गंगा में श्रद्धालुओं से भरी नाव पलटी, 13 लोग डूबे
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यूपी के कानपुर शहर में जाजमऊ के सिद्धनाथ घाट पर गुरुवार शाम गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं से भरी नाव पलटने से 13 लोग गंगा नदी में डूब गए। इनमें से दो लोगों की मौत हो गई, दो बचा लिए गए और नौ लोग अभी लापता हैं। पुलिस, पीएसी और प्राइवेट गोताखोर लापता लोगों की तलाश में जुटे रहे पर कुछ पता नहीं चला।
देर रात तक लापता लोगों के परिजनों ने पुलिस और प्रशासनिक अफसरों पर बचाव कार्य में लापरवाही बरतने का आरोप लगा हंगामा और नारेबाजी की। डीएम, एसएसपी समेत तमाम अफसर घटनास्थल पर जमे रहे।
प्राइवेट बस चलाने वाले राजेश अग्रवाल परिवार के साथ शिव कटरा लालबंगला में पदमा गुप्ता के मकान में किराए पर रहते हैं। उन्होंने घर में गणपति प्रतिमा स्थापित की थी। गुरुवार परिवार और रिश्तेदारों के साथ शाम को सिद्धनाथ घाट पर गंगा नदी में प्रतिमा विसर्जित करने गए।
सिद्धनाथ घाट के घाटेशोरन घाट पर लोगों ने गंगा नदी में प्रतिमा विसर्जित करने से रोक दिया पर राजेश समेत 13 लोग एक नाव पर सवार होकर गंगा में आगे बढ़ गए। बीच धार में नाव से प्रतिमा को गंगा नदी में डालते समय अचानक नाव पलट गई और सभी लोग पानी में डूब गए।
तैराक ने तीन लोगों को बाहर निकाला
शोर शराबा सुनकर घाट पर सो रहा तैराक अजय उर्फ राजा तिवारी पहुंचा और गंगा में छलांग लगाकर तीन लोगों को बाहर निकाल लिया। इन्हें फौरन हैलट अस्पताल भेजा गया, जहां दो लोगों की मौत हो गई। बाकी लोगों की तलाश के लिए घाट पर मौजूद कुछ गोताखोर नदी में कूदे लेकिन तेज बहाव होने के कारण कुछ पता नहीं चला।
थोड़ी देर बाद थाना पुलिस पहुंची और निजी गोताखोर बुलवाकर गंगा में उतारे। जल पुलिस की मोटरबोट मंगाई गई। बाद में डीएम कौशल राज शर्मा, एसएसपी शलभ माथुर, एडीएम सिटी अविनाश सिंह और एसपी पूर्वी देव रंजन वर्मा भारी फोर्स के साथ पहुंचे और राहत-बचाव कार्य तेज कराया।
हादसे के शिकार लोगों के परिजन भी घाट पर पहुंच गए और कोहराम मच गया। पुलिस ने बताया शिवकटरा निवासी मेडिकलस्टोर संचालक संजय अग्रवाल (38) और कोंच जालौन निवासी संजय के मामा संतोष (35) की मौत हुई है।
नाव वाले होंगे पाबंद, फोर्स बढ़ेगी
जिलाधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को सभी घाटों के नाविकों को इस बात के लिए पाबंद किया जाएगा कि वह किसी भी हाल में गंगा में गणेश प्रतिमा विसर्जित नहीं कराएंगे। अगर गंगा में विसर्जित कराया तो कार्रवाई होगी।
सभी घाटों पर फोर्स और प्राइवेट गोताखोर भी बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने प्रतिमा विसर्जन के लिए रात से ही बने कृत्रिम तालाबों के आसपास घाटों पर पुलिस पेट्रोलिंग, संबंधित एसीएम को निगरानी के निर्देश दिए हैं। सभी चिह्नित स्थलों पर गोताखोरों की संख्या बढ़ाने, कृत्रिम तालाबों की सफाई कराने के लिए भी कहा गया है।
जल पुलिस के नाम पर चार सिपाही
जल पुलिस के नाम पर शहर में बस चार सिपाही हैं। पहले सरसैया घाट में जल पुलिस की चौकी बनी थी। इसमें एक दरोगा, दो हेड कांस्टेबिल और दस सिपाही तैनात थे। अब बचे चार सिपाही सरसैया घाट पर ही तैनात रहते हैं। शहर के बाकी गंगा घाटों पर व्यवस्था भगवान भरोसे है।
टहल रहे थे सिपाही, गोताखोर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सिद्धनाथ घाट पर दो सिपाहियों की ड्यूटी थी। कुछ प्राइवेट गोताखोरों को लगाया गया था। सिपाही और गोताखोर इधर-उघर घूम रहे थे। गंगा में विसर्जन की जिद पर पंडों से झगड़ा होने पर सिपाही आए और इन लोगों को चलता कर दिया। फिर सिपाहियों ने अपनी ड्यूटी घाट पर ही होने की बात कहते हुए इन्हें आगे जाने दिया।
घाट पर मची चीख पुकार
सिद्धनाथ घाट पर विसर्जन के लिए राजेश अग्रवाल ने मछली के शिकार में इस्तेमाल होने वाली छोटी सी नाव तय की। जोश में छोटी नाव पर 13 से ज्यादा लोग बैठ गए। नाविकों का कहना है कि इस नाव में तीन-चार लोग ही बैठ सकते हैं, पर 13 लोग बैठ गए तो हादसा होना तय था।
प्रतिमा विसर्जित करते समय नाव एक तरफ झुकी और पलट गई। नाव भी गंगा में डूब गई। नाविक तैर कर दूसरी ओर से भाग निकला। बाद में गोताखोरों ने नाव को निकाल लिया।
डूबे लोगों को खोजने के लिए जल पुलिस और पीएसी के साथ प्राइवेट गोताखोरों को गंगा नदी में उतारा गया। शुक्लागंज के मोहम्मद हलीम और शकील ने अपनी टीम के साथ गंगा में लोगों की तलाश की। जल पुलिस के मोती लाल, बृज मोहन और कृष्णानंद स्टीमर के साथ बचाव कार्य में जुटे रहे। पीएसी की फ्लड टीम, दो मोटर बोट और फायर ब्रिगेड के जवान भी लगाए गए।