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परीक्षा देने लखनऊ आए इस युवक के साथ हुआ हादसा, गमगीन माहौल में भी भाई ने पेश की मिसाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 10 Apr 2018 02:37 PM IST
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सूर्यभान (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ के गोमतीनगर में आंबेडकर पार्क के पास रविवार शाम सड़क पार करते वक्त बाइक की टक्कर लगने घायल सूर्यभान (25) की मौत हो गई। वह समीक्षा अधिकारी की परीक्षा देने दो दोस्तों के साथ राजधानी आया था।
पुलिस की सूचना पर आए परिवारीजनों ने गमगीन माहौल में भी आंखें दान कर मिसाल पेश की। इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह ने बताया कि कुशीनगर के बड़ौली निवासी राम श्रवण का बेटा सूर्यभान शनिवार को दोस्तों संग लखनऊ आया था।
रविवार को समीक्षा अधिकारी की दो पालियाें में परीक्षा दी। इसके बाद नितिन और विपिन के साथ आंबेडकर पार्क घूमने जा रहा था। नितिन और विपिन सड़क पार कर गए, सूर्यभान पीछे था। तभी बेकाबू बाइक ने उसे टक्कर मार दी।
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हादसा होते ही वह बेहोश होकर गिर गया। दोस्तों ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे लोहिया में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत करार दिया।
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पुलिस की सूचना पर आए परिवारीजनों ने गमगीन माहौल में भी आंखें दान कर मिसाल पेश की। इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह ने बताया कि कुशीनगर के बड़ौली निवासी राम श्रवण का बेटा सूर्यभान शनिवार को दोस्तों संग लखनऊ आया था।
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रविवार को समीक्षा अधिकारी की दो पालियाें में परीक्षा दी। इसके बाद नितिन और विपिन के साथ आंबेडकर पार्क घूमने जा रहा था। नितिन और विपिन सड़क पार कर गए, सूर्यभान पीछे था। तभी बेकाबू बाइक ने उसे टक्कर मार दी।
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हादसा होते ही वह बेहोश होकर गिर गया। दोस्तों ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे लोहिया में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत करार दिया।
भाई की आंखे की दान
डेमो
इंस्पेक्टर ने बताया कि परिवारीजनों को सूचना दे दी गई थी। सोमवार सुबह सूर्यभान का भाई चंद्रभान लखनऊ पहुंचा। पोस्टमार्टम के बाद उसका शव सुपुर्द कर दिया गया।
पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे भाई चंद्रभान ने बताया कि पिता राम श्रवण फर्नीचर का काम करते हैं। सूर्यभान एमकॉम करने के बाद एमबीए की तैयारी कर रहा था।
हादसे ने पूरे परिवार की उम्मीद छीन ली। भाई चंद्रभान ने डॉक्टरों से बातचीत करने के बाद सूर्यभान की आंखें दान कर दीं। चंद्रभान ने कहा कि भाई के जाने का गम है, उसकी आंखों से दूसरा व्यक्ति अपने जीवन के सुनहरे सपने देख सकेगा।
पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे भाई चंद्रभान ने बताया कि पिता राम श्रवण फर्नीचर का काम करते हैं। सूर्यभान एमकॉम करने के बाद एमबीए की तैयारी कर रहा था।
हादसे ने पूरे परिवार की उम्मीद छीन ली। भाई चंद्रभान ने डॉक्टरों से बातचीत करने के बाद सूर्यभान की आंखें दान कर दीं। चंद्रभान ने कहा कि भाई के जाने का गम है, उसकी आंखों से दूसरा व्यक्ति अपने जीवन के सुनहरे सपने देख सकेगा।