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‘मुझे गर्म चाकू से जलाया गया, कान के छेद में रस्सी पिरो दी गई’

Mon, 13 Jun 2016 02:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 13 Jun 2016 02:44 PM IST
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brutality with child labourers in lucknow
चाइल्ड लाइन ने आयो‌ज‌ित की कार्यशाला - फोटो : amar ujala
‘मेरे पिता नहीं हैं। मां का पता नहीं चल रहा है। मेरी मौसी तीन साल पहले लखनऊ लेकर आई थी और यहां काम दिलवाया। काम के दौरान मुझे गर्म चाकू से जलाया गया लगातार पिटाई होती रही।’ यह दर्द असम की रहने वाली 12 साल की बच्ची रीता दास की है। 
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शरीर पर चोट के निशान उसके शब्द से कहीं ज्यादा दर्द बयां कर रहे थे। बहरहाल रीता अकेली नहीं है। रीता जैसी ही कहानियां अजहर, सुरेश और कई अन्य बच्चों की थीं जो उन्होंने रविवार को जिला न्यायालय के सभागार में आयोजित कार्यशाला में सामने रखीं। 
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विश्व बाल श्रम रोकथाम दिवस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और चाइल्ड लाइन लखनऊ द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में जिला जज वीरेंद्र सिंह और सीजेएम संध्या श्रीवास्तव भी शामिल हुए जिन्होंने अपने अनुभवों को सामने रखा। बच्चों का दर्द सुन ज्यादातर लोगों की आंखें नम हो गई थीं।
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गर्म चाकू से जलाया, दांत तोड़ डाले

brutality with child labourers in lucknow
रैली न‌िकालते बच्चे - फोटो : amar ujala

पिछले साल सितंबर में चाइल्ड लाइन को सूचना मिली कि 12 साल की एक बच्ची को एयरपोर्ट में सीआईएसएफ के जवान के घर पर घरेलू कामगार के रूप में रखा गया है। उसे असम से लाया गया है और घर में बंद करके पिटाई की जाती है।
 
सरोजनीनगर थाना पुलिस की सहायता से श्रम विभाग और चाइल्ड लाइन ने घर में घुसकर बच्ची को रेस्क्यू कराया। बच्ची ने अपना नाम रीता दास बताया। उसके शरीर पर गर्म चाकू से जलाने के निशान थे, सामने के दांत पिटाई की वजह से टूटे हुए थे, कान के छेद में रस्सी पिरो दी गई थी और काम कराया जाता था। 

उसे मुक्त कराने के बाद बाल कल्याण समिति ने उसका शोषण करने वाले परिवार पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए, लेकिन हल्की धाराएं लगाकर उन्हें छोड़ दिया गया। चाइल्ड लाइन के अनुसार उसकी मौसी उसे लेने आई थी लेकिन रीता ने उसके साथ जाने से मना कर दिया। 

वह अब अपनी छूटी हुई पढ़ाई आगे बढ़ा रही है, इस वर्ष कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की कक्षा छह में उसने एडमिशन लिया है। वह यूपी में ही रहकर बड़ी होकर अपने जैसे हालात से गुजर रही अनाथ बच्चियों के लिए काम करना चाहती है।

मिड डे मील तक में घपला कर रहे ठेकेदार

brutality with child labourers in lucknow

जिला जज वीरेंद्र सिंह ने चिंता जताई कि बीटेक और एमटेक कर रहे कई युवा भी चेन स्नैचिंग जैसे मामलों में शामिल पाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के सभी तबकों को बच्चों का मन सही दिशा में ढालने के लिए काम करना होगा। 

उन्होंने बच्चों के लिए बनने वाली योजनाओं में स्वीकृत राशि भी खर्च नहीं कर पाने को बच्चों के लिए बुरे हालात की वजह बताया। उन्होंने कहा कि मिड डे मील में ठेकेदार घटिया खाना बच्चों को दे रहे हैं।

सीजेएम संध्या श्रीवास्तव ने बताया कि श्रम विभाग द्वारा मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास के लिए 10 से 30 हजार रुपये तक मुआवजा देने की सरकार की स्कीम है, इसके तहत उनके नियोक्ता से जुर्माना वसूलकर मुआवजा दिया जाता है। लेकिन उनके पास बाल श्रमिकों के 300 मामलों की फाइल जस की तस पड़ी हैं। 

इनमें प्रदेश सरकार व श्रम विभाग भी कुछ नहीं कर रहा। जिन बच्चों को मुआवजा मिलना है, उनके माता-पिता गरीब और अधिकतर मामलों में अनपढ़ हैं, इसके बारे जानते तक नहीं हैं। कोई भी पक्ष कोर्ट नहीं आ रहा और केस लंबित बने हुए हैं। 

चाइल्ड लाइन निदेशक डॉ. संगीता शर्मा ने वर्कशॉप में बताया कि बाल श्रम के 98 प्रतिशत मामलों में गांवों और दूसरे राज्यों से बच्चों को लाकर काम पर लगाया गया है। ऐसे में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को भी बाल श्रम रोकथाम अभियानों को नियमित हिस्सा बनना चाहिए। श्रम विभाग के अधिकारी यशवंत कुमार ने बताया कि राजधानी में बाल श्रमिकों को मुक्त कराने के लिए चार टीमें बनाई गई हैं। 

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