मंत्रिपरिषद विस्तार: यूपी के एजेंडे पर आगे बढ़े मोदी
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मंत्रिपरिषद विस्तार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूपी के एजेंडे पर और आगे बढ़ गए। उन्होंने साफ कर दिया कि यूपी के विधानसभा चुनाव में भले ही अभी दो साल से ज्यादा का वक्त हो लेकिन उसके लिए उन्होंने खाका खींच लिया है। आने वाले दिनों में उस योजना पर महज अमल होना है।
इसीलिए उन्होंने पहले विस्तार में जहां यूपी को पूरी तवज्जो देकर यह बताने की कोशिश की है कि अटल बिहारी वाजपेयी के इस प्रदेश की उनके लिए कितनी अहमियत है। यहां के सामाजिक समीकरणों पर भी उनकी नजर बनी हुई है।
इस विस्तार के साथ मोदी के मंत्रिपरिषद् में उत्तर प्रदेश से मंत्रियों की संख्या 13 हो जाएगी। प्रधानमंत्री सहित यह संख्या 14 हो जाती है। वैसे तो मनोहर परिकर गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। पर, बतौर कैबिनेट मंत्री मनोहर परिकर यूपी के कोटे से ही शामिल हुए हैं। वे यूपी के कोटे से राज्यसभा सदस्य बनने जा रहे हैं।
नोएडा से सांसद डॉ. महेश शर्मा (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार), राज्यसभा सदस्य पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी, आगरा से दूसरी बार सांसद व पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री रामशंकर कठेरिया और फतेहपुर से सांसद साध्वी निरंजन ज्योति राज्यमंत्री बनाई गई हैं।
राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र, उमा भारती और मेनका गांधी कैबिनेट मंत्री, पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह व संतोष गंगवार स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री, मनोज सिन्हा व डॉ. संजीव बालियान राज्यमंत्री के रूप में पहले से ही शामिल हैं।
पांच कैबिनेट तो आठ राज्यमंत्री
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद उत्तर प्रदेश से सांसद हैं। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले चार कैबिनेट, दो स्वतंत्रप्रभार राज्यमंत्री और दो राज्यमंत्री थे। इनमें सभी लोकसभा सदस्य थे। अब पांच कैबिनेट, तीन स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री और पांच राज्यमंत्री हो गए हैं।
इनमें दो अब राज्यसभा से हो जाएंगे। मुख्तार अब्बास नकवी पहले से राज्यसभा सदस्य हैं। पार्रिकर भी यूपी सेे ही राज्यसभा पहुंच रहे हैं। यदि परिकर रक्षामंत्री बन जाते हैं, तो प्रदेश के कोटे में प्रधानमंत्री के बाद गृह व रक्षा जैसे दो महत्वपूर्ण मंत्रालय भी आ जाएंगे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दबदबा
विस्तार में जगह पाए चेहरों में परिकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से निकले हैं। वह गोवा के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। बीच में उनका नाम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए भी चला था। स्वतंत्रप्रभार के राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा चिकित्सक हैं। वह भी संघ से जुड़े हैं। मुख्तार अब्बास नकवी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं।
