मिशन 2019: अटल की तेरहवीं के बाद सोशल इंजीनियरिंग में जुटेगी भाजपा, ये है पूरी तैयारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी के तेरहवीं संस्कार के बाद जातियों के जोड़ से चुनावी गणित दुरुस्त करने में भाजपा फिर से जुटेगी। सपा- बसपा गठबंधन की काट तथा जातियों की लामबंदी के लिए हर उपाय पर काम कर रही भाजपा ने 30 अगस्त से सामाजिक सम्मेलनों का सिलसिला दोबारा शुरू करने की तैयारी की है।
अटलजी के निधन के चलते सम्मेलन स्थगित कर दिए गए थे। कुछ सम्मेलनों की तारीखें भी तय कर दी गई हैं। कुछ की तय की जा रही है। साथ ही जिस समाज के सम्मेलन प्रदेश स्तर पर हो चुके हैं उसे अब जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में करने का खाका खींचा जा रहा है।
भाजपा की रणनीति लोकसभा चुनाव में गठबंधन की चुनौतियों के मद्देनजर पिछड़ों और दलितों के दिल-दिमाग में उतरकर उनमें यह भरोसा भरने की है कि सिर्फ भाजपा ही उनकी सच्ची हितैषी है। पहले चरण में पिछड़ी जातियों के सम्मेलन शुरू किए गए हैं। इसके बाद दलितों के भी अलग-अलग समाज के सम्मेलन करने की योजना है।
इसका मकसद सरकार और संगठन के प्रमुख व्यक्तियों का विभिन्न समाज के प्रतिनिधियों से संवाद कराना है ताकि ये प्रतिनिधि अपने समाज के बीच भाजपा की पैरोकारी कर सकें। साथ ही यह भरोसा दिला सकें कि उनके प्रतिनिधि सरकार और सत्तारूढ़ दल तक उनकी समस्याएं और शिकायतें पहुंचाने में सक्षम हैं।
अलग-अलग समाज की समस्याएं सुन रहे हैं सीएम योगी व डिप्टी सीएम केशव
सम्मेलनों में संगठन के प्रमुख लोगों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी शामिल होकर अलग-अलग समाज की समस्याएं सुन रहे हैं। उनका निराकरण कराने के साथ संबंधित वर्ग के लोगों के कल्याण के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे काम भी बताए जा रहे हैं।
ये नेता आंकड़ों और तथ्यों की जमीन पर सम्मेलन में हिस्सा लेने वालों को यह भरोसा देने की कोशिश करते हैं कि उनके हितों की भाजपा से अधिक ईमानदारी से किसी ने चिंता नहीं की।
केंद्र सरकार की तरफ से पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से पिछड़ी जातियों को होने वाले लाभ के बारे में समझाया जाता है। प्रदेश सम्मेलन में आने वालों के जरिये अपनी बात, काम व योजनाओं को संबंधित तबके तक पहुंचाकर उन्हें अपने साथ लामबंद करना भाजपा की रणनीति है।
कब किसके सम्मेलन
सम्मेलनों के प्रभारी बाबूराम निषाद कहते हैं कि इन आयोजनों का मकसद चुनावी नहीं है। पर, सत्तारूढ़ दल और सरकार में होने के नाते विभिन्न वर्गों के कल्याण के लिए हो रहे काम बताना आवश्यक है, हम वही कर रहे हैं। सवाल वोट का नहीं बल्कि पिछड़े वर्गों के लोगों को यह बताने का है कि वे सरकारी योजनाओं के जरिये कैसे आत्मनिर्भर हो सकते हैं।
निषाद भले ही सम्मेलनों के चुनावी मकसद से इन्कार कर रहे हों लेकिन इसकी तैयारी बताती है कि प्रयत्न पिछड़ी जातियों के तबकों से नजदीकी रिश्ता बनाकर सोशल इंजीनियरिंग के लिहाज से एक मजबूत टीम खड़ी करना है। प्रजापति, नाई और राजभर समाज के लोगों के सम्मेलन कर चुकी भाजपा अब बची पिछड़ी जातियों के सम्मेलन करेगी।
इस सिलसिले में 30 अगस्त को यहां विश्वेश्वरैया सभागार में अर्कवंशी, खड्गवंशी, हरकवंशी, परिहार और खंगार समाज का सम्मेलन आयोजित है। अगले दिन 31 अगस्त को विश्वकर्मा, लोहार, बढ़ई, पांचाल समाज, उसके अगले दिन 1 सितंबर को पाल, गड़रिया व बघेल, 2 सितंबर को साहू, राठौर व तेली और 5 सितंबर को लोधी बिरादरी के सम्मेलन होंगे।
भुर्जी और हलवाइयों का 6 सितंबर को, कश्यप, निषाद, बिंद, केवट, मल्लाह, रैकवार, धीमर, बाथम, मांझी, गोंड बिरादरी का सम्मेलन 7 सितंबर को होगा। कुर्मी, सचान, पटेल, गंगवार और कटियार बिरादरी का सम्मेलन 12 सिंतबर को तय किया गया है। बाकी समाज के सम्मेलन भी तय किए जा रहे हैं।