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समाज में सकारात्मक बदलाव लाएंगी प्रेरणादायक फिल्में : आनंदीबेन
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लखनऊ। बाल फिल्म महोत्सव से बच्चों ने बहुत कुछ सीखा होगा, जो भविष्य में उनके जीवन को नई दिशा देगा। प्रेरणादायक फिल्में समाज में सकारात्मक बदलाव लाएंगी। सिटी मॉन्टेसरी स्कूल की ओर से आयोजित 14वें अंतरराष्ट्रीय बाल फिल्म महोत्सव के समापन पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को यह बातें कहीं।
आनंदीबेन पटेल ने एचपीवी वैक्सीन लगवा चुकी बालिकाओं को सम्मानित किया। समारोह में बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुंदर प्रस्तुति दी।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा हम सुबह उठते ही गुरु, माता-पिता और बुजुर्गों को नमन कर आशीर्वाद लें तो पूरा दिन शुभ हो जाता है। अभिभावक बच्चों को उनकी प्रतिभा और रुचि के अनुसार उचित दिशा देने का प्रयास करें। राज्यपाल ने कहा, यूपी के विश्वविद्यालयों में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इससे विद्यार्थी अपनी रचनात्मकता, विचारशीलता और सामाजिक सहभागिता को बढ़ा रहे हैं।
जेल भ्रमण का अनुभव साझा करते हुए बताया कि अधिकतर महिलाएं दहेज के मामलों में बंद हैं और उनके साथ छोटे बच्चे भी सजा भुगत रहे हैं। यह स्थिति अत्यंत चिंतित करती है। उन्होंने बताया कि जब वे जिले के भ्रमण पर जाती हैं तो उनके आगमन से पूर्व 10वीं, 12वीं और कॉलेज के छात्रों को जेल का भ्रमण कराया जाता है। जब ये छात्र बाद में उनसे मिलते हैं तो उनके विचारों में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलता है। वे कहते हैं कि अब हम न तो दहेज लेंगे और न देंगे।
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आनंदीबेन पटेल ने एचपीवी वैक्सीन लगवा चुकी बालिकाओं को सम्मानित किया। समारोह में बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुंदर प्रस्तुति दी।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा हम सुबह उठते ही गुरु, माता-पिता और बुजुर्गों को नमन कर आशीर्वाद लें तो पूरा दिन शुभ हो जाता है। अभिभावक बच्चों को उनकी प्रतिभा और रुचि के अनुसार उचित दिशा देने का प्रयास करें। राज्यपाल ने कहा, यूपी के विश्वविद्यालयों में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इससे विद्यार्थी अपनी रचनात्मकता, विचारशीलता और सामाजिक सहभागिता को बढ़ा रहे हैं।
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जेल भ्रमण का अनुभव साझा करते हुए बताया कि अधिकतर महिलाएं दहेज के मामलों में बंद हैं और उनके साथ छोटे बच्चे भी सजा भुगत रहे हैं। यह स्थिति अत्यंत चिंतित करती है। उन्होंने बताया कि जब वे जिले के भ्रमण पर जाती हैं तो उनके आगमन से पूर्व 10वीं, 12वीं और कॉलेज के छात्रों को जेल का भ्रमण कराया जाता है। जब ये छात्र बाद में उनसे मिलते हैं तो उनके विचारों में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलता है। वे कहते हैं कि अब हम न तो दहेज लेंगे और न देंगे।
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