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जब लोगों में हिंदू कहने की हिम्मत नहीं थी, संघ ने कहा गौरव महसूस होता है : अमित शाह

Tue, 10 Oct 2017 10:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 10 Oct 2017 10:50 PM IST
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Book launch on former chiefs of RSS.
RSS के पांच सरसंघ चालकों पर बुक लांच के मौके पर सीएम योगी, राज्यपाल राम नाईक व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह - फोटो : amar ujala

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि जब लोग हिंदू कहने की हिम्मत नहीं करते थे, तब संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने कहा कि हिंदू होने में कोई शर्म नहीं है बल्कि गौरव होता है। जो सच है, उसे कहना चाहिए यह बात बड़ी ताकत देती है। इसी स्पष्टता व ताकत ने संघ को तमाम झंझावातों के बीच वटवृक्ष के रूप में स्थापित किया।

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शाह ने साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में संघ के संस्थापक व प्रथम सर संघचालक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार व उनके बाद के चार सर संघचालकों माधवराज सदाशिवराव गोलवलकर गुरुजी, बालासाहब देवरस, रज्जू भैया व केसी सुदर्शन के जीवन यात्रा से जुड़ी पुस्तकों का विमोचन करने के लिए आयोजित समारोह में कही।
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उन्होंने कहा,डॉ. हेडगेवार अपने लिए नहीं, हमेशा संघ के लिए जिए। यही परंपरा आगे बढ़ी। जब गुरु पूजा का सवाल आया तो उन्होंने खुद की जगह भगवाध्वज को गुरु का सम्मान देकर पूजा करने की व्यवस्था दी।
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शाह ने कहा, संकुचित दृष्टि वालों को संघ के साथ भगवा ध्वज में एक धर्म व संप्रदाय जुड़ा दिखता है लेकिन संघ के लिए यह त्याग, बलिदान, संस्कृति और राष्ट्रगौरव का प्रतीक है। संघ में व्यक्ति का व्यवस्था में महत्व नहीं रहा। इसी वजह से अनेक संकट व प्रतिबंध आए लेकिन रास्ता बनता गया और यह संगठन वटवृक्ष बनता गया।

यह भी बोले भाजपा अध्यक्ष

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह - फोटो : amar ujala
- आरएसएस की 1925 से 2017 तक की यात्रा तमाम उतार-चढ़ाव, कठिनाई, संघर्ष और तीन-तीन प्रतिबंध से यहां तक पहुंची है। कई बार लगता था कि प्रकाश देने वाली यह ज्योति बुझ तो नहीं जाएगी लेकिन हर बार और ज्यादा तेज के साथ सामने आई।

- 1925 में जब संघ स्थापित हुआ तब सारे देशभक्त सोचते थे कि देश को आजाद कैसे करें? लेकिन डॉ. हेडगेवार सोचते थे देश गुलाम कैसे हुआ? डॉक्टर साहब की कार्यपद्धति रोग को जड़ से मिटाने की थी।

- डॉ. हेडगेवार ने संघ के जरिए व्यक्ति से समाज, समाज से राष्ट्र गौरव का निर्माण कैसे किया, यह किसी को पता नहीं चल सका।

- कानूनी पचड़े के बीच पता चला कि इतने बड़े संगठन का कोई संविधान नहीं। यह लोगों के सहयोग से चल रहा है।

- दुनिया में ऐसी कोई संस्था नहीं जो बिना चंदे के चलती हो। संघ ही ऐसा है जो गुरु दक्षिणा से चलता है।

- संघ के कार्यकर्ता का घर नहीं, परिवार नहीं, सब कुछ समाज का है। इसके तमाम स्वयंसेवक निजी हित छोड़कर काम कर रहे हैं। यदि वे कारोबार, साहित्य, संगीत, चित्रकला या उद्योग के क्षेत्र में होते तो ऊंचाइयों पर होते।

- संघ पावर हाउस है। बहुत सारे लोग निकले। अनेक क्षेत्रों में निकले। इस संगठन ने सार्वजनिक जीवन को निर्णायक मोड़ और दिशा दी।

-  आरएसएस की शाखा में होता क्या है? आज तक यह लोगों के लिए अजूबा है। इसके  बारे में जानना है तो शाखा में जाना होगा।
 
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