'सात दिन' बदल देंगे मोदी सरकार के बारे में आप की सोच
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मोदी सरकार की पहली सालगिरह पर सूबे में एक सप्ताह का जश्न मनाने की तैयारी हो रही है। इसके तहत भाजपा कार्यकर्ता लोगों को एक साल के दौरान किए गए कामकाज की जानकारी देंगे। साथ ही भूमि अधिग्रहण सहित केंद्र सरकार के कुछ कामों को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई भी देंगे।
पहले दिन 26 मई को सभी जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है। इसके बाद एक सप्ताह तक अलग-अलग तरीके से विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम होंगे।
पार्टी के रणनीतिकारों ने फैसला किया है कि इस मौके पर संपर्क व संवाद के जरिये लोगों के दिमाग से केंद्र सरकार को लेकर बन रही नकारात्मक छवि निकाली जाए।
इसके लिए जहां लोगों को सरकार के कामकाज का ब्यौरा बताने की तैयारी हो रही है, वहीं कश्मीर मुद्दे से लेकर भूमि अधिग्रहण कानून तक पर सफाई देने की रणनीति बन रही है। लोगों में बांटने के लिए प्रचार सामग्री भी छपवाई जा रही है।
इन उपलब्धियों पर रहेगा जोर
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, उपलब्धियों में प्रधानमंत्री जनधन योजना, अटल पेंशन योजना, बीमा योजना, स्वच्छता अभियान, गैस सब्सिडी का खाते में डायरेक्ट ट्रांसफर जैसे कामों के बारे में लोगों को प्रमुखता से बताने की योजना बनाई गई है।
यह समझाने की कोशिश की जाएगी कि देश में पहली बार किसी सरकार ने सभी को बीमा के जरिये सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है।
राशन कार्ड में मुखिया के नाम पर महिलाओं को वरीयता और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनसे महिलाओं का न सिर्फ सामाजिक बल्कि कानूनी तौर पर भी महत्व बढ़ेगा।
किसानों को हुए नुकसान के मानकों में छूट दी गई है। नमामि गंगे के जरिये गंगा सफाई का काम हाथ में लिया गया है।
सरकार को 60 महीने देने की होगी बात
कार्यकर्ताओं को यह बात समझाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है कि भले ही सरकार के काम का जमीन पर आज वह असर नहीं दिख रहा है लेकिन आने वाले दिनों में इसके दूरगामी परिणाम सामने आएंगे।
माहौल बदलने की जो कोशिश सरकार ने एक साल में शुरू की है, उसका असर कुछ दिन बाद दिखेगा। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को यहां कहा भी कि कार्यकर्ता लोगों को बताएं कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के लंबे शासन के दौरान इतनी सारी गड़बड़ियां हो चुकी हैं। पूरी कार्यप्रणाली को जटिल बना दिया गया है।
इसीलिए केंद्र सरकार के कामकाज का अपेक्षित प्रभाव नहीं दिख रहा है। हमने इसे ठीक करने की कोशिश शुरू की है। कोई सरकार जब सिस्टम बदलने की कोशिश करती है तो समय लगता है। इसलिए सरकार का आकलन करने के लिए पूरे 60 महीने दिए जाएं।
यूं ही नहीं है सफाई देने पर जोर
उपलब्धियां बताने के साथ सफाई देने पर जोर यूं ही नहीं है। दरअसल, भगवा रणनीतिकारों की चिंता यह है कि भले ही सरकार ने दूरगामी परिणाम देने वाले कई काम किए हों लेकिन लोगों में उसका कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं दिख रहा है।
भाजपा के एक प्रदेश महामंत्री उदाहरण देते हैं कि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और काले धन पर रोक के उपाय सराहनीय हैं। केंद्र सरकार के कामकाज का ढर्रा बदलने के लिए शुरू किए गए बदलाव का भी अपना महत्व है। पर, इनके तत्काल व सीधे नतीजे तो दिखाई नहीं पड़ते।
इसलिए अच्छे कामों के बावजूद जनता के बीच केंद्र सरकार की कुछ काम न करने की छवि बनती जा रही है। इसीलिए महासंपर्क अभियान के दौरान लोगों को वस्तुस्थिति बताने व समझाने पर विशेष जोर देने की योजना बनी है।