भाजपा ने मंत्रियों व नेताओं के कंधों पर डाली दो-दो सीटों पर जीत की जिम्मेदारी, इस तरह बना पूरा प्लान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मिशन 2019 की फतह की तैयारी में जुटी भाजपा ने लोकसभा चुनाव की जंग जीतने के लिए प्रदेश के मंत्रियों और प्रमुख नेताओं के कंधों पर भी जिम्मेदारी डालने का फैसला किया है। चुनावी बिगुल बजने से पहले शनिवार शाम पार्टी मुख्यालय पर भाजपा के प्रदेश चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने प्रदेश सरकार के मंत्रियों तथा प्रमुख नेताओं के साथ बैठक की।
अब तक की तैयारियों पर चर्चा करते हुए लोकसभा चुनाव की जंग जीतने के लिए सभी से पूरी ताकत से जुटने का आह्वान किया गया। मंत्रियों और प्रमुख नेताओं को दो-दो सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों के फतह की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया गया। चुनावी तैयारियों के लिए पार्टी से जुड़े मंत्रियों से एक महीने का वेतन और भत्ता संगठन के कार्य के लिए ‘समर्पण निधि’ के रूप में देने का आग्रह किया गया। सभी ने इस पर सहमति जताई।
माना जा रहा है कि पार्टी ने मंत्रियों और बड़े नेताओं को लोकसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपकर एक तरह से स्थानीय स्तर पर खींचतान और मतभेदों पर लगाम लगाने की कोशिश की है। साथ ही विधायक और सांसदों के बीच कई स्थानों पर सतह पर झलक रही खींचतान के खतरे को भी कम करने की रणनीति बनाई है। दरअसल, पिछले दिनों कुछ स्थानों पर सांसदों व विधायकों के बीच और विधायकों तथा कार्यकर्ताओं के बीच जिस तरह खींचतान दिखी उससे पार्टी नेतृत्व चिंतित है। इसीलिए उसने बड़े चेहरों को लोकसभा की सीटों पर लगाकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि खींचतान चुनावी नुकसान तक न पहुंचने पाए।
अनावश्यक बयानबाजी पर रोक लगाने का भी फैसला
भाजपा की कोर कमेटी की भी शनिवार रात लखनऊ में बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि प्रभारी बनाए गए मंत्रियों को जिम्मेदारी वाली सीटों पर ही रोका जाए। ये अभी से स्थानीय स्तर पर चुनावी कील-कांटे दुरुस्त करने का काम संभाल लें। सभी सीटों पर समन्वय समितियों के गठन और बूथ प्रबंधन की एक बार फिर समीक्षा की बात भी तय हुई।
अनावश्यक बयानबाजी पर कड़ाई से रोक लगाने का भी फैसला किया गया। बैठक में जेपी नड्डा, डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा और सुनील बंसल शामिल थे।
मान-मनौवल से लेकर ज्वाइनिंग तक की जिम्मेदारी
जिन मंत्रियों और नेताओं को जिन लोकसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन स्थानों पर सारा चुनावी प्रबंधन यही संभालेंगे। संबंधित लोकसभा सीट पर किसे भाजपा में शामिल करना है या किसे नहीं शामिल करना है, यह फैसला भी करेंगे। नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने और उन्हें चुनावी काम में जुटाने की जिम्मेदारी भी यही प्रभारी संभालेंगे। राजनीतिक समीकरण, सामाजिक गणित दुरुस्त करने के साथ ही चुनावी प्रबंधन और समन्वय का काम भी इन्हें ही सौंपा गया है।
कैबिनेट मंत्री आशुतोष टंडन को सौंपी गई मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री आशुतोष टंडन को सौंपी गई है। उन्हें मोहनलालगंज का भी जिम्मा दिया गया है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र लखनऊ की जिम्मेदारी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमापति राम त्रिपाठी को सौंपी गई है। वे बाराबंकी का दायित्व भी संभालेंगे।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी और सरकार में मंत्री गुलाब देवी को मुरादाबाद, रामपुर और संभल की जिम्मेदारी दी गई है। मुकुट बिहारी वर्मा को धौरहरा, डॉ. रीता बहुगुणा जोशी को सीतापुर, अनुपमा जायसवाल को गोंडा व कैसरगंज की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन नेताओं को सौंपी गई इन सीटों की जिम्मेदारी
सतीश महाना को कन्नौज और फर्रुखाबाद, सूर्यप्रताप शाही को गोरखपुर व बांसगांव, श्रीकांत शर्मा को आगरा व फतेहपुर सीकरी, सत्यदेव पचौरी को जालौन व झांसी, चेतन चौहान को गाजियाबाद व नगीना, दारा सिंह चौहान को आजमगढ़ व लालगंज, डॉ. एसपी सिंह बघेल को मथुरा व एटा, सिद्धार्थनाथ सिंह को जौनपुर व भदोही, स्वामी प्रसाद मौर्य को कुशीनगर व महराजगंज, जयप्रताप सिंह को बस्ती, भूपेन्द्र चौधरी को कैराना व अमरोहा, सुरेश राणा को सहारनपुर व बिजनौर, धर्म सिंह सैनी को मेरठ व बागपत, बल्देव सिंह औलख को मुजफ्फरनगर, अतुल गर्ग को बुलंदशहर व नोएडा, उपेंद्र तिवारी को घोसी व सलेमपुर, स्वाति सिंह को उन्नाव तथा जयप्रकाश निषाद को सिद्धार्थनगर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।