यूपी में उनका नाम राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान चर्चा में आया। वह 1998 में एक बार रामपुर से लोकसभा सदस्य भी रहे। प्रो. रामशंकर कठेेरिया भी संघ पृष्ठभूमि के हैं। वह प्रचारक भी रहे हैं। वह आगरा से दूसरी बार सांसद हैं। साध्वी निरंजन ज्योति राम जन्म आंदोलन से जुड़ी रही हैं। उनका भी संघ से जुड़ाव रहा है।
इस पर रहा खासा जोर
विस्तार में यूपी के क्षेत्रीय व जातीय संतुलन को साधने की कोशिश की है। अभी तक यूपी से शामिल मंत्रियों में पांच अगड़े और तीन पिछड़े वर्ग के थे। राजनाथ सिंह क्षत्रिय, कलराज मिश्र ब्राह्मण तो उमा भारती पिछड़ी जाति (लोध) की हैं। मेनका गांधी भी अगड़ी जाति से आती हैं। मनोज सिन्हा भूमिहार व वी.के. सिंह क्षत्रिय हैं तो संतोष गंगवार पिछड़ी जाति (कुर्मी) है और डॉ. बालियान जाट हैं।
अब उनकी टीम में यूपी से सात अगड़े चार पिछड़े, एक मुस्लिम व एक दलित चेहरा भी शामिल हो गया है। अगड़ों में अभी तक दो ब्राह्मण, दो ठाकुर, एक कुर्मी, एक जाट, एक भूमिहार थे। अब चार ब्राह्मण, दो ठाकुर, एक कुर्मी, एक जाट, एक निषाद, एक भूमिहार, एक दलित व एक मुस्लिम सदस्य हो गया है। इस प्रकार उन्होंने उत्तर प्रदेश में भाजपा की समर्थक जातियों को लगभग प्रतिनिधित्व दे दिया है।
पिछड़े समीकरण पर ध्यान: विस्तार में साध्वी निरंजन के रूप में अति पिछड़ी निषाद जाति को प्रतिनिधित्व देकर पिछड़ों पर और फोकस किया गया है। इससे साफ हो गया कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मोदी की नजर पिछड़ी जातियों को भाजपा के साथ लामबंद करने पर भी है।
निरंजन ज्योति के रूप में न सिर्फ पिछड़े समीकरण को और ठीक करने की कोशिश की गई है बल्कि वाराणसी, इलाहाबाद, बुंदेलखंड और कानपुर तक की पट्टी में फैली पिछड़ी जातियों में 10 प्रतिशत भागीदारी वाली जातियों कहार, कश्यप, निषाद, मल्लाह, केवट, धीमर, बाथम व मांझी को भाजपा के साथ जोड़ने की कोशिश की गई है। ध्यान रहे कि मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में यह आबादी बहुत बड़ी संख्या में है।
दलित वोटों का भी खयाल
रामशंकर कठेरिया के रूप में अनुसूचित जाति और मुख्तार अब्बास नकवी के रूप में मुस्लिम चेहरे की कमी पूरी की गई है। यूपी से दलित चेहरे की कमी को कठेरिया के रूप में दुरुस्त करने की कोशिश है। कठेरिया दलित वर्गों पर होने वाले अन्याय व इस वर्ग के धर्मांतरण के विरुद्ध संघर्ष करने वाले नेता के रूप में पहचाने जाते हैं।
चतुराई के साथ साधे ब्राह्मणों व क्षत्रियों के साधे समीकरण: परिकर मराठी ब्राह्मण हैं तो डॉ. महेश शर्मा भी इसी वर्ग से हैं। इन दोनों को शामिल करके मोदी ने सावधानी बरती है कि उत्तर प्रदेश में कहीं से यह संदेश न जाने पाए कि उन्हें अटल के राज्य में ब्राह्मणों की चिंता नहीं है। यह सवाल अपनी जगह है कि परिकर व महेश शर्मा ब्राह्मणों को लामबंद करने में कलराज मिश्र के साथ कितने कामयाब होंगे।
साथ ही उन्होंने क्षत्रिय व ब्राह्मण समीकरण भी दुरुस्त करने की कोशिश की है। अभी तक यूपी से राजनाथ सिंह और पूर्व सेना प्रमुख वी.के. सिंह, दो क्षत्रिय चेहरे थे। पर, ब्राह्मण चेहरे के रूप में अकेले कलराज मिश्र। वी.के. सिंह स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री थे।
