पत्नी कहती रही खुदा से डरो लेकिन घर पर करता रहा गरीबों के खून का धंधा
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लखनऊ के ठाकुरगंज में दो साल से घर पर ब्लड बैंक खोलकर गरीबों का खून बेचने वाले शातिर को सोमवार देर रात क्राइम ब्रांच की टीम ने दबोच लिया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी के घर से चार यूनिट ब्लड व 13 यूनिट प्लाज्मा, ब्लड प्रेशर नापने की मशीनें, भारी मात्रा में सिरिंज, खून से भरे और खाली पाउच व अन्य उपकरण बरामद हुए हैं।
पुलिस ने बताया कि जीवन अस्पताल, मड़ियांव का एसएस अस्पता, कैरिअर अस्पताल की ब्लड बैंक, मीरान अस्पताल, फैमिली अस्पताल और बालागंज के एक अस्पताल सहित कई अस्पतालों में सप्लाई होती थी।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि पकड़ा गया शातिर मो. आरिफ हुसैनाबाद पुरानी चौकी के पास स्थित नौशाद के मकान में परिवार सहित किराए पर रह रहा था। वह दो साल से खून बेचने का धंधा कर रहा था।
आरिफ अपने एजेंटों के जरिए सीतापुर, हरदोई व आसपास के जनपदों से प्रोफेशनल ब्लड डोनर्स के अलावा रिक्शा चालकों, मजदूरों, ठेले-खोमचेवालों से संपर्क कर उन्हें घर बुलाता था और खून निकालकर पुराने लखनऊ के निजी ब्लड अस्पतालों व ब्लड बैंकों में सप्लाई करता था।
उसके संपर्क में पुराने लखनऊ के कई निजी अस्पताल व ब्लड बैंक थे। वह रोज दस से 15 लोगों का ब्लड निकालकर फ्रीजर में रख लेता था। जरूरत पड़ने पर इस ब्लड की सप्लाई कर दी जाती थी। ब्लड की व्यवस्था अगर ज्यादा हो जाती थी तो वह उसे निजी ब्लड बैंक में सुरक्षित रखवा देता था।
इंजेक्शन से निकालता था खून
करीब दो साल पहले किसी ने खून के धंधे में अच्छी कमाई का लालच दिया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मो. आरिफ ब्लड ग्रुप के हिसाब से कीमत तय करता था। ब्लड ग्रुप जितना रेयर (दुर्लभ) होता था, उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होती थी।
ओ पॉज़िटिव का रेट सामान्य ग्रुप से अधिक था तो ओ निगेटिव के दोगुने व एबी निगेटिव के तीन से चार गुना दाम वसूले जाते थे। बीते सप्ताह एबी निगेटिव रक्त की दो यूनिट उसने 18000 रुपये तक की बेची थीं।
मो. आरिफ इंजेक्शन से खून निकालता था। हाथ की नस में इंजेक्शन लगाकर वह उससे ब्लड पाउच का पाइप जोड़ देता था। जब पाउच भर जाता तो उसे फ्रिज में रखवा देता अथवा किसी ब्लड बैंक भेजवा देता।
पुलिस को जो पाउच मिले हैं उसमें किसी में कम तो किसी में ज्यादा ब्लड पाया गया है। यानी उसके पास ब्लड नापने की कोई व्यवस्था नहीं थी। वह अंदाजे से ही पाउच में ब्लड एकत्र करता था।
एजेंट करते थे डोनर की व्यवस्था
मो. आरिफ एक यूनिट ब्लड के बदले डोनर को 1200 रुपये तक देता था जबकि निजी अस्पतालों और ब्लड बैंकों को वह चार से पांच हजार रुपये में एक यूनिट बेचता था।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि मो. आरिफ ने कई एजेंट को डोनर की व्यवस्था करने के लिए लगा रखा था। यह एजेंट मजदूरों के अड्डों, रिक्शा चालकों के स्टॉपेज, केजीएमयू व अन्य सरकारी अस्पतालों के आसपास मंडराते रहते थे।
यहां आने वाले डोनर को वह ज्यादा रुपये मिलने का लालच देकर मो. आरिफ के घर भेज देते थे। यही एजेंट खून की जरूरत वाले लोगों से मो. आरिफ का संपर्क कराते थे।