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छह लाख रुपए में हो रही हर अवैध बिल्डिंग 'वैध'

Tue, 27 Aug 2013 02:31 AM IST
लखनऊ/ऋषि मिश्रा
लखनऊ/ऋषि मिश्रा Updated Tue, 27 Aug 2013 02:31 AM IST
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bribe in lda for illegal building

पहले अवैध बिल्डिंग का निर्माण और बाद में उसको वैध साबित करने का खेल भी यहां खूब चलता है।

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कई बार शिकायत और ऊपरी दबाव के चलते अगर कोई बिल्डिंग सील कर भी दी जाती है, तो उसके बाद भी फिर से करप्शन मीटर चलने लगता है।

बिल्डिंग की कंपाउंडिंग के नाम फिर से लाखों का खेल शुरू होता है। राजधानी में ढाई मंजिल निर्माण की वैधता वाली बिल्डिंग में तीन से सात मंजिल तक निर्माण किया जा रहा है।

बिल्डिंग अगर सील हो गई तो उसको खुलवाने के लिए दो लाख रुपए प्रति मंजिल का खर्च दोबारा करना पड़ता है।

प्राधिकरण में जो कागज रखे जाते हैं, उनमें कहा जाता है कि, जितनी बिल्डिंग अधिकतम वैध संभव है उसकी कंपाउंडिंग जमा की जा रही है। जबकि बकाया जितना गलत है उसको ध्वस्त करने का शपथपत्र लगाया जाता है।
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बैंक गारंटी भी जमा की जाती है। इसके बाद सील खोल दी जाती है। मगर तोड़ा कुछ नहीं जाता है। मिलीभगत करके बैंक गारंटी भी वापस ले ली जाती है।

एक सील बिल्डिंग को खोलने के लिए कम से कम 6 लाख का खर्च प्राधिकरण में जेई से लेकर उच्च अभियंताओं तक जाता है। इसका सीधा मतलब है कि एक्शन होने के बावजूद अवैध बिल्डिंग की एक ईंट भी नहीं हटाई जाती है।
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प्राधिकरण में इस तरह के करीब 100 बिल्डिंगों में खेल चल रहा है। रोजाना अनेक सील बिल्डिंगों की पत्रावलियां अधिकारियों के समक्ष रखी जाती हैं। इस खेल में भी करीब 6 करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी चल रही है।

घूस का बदलता पैमाना
बिल्डिंग सील होने के बाद ही घूस का पैमाना बदल जाता है। बिल्डर अगर बहुत दबंग है, तो वह सील बिल्डिंग में ही निर्माण होने देता है।

इसके लिए पहले वह जो 2 लाख रुपए फ्लोर और 50 हजार रुपए महीन दे रहा था, वह अब एक लाख रुपए महीना और तीन लाख रुपए फ्लोर हो जाता है। बिल्डिंग की सील खुलवाने का खर्च अलग से।

उदाहरण के तौर पर जितनी अधिक फ्लोर हैं, प्रत्येक फ्लोर का दो लाख रुपए का खर्च होता है। इसके बाद में सारी प्रक्रिया धीरे-धीरे एलडीए से पूरी करा ली जाती है।

इस दौरान इंजीनियरों की मौके की रिपोर्ट और फोटोग्राफ तक कुछ इस अंदाज में खींचे जाते हैं कि, वे बिल्डर के प्रत्यावेदन के अनुरूप रहें ताकि सील खुलने में कोई परेशानी न हो।


7 करोड़ प्रॉफिट की 1 करोड़ घूस
अवैध बिल्डिंग में 25 से 50 लाख रुपये कीमत के फ्लैट बेचे जा रहे हैं। औसतन पांच मंजिल की एक बिल्डिंग जो कि 4000 वर्ग फीट उसमें 20 फ्लैट बनाए जाते हैं।

लगभग 10 करोड़ रुपए में ये फ्लैट बिकते हैं। जबकि बिल्डिंग निर्माण व भूमि का खर्च मिला कर तीन करोड़ रुपए से अधिक का नहीं आता है। इसका सीधा अर्थ है अवैध बिल्डिंग के निर्माण में तिगुना फायदा।

इस फायदे में अगर कुछ हिस्सा बतौर घूस भी चला जाए तो भी बिल्डर को दोगुना फायदा होता है। इस बिल्डिंग के निर्माण और बिकने में समय दो वर्ष का लगता है।

ऐसे में 20 फ्लैटों की बिल्डिंग के जरिये दो साल में बिल्डर पांच करोड़ रुपए कमा लेता है। यह भी घूस की रकम हटा कर।

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