मां का अंतिम संस्कार करने को लेकर 4 भाइयों में विवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कारोबारी बेटों द्वारा खाना न देने पर बूढ़ी मां ने पांच दिन पहले आत्मदाह कर लिया और अब उसके चारों बेटों में इस बात को लेकर रार मची है कि अंतिम क्रियाकर्म कौन अपने पैसे से करेगा।
इसके चलते मृतका अयोध्यादेई के अंतिम क्रियाकर्म स्थगित कर दिए गए हैं, यहां तक की घट भी नहीं बांधा गया है। मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाली चारों बेटों की इस करतूत से ग्रामीणों ने उनके परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया है।
पूराकलंदर थाना क्षेत्र के नरायनपुर गांव में 20 मार्च की रात 70 साल की वृद्धा अयोध्यादेई ने आत्मदाह कर जान दे दी थी।
अयोध्यादेई के पांच बेटे हैं जिनमें से एक मंदबुद्धि है पर चार का अपना-अपना कारोबार है, लेकिन चारों में बूढ़ी मां को भोजन देने पर विवाद चल रहा था।
तीन दिन भूखी रहने के बाद मां ने किया था आत्मदाह
भोजन देने को लेकर चारों बेटे विजय शंकर, बेंचू, जोखू, रमेश ने एक-एक माह की पारी बंधी थी। वर्तमान समय में भोजन देने की बारी जोखू की थी लेकिन तीन दिनों से वृद्धा और पांचवें मंदबुद्धि बेटे को भोजन नहीं मिला था।
आखिर तीन दिन भूख से तड़पने के बाद अयोध्यादेई घर में ही आत्मदाह कर लिया। मां की मौत के पांच दिन बाद भी चारों बेटों में अंतिम क्रियाकर्म में पैसा लगाने को लेकर सहमति नहीं बन पाई है जिससे कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है।
गांव के पूर्व प्रधान जनार्दन पांडेय, कुंवर बहादुर पांडेय, सियाराम गुप्ता, नारायन दास गुप्ता, सियाराम मौर्या, बीडीसी सदस्य पवन मौर्या, प्रधान करीमउल्ला, राजेश कोरी कहते हैं कि अयोध्यादेई और उसके साथ रह रहे बेटे के भोजन व परवरिश को लेकर चारों बेटों के बीच साल भर में कई बार पंचायत हुई लेकिन फिर भी वे मां और मंद बुद्धि भाई को खाना नहीं दे सके। ऐसी शर्मनाक घटना के लिए चारों बेटे जिम्मेदार हैं इसलिए इनका बहिष्कार कर दिया गया।