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पुराने रिश्तों को हवा-पानी देने की कोशिश में बहराइच रैली
अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ
Updated Wed, 06 Nov 2013 12:02 PM IST
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भाजपा 8 नवंबर को बहराइच में नरेन्द्र मोदी की रैली के जरिये अवध क्षेत्र में अपनी पुरानी जड़ें तलाशकर उनसे जुड़ने की कोशिश करेगी।
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ताकि इस इलाके में लंबे समय तक कमल खिलाने वाले समीकरणों को दुरुस्त किया जा सके और साथ छोड़ गए लोगों को फिर भाजपा से जोड़ा जा सके।
भाजपा इस इलाके में अपने मकसद में कितना कामयाब होगी, यह तो भविष्य ही बताएगा लेकिन भाजपाई मोदी की रैली को लेकर बहुत उत्साहित हैं।
इन्हें भरोसा है कि साथ छोड़ गए लोगों को मोदी के माध्यम से भाजपा के नजदीक लाया जा सकेगा।
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भाजपाइयों की उम्मीद यूं ही नहीं है। इस इलाके के लोगों के स्वभाव व प्रकृति को बताने वाली कुछ घटनाओं पर नजर डालें तो इसका अंदाज मिल जाता है।
राष्ट्रवाद के प्रति इस इलाके के लोगों की निष्ठा की कई घटनाएं इतिहास में दर्ज हैं तो विदेशी आक्रांताओं से संघर्ष की कहानियां भी कम नहीं है।
अवध के संग्राम और ऐतिहासिक घटनाओं तथा राजा बलभद्र सिंह चहलारी पर शोध करने वाले बाराबंकी के शिक्षक अजय सिंह ‘गुरु जी’ बताते हैं कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ने वाली बेगम हजरत महल को जब कहीं संरक्षण नहीं मिला तो इस इलाके के बौड़ी स्टेट के राजा स्व. हरदत्त सिंह ने शरण दी।
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बेगम के आह्वान पर अवध की सेना के प्रधान सेनापति की भूमिका स्वीकार कर मोर्चा लेने वाले चहलारी नरेश स्व. बलभद्र्र सिंह की चहलारी स्टेट भी इसी इलाके में है।
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बलभद्र सिंह राजा हरदत्त सिंह के भतीजे थे। वह 13 जून 1858 को बाराबंकी में अवध की सेना का नेतृत्व करते हुए अंग्रेजों से हुए संघर्ष में शहीद हो गए।
भाजपा को उम्मीद है कि राष्ट्रवादी स्वभाव व चरित्र वाले इस इलाके में मोदी का भाषण और राष्ट्रवाद का नारा खूब कारगर रहेगा।
भगवा खेमे से पुराना जुड़ाव
यह इलाका काफी पहले से भगवा खेमे के अनुकूल रहा है। जब जनसंघ के लिए दूसरी जगह उम्मीदवार तलाशना मुश्किल होता था तब भी इस इलाके में जनसंघ कई सीटों पर जीत दर्ज करता था।
यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछड़ों की अच्छी आबादी होने के बावजूद जनसंघ का दीपक इस इलाके में अपनी रोशनी बिखेरता रहा है।
वैसे अतीत पर नजर डालें तो इसकी कई वजहें हैं। अजय सिंह ‘गुरु जी’ बताते हैं कि सिर्फ एक घटना से ही इस इलाके के तेवरों का पता चल जाता है।
महमूद गजनवी के भतीजे सैयद सालार मसूद को युद्ध में हराने वाले राजा सुहेल देव इसी इलाके के थे। उन्होंने जिस बहादुरी से सैयद सालार को परास्त किया।
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उसका अंदाज सिर्फ इसी से लगाया जा सकता है कि सैयद सालार मसूद की युद्ध में मृत्यु के बाद किसी विदेशी आक्रांता की 150 वर्षों तक अवध की तरफ रुख करने की हिम्मत नहीं हुई।
