शादी के बाद पता चला कि पति नहीं है हिंदू
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राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल की ओर से रविवार को आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में पहले नाबालिग की शादी कराने का मामला सामने आया है। इसका खुलासा तब हुआ जब सोमवार को विदाई के वक्त दुल्हन पक्ष को किसी ने बताया कि दूल्हा दूसरे समुदाय का है।
उसके बाद दुल्हन ने खुद को नाबालिग बताते हुए पति संग जाने से इंकार कर दिया। विदाई को लेकर सोमवार को पूरे दिन पंचायत चलती रही लेकिन दुल्हन नहीं मानी। लड़की की मांग ने रोहनिया थाने में शिकायत की है, जिसमें 60 हजार रुपये लेकर किसी और से शादी कराने का आरोप लगाया है।
रोहनिया के पंडितपुर वासी श्रवण कुमार जायसवाल की पत्नी उषा से दो महीने पूर्व मंडुवाडीह के शिवदापुर निवासी बिट्टी नाम के एक युवक ने उनकी बेटी की शादी सामूहिक विवाह समारोह में करने की सलाह दी और शिवदासपुर के एक युवक से तय भी करा दी।
शादी के बाद पता चला पति नहीं है हिंदू
युवक का नाम दीपक जायसवाल बताया गया। रविवार 10 मई को सामूहिक विवाह समारोह में शादी कर दी गई। शादी कार्यक्रम के तुरंत बाद ही लड़की के घरवालों को पता चला कि दीपक हिंदू नहीं है। धोखे से शादी हुई है। लड़की ने पति संग जाने से इंकार कर दिया।
वर पक्ष का कहना था कि उन्होंने शादी के लिए 60 हजार रुपये भी दिए हैं। दुल्हन की मां की ओर से रोहनिया थाने में तहरीर भी दी गई। एसओ रोहनिया के मुताबिक लड़की का कहना है कि उम्र कम होने की वजह से वह शादी नहीं करना चाहती थी।
मां के दबाव की वजह से वह शादी को तैयार हुई थी। प्राथमिक जांच में पता चला कि दूल्हा दूसरे समुदाय का है। वहीं, अंतरधर्मिक विवाह की भनक मिलते ही विश्व हिंदू परिषद और हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े लोग विरोध में उतर आए हैं।
लोक समिति वैवाहिक समारोह का आयोजन करती है, जिसमें मैं भी शामिल हूं। विवाह दूल्हा और दुल्हन के परिवार वाले करते हैं। इसमें समिति की या मेरी कोई दखलंदाजी नहीं होती है।
सुरेंद्र पटेल, लोक निर्माण राज्यमंत्री