बदलता नजर आ रहा है।
विश्लेषक कहते हैं कि इस नए घटनाक्रम के ताप का बसपा नेतृत्व को पूरा अंदाजा है। इसी वजह से मायावती अब तक दो बार बयान जारी कर भाजपा पर सर्जिकल स्ट्राइक का सियासी लाभ लेने का आरोप लगा चुकी हैं और इसकी निंदा भी कर चुकी हैं।
ऐसे सियासी माहौल में मायावती की रैली पर सभी की निगाहें हैं। माया पहले भी दमदार रैलियां कर चुकी हैं। विधानसभा चुनाव से पहले फिर बड़ी भीड़ जुटाकर चुनावी विश्लेषकों को यह संदेश देने की तैयारी है कि बसपा को हल्के में लेना ठीक नहीं होगा।
रैली की तैयारियां पूरी, समर्थकों की खातिरदारी में जुटे रहे नेता
रविवार को कांशीराम स्मारक स्थल पर होने वाली रैली की तैयारियां पूरी हो गई हैं। शनिवार दोपहर बाद से ही प्रदेश के दूर-दराज के जिलों से बसपा समर्थकों का लखनऊ पहुंचना शुरू हो गया।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीशचंद्र मिश्र, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी, प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर, राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ सहित जिम्मेदार नेता समर्थकों की खातिरदारी में देर रात तक जुटे रहे।
स्पेशल ट्रेनों से आ रहे बसपा समर्थकों के स्मृति उपवन, रेलवे स्टेडियम सहित कई स्थानों पर रुकने की व्यवस्था की गई है। प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर ने बताया कि रैली ऐतिहासिक होगी।