जिपं अध्यक्ष चुनाव: विरोधियों के साथ असंतुष्ट भी दे रहे भाजपा को चुनौती, कई जिलों में टिकट न मिलने से नाराज हैं नेता
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा को दो मोर्चों पर चुनाव लड़ना पड़ रहा है। एक तरफ तो असंतुष्ट नेता हैं। दूसरी तरफ जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव न लड़ने की घोषणा कर चुकी सुभासपा और आम आदमी पार्टी (आप) के साथ नाराज बैठे भाजपाइयों पर सपा नजर गड़ाए है।
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भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में कई चुनौतियां भी हैं। विपक्ष की लामबंदी तो है ही, साथ में टिकट न मिलने से नाराज असंतुष्ट भी चुनौती खड़ी करेंगे। उधर, जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव न लड़ने की घोषणा कर चुकी सुभासपा और आम आदमी पार्टी (आप) के साथ नाराज बैठे भाजपाइयों पर सपा नजर गड़ाए है। ऐसे में कई जिलों में भाजपा उम्मीदवारों को दो मोर्चों पर चुनाव लड़ना पड़ रहा है।
दरअसल, इस बार के पंचायत चुनाव में बहुत से जिलों में भाजपा का प्रदर्शन ऐसा नहीं रहा है, जिसके बल पर पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बिठाया जा सके। इस लिहाज से जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। इसी प्रतिष्ठा को बचाने के लिए भाजपा का प्रदेश संगठन जुटा हुआ है। दूसरी ओर धनबल के आधार पर होने वाले इस चुनाव में एकमात्र विपक्ष के रूप में सपा ही खड़ी दिख रही है।
यह चुनाव इस लिहाज से और भी रोचक हो गया है कि लखनऊ समेत कई जिलों में संख्या बल काफी कम होने के बाद भी भाजपा चुनाव जीतने की कोशिश में जुटी है, लेकिन ऐसे जिलों में भाजपा से वही लोग ही उसकी राह रोकने पर अमादा हैं, जो टिकट न मिलने व अन्य कारणों से सरकार और संगठन से नाराज हैं। इसलिए भाजपा को विपक्ष के साथ ही अपने नाराज लोगों की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है।
बलिया-कौशांबी समेत कई जिलों में दोहरी चुनौती
बालिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, आजमगढ़, फतेहपुर, उन्नाव, लखीमपुर, भदोही, कौशांबी, महोबा समेत कई ऐसे जिले हैं जहां पर भाजपा को विपक्ष के साथ ही अपने लोगों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों की माने तो इन जिलों में सुभासपा, आप समेत अन्य छोटे दलों के नाम पर चुनाव लड़कर जीतने वाले सदस्यों की संख्या 4 से 11 तक है।
माना जा रहा है कि पूर्वांचल के आधे दर्जन जिलों में सुभासपा सदस्यों की संख्या किसी भी उम्मीदवार को जिताने में निर्णायक साबित हो सकती है। सुभासपा भाजपा के खिलाफ है। सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने तो एलान भी कर रखा है कि उनकी पार्टी और उनके द्वारा गठित भागीदारी संकल्प मोर्चा से जुड़े दलों के समर्थित सदस्य भाजपा को हराने के लिए सपा का साथ देंगे।
आम आदमी पार्टी ने भी जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव न लड़ने की घोषणा करने के साथ ही भाजपा का विरोध करने का एलान कर रखा है। ऐसे में सपा भी इसी रणनीति पर काम कर रही है कि सुभासपा समेत अन्य विपक्षी दलों के साथ ही नाराज भाजपाइयों को साध कर पासा पलट दिया जाए।