गाजियाबाद से सांसद वी.के. सिंह के पड़ोस की नोएडा सीट से सांसद महेश शर्मा को भी स्वतंत्र प्रभार देकर उन्होंने ब्राह्मण व क्षत्रिय संतुलन हर तरह से साधने की कोशिश की है। ऊपर से पर्रिकर के जरिये ब्राह्मणों को लुभाने की भी कोशिश की है तो यह आरोप न लगने देने का हथियार भी अपने पास रखा है कि यूपी से ब्राह्मण कैबिनेट मंत्री बना दिए। मोदी समय व सुविधा के अनुसार परिकर का गोवा या यूपी के प्रतिनिधि के रूप में उपयोग करते रहेंगे।
मुस्लिम विरोधी छवि बदलने की कोशिश
विपक्ष की ओर से मोदी पर मुस्लिम विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं। मुख्तार अब्बास नकवी के रूप में उन्होंने तकनीकी तौर पर इस आरोप का जवाब ढूंढ लिया है। हालांकि उन पर यह आरोप फिर भी लग सकते हैं कि उन्होंने नकवी को स्वतंत्र प्रभार का या कैबिनेट का दर्जा न देकर कंजूसी की है। पर, जहां तक मोदी की राजनीति की अब तक जो दिशा समझ में आई है तो वह भी कहां चाहते हैं कि इस मुद्दे पर उन पर लगने वाले आरोप बंद हो जाएं।
सब ओर ध्यान: मोदी ने विस्तार के बाद अब मंत्रिमंडल में उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से लेकर पश्चिम, बुंदेलखंड और सेंट्रल यूपी सभी का प्रतिनिधित्व हो गया है। पूर्वांचल से खुद मोदी के अलावा देवरिया से कलराज मिश्र व गाजीपुर से मनोज सिन्हा के रूप में पहले से ही प्रतिनिधित्व है। अभी तक राजनाथ सिंह मध्य यूपी से अकेले प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
अब साध्वी निरंजन ज्योति के रूप में मध्य यूपी के साथ कानपुर क्षेत्र व बुंदेलखंड का प्रतिनिधित्व पूरा करने की कोशिश की गई है। निरंजन ज्योति हमीरपुर से विधायक रही हैं तो अब वह कानपुर के नजदीक की फतेहपुर सीट से सांसद हैं।
रामशंकर कठेरिया के रूप में मोदी ने भगवान कृष्ण की नगरी बृज मंडल की मंत्रिमंडल में उपेक्षा का दाग भी धोने का प्रयास किया है तो रामपुर व नोएडा को प्रतिनिधित्व देकर दो स्वतंत्र प्रभार और दो राज्यमंत्री के रूप में पश्चिम की स्थिति के समीकरणों को भी दुरुस्त करने की कोशिश की है।
वाजपेयी सरकार में थे आठ मंत्री
परिकर अगर रक्षा मंत्री होते हैं तो यूपी वह पहला राज्य हो जाएगा। जहां से प्रधानमंत्री भी है। गृह मंत्री और रक्षा मंत्री भी। केंद्रीय मंत्रिमंडल में यूपी के कोटे से चार पूर्व मुख्यमंत्री शामिल। गुजरात के पूर्व मुख्यममंत्री नरेंद्र मोदी तो प्रधानमंत्री ही हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह गृहमंत्री हैं।
मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती जल संसाधन व गंगा सफाई मंत्री हैं। अब मनोहर पार्रिकर को भी शामिल किया गया है। जिन्हें रक्षा मंत्री बनाने की बात हो रही है। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार से ज्यादा यूपी को प्रतिनिधित्व। वाजपेयी की सरकार में आठ मंत्री ही थे।
इनमें डॉ. मुरली मनोहर जोशी और बाद में राजनाथ सिंह कैबिनेट मंत्री रहे। अब प्रधानमंत्री के अलावा पांच कैबिनेट और आठ राज्यमंत्री हैं। राज्यमंत्रियों में तीन स्वतंत्र प्रभार और पांच राज्यमंत्री हैं। चार महिलाएं उत्तर प्रदेश कोटे से। उमा भारती, मेनका गांधी, स्मृति ईरानी, साध्वी निरंजन ज्योति। दो साध्वी उमा भारती व साध्वी निरंजन ज्योति।