संघ के प्रभाव वाला भी है क्षेत्र
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भी इस इलाके में काफी पहले से प्रभाव रहा है। नानाजी देशमुख ने जयप्रभा ग्राम की स्थापना करके गांवों की तरक्की गांवों से कल्पना को साकार रूप देने की शुरुआत की थी।
नानाजी यहीं से सांसद रहे। अवध क्षेत्र का लखीमपुर क्षेत्र स्व. पंडित दीनदयाल उपाध्याय की लंबे समय तक कर्मस्थली रहा।
न सिर्फ देवीपाटन मंडल बल्कि सीतापुर, लखनऊ और उन्नाव का इलाका भी संघ व भगवा खेमे के लिए अनुकूल रहा है।
मौजूदा स्थिति
अवध क्षेत्र में सरकार के लिहाज से 13 और भाजपा के संगठन के लिहाज से 14 जिले हैं। इनमें लोकसभा की 16 और विधानसभा की 82 सीटें आती हैं।
लोकसभा की 16 सीटों में पांच सुरक्षित हैं। अतीत में भले ही यहां भगवा उम्मीदों का कमल खिलता रहा हो लेकिन अब भाजपा के कब्जे में सिर्फ एक लखनऊ सीट लालजी टंडन के रूप में है।
शेष पर दूसरे दल काबिज हैं। हालांकि, इनमें अंबेडकरनगर सीट को छोड़ दें तो शेष सभी 15 सीटों पर जनसंघ या भाजपा के रूप में भगवा खेमे को कई बार सफलता मिल चुकी है।
मोदी जिस तरह बढ़त लेते दिख रहे हैं, उसके चलते भाजपा के रणनीतिकारों को उम्मीद है कि बहराइच रैली के जरिये इस इलाके में पुराने जड़ों को तलाश कर उन्हें खाद-पानी देकर कमल को खिलाया जा सकेगा।
यह है रैली की तैयारी
भाजपा चुनाव प्रबंध प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डा. रमापति राम त्रिपाठी कहते हैं कि मोदी की रैली के लिए पूरे क्षेत्र में काफी उत्साह है।
वह बताते हैं कि इस रैली को इलाके की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा गौरवशाली प्रतिभाओं से जोड़ने की बात को ध्यान में रखते हुए मंच से लेकर मैदान की तैयारियां की जा रही हैं।
रैली सफल होगी और इस इलाके में भाजपा की विचारधारा का कमल मजबूती से खिलेगा। मंच के ऊपर भी खिलते हुए कमल का आकार साकार किया जाएगा।
कमल कितना खिलेगा यह तो चुनाव बाद पता चलेगा। पर, जिस तरह बृजभूषण सिंह सहित कुछ नेताओं के भाजपा में शामिल होने की चर्चा है, उससे डा. त्रिपाठी की यह बात सही लगती है कि मोदी व भाजपा को लेकर लोगों में बहुत उत्साह है।
इलाके से जुड़ाव की कोशिश
मंच की तैयारियों से जुड़े राजीव मिश्र बताते हैं कि बहराइच व श्रावस्ती इलाके को हिमालय की तलहटी माना जाता है।
इसलिए मंच पर पीछे हिमालय व जंगलों का लुक दिया जाएगा। बीच में महात्मा बुद्ध का चित्र होगा।
ऐतिहासिक महत्व वाले बालार्क मंदिर के सेवक और राजा सुहेल देव के गुरु महर्षि बालार्क, क्रांतिकारी स्व. राजा बलभद्र सिंह चहलारी और राजा सुहेल देव की तस्वीर भी मंच पर दिखेगी।
समझा जा सकता है कि भाजपा इस इलाके के लोगों को जोड़ने के लिए हर तरह के समीकरणों को ध्यान में रखकर काम कर रही है।
पिछड़ों की अच्छी आबादी देखते हुए पार्टी ने कैसरगंज से विधायक मुकट बिहारी वर्मा को रैली का संयोजक घोषित किया है।
वह बताते हैं कि रैली में अंबेडकरनगर, फैजाबाद, बाराबंकी के अलावा देवीपाटन मंडल के चारों जिलों बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती व बलरामुपर के लोगों को ही बुलाया गया है लेकिन लखीमपुर, सीतापुर, लखनऊ और उन्नाव से भी लोगों के आने की सूचना है।