इंश्योरेंस कंपनी ने छह करोड़ के पुराने नोट से किया बीमा
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भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने नोटबंदी के बाद पुराने 6 करोड़ की ब्लैक मनी बीमे में खपा दी। मंगलवार देर रात आयकर विभाग की छापामारी में कंपनी का यह खेल सामने आया है।
विभाग का आरोप है कि कंपनी ने करीब छह करोड़ रुपये के पुराने नोट से बैक डेट में लोगों एवं वाहन का बीमा किया है इस फर्जीवाड़े के सभी दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं अफसरों की टीम रात 12 बजे के बाद जांच में जुटी रही।
आयकर महानिदेशक (जांच) इकाई की टीम ने शाम को हजरतगंज के हलवासिया स्थित इंश्योरेंस कंपनी के कार्यालय पर छापा मारा, जिसमें करीब दो लाख रुपये का कैश और बड़े पैमाने पर 6 करोड़ के पुराने नोट 1000 एवं 500 से इंश्योरेंस करने के दस्तावेज पाए गए।
सूत्र बताते हैं कि खुफिया सूचनाएं सही पाई गई हैं। आयकर विभाग के द्वारा आईआरडीए को पत्र लिखकर भारतीय एक्सा इंश्योरेंस कंपनी के फर्जीवाड़ा का चिट्ठा बताकर उसका लाइसेंस निरस्त करने का अनुरोध करेंगे।
भारती एक्सा इंश्योरेंस कंपनी के एजेंटों ने घर-घर कॉल करके बीमा कराने के लिए बुलाया था। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक एजेंटों पर शिकंजा कसा तो टीम को बताया कि बीमा कराने के लिए लोगों को बताया गया कि पुराने नोट 1000 एवं 500 से बीमा की किस्त चुकता कर सकते हैं।
बीमा कराने वाले 500 लोगों को जारी होगा नोटिस
राजधानी के जिन बीमा धारकों ने पुराने नोट से प्रस्ताव की प्रक्रिया पूरी कराने के बाद पेमेंट की कच्ची रसीद दिसंबर में काटी पर बीमा देने की रसीद नवंबर मेें जारी की है।
आयकर टीम को इस फर्जीवाड़ा का साक्ष्य हाथ लग चुका जिसको जब्त कर लिया गया है। भारती एक्सा इंश्योरेंस कंपनी ने पुराने नोट से अब तक कुल कितने बीमा किए की जांच आधी रात के बाद तक करती रही।
भारती एक्सा इंश्योरेंस कंपनी से पुराने नोटों से बैक डेट में बीमा कराने वाले 500 से अधिक लोगों को जल्द नोटिस भेजकर जवाब तलब करेगा। आयकर विभाग का कहना कि इस धोखाधड़ी की प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराने की सिफारिश की जाएगी।
इस जांच की जद में बीमा धारक, एजेंट एवं कंपनी के अधिकारी आएंगे। नोटबंदी के दौर में बीमा करने वाली कंपनियों ने धंधा चमकाने मं कोई कसर नहीं छोड़ी। एसबीआई लाइफ, एचडीएफसी लाइफ व अन्य बीमा कंपनियों के नाम पर फोन कर बीमा कराने का आग्रह करते थे।
जब ग्राहक पैसो की किल्लत की बात करते तो वे पुराने नोटों के जरिए भी बीमा कराने का चारा फेंकते। पुराने नोटों को खपाने के लालच में कई लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई भी गंवा दी है। कारोबार चमकाने और टारगेट पूरा करने के चक्कर में कंपनियों ने कई भोले-भाले लोगों का पैसा फंसा दिया।