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'मोदी मैजिक' के साथ ही बिखर गए भाजपाई

Sun, 21 Sep 2014 12:05 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 21 Sep 2014 12:05 PM IST
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BJP MLAs alleged leaders for defeta in bypoll.

भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में पार्टी विधायकों ने उपचुनाव के नतीजों पर अपना दर्द भी सार्वजनिक किया। कहा कि पिछले कुछ समय से संगठन के फैसलों में विधायकों की राय ही नहीं ली जाती।

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ऐसा लगता है कि विधायक पार्टी का हिस्सा हैं ही नहीं। उपचुनाव में पार्टी की फजीहत के लिए विधायकों की उपेक्षा भी एक बड़ा कारण है।

विधायकों ने यह गुहार भी लगाई कि केंद्र सरकार के उन फैसलों में जो प्रदेश में लागू होने हों, उनमें पार्टी विधायकों की राय भी शामिल कर ली जाए तो ठीक रहेगा।
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इससे उत्तर प्रदेश में वह फैसले या योजनाएं ज्यादा उपयोगी तरीके से लागू की जा सकेंगी।

अध्यक्ष ने भी नहीं सुनी बात

BJP MLAs alleged leaders for defeta in bypoll.

पार्टी विधानमंडल दल के नेता सुरेश खन्ना की तरफ से बुलाई गई इस बैठक में विधायकों की पीड़ा उस समय मुखर हुई जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी बैठक से जाने लगे।

जानकारी के मुताबिक पार्टी के पूर्वांचल के एक विधायक ने उनसे बात सुनने का आग्रह किया। पर, वाजपेयी ने कहा कि जिसे जो कहना हो वह लिखकर दे दें।

विधायक ने कहा कि उन्हें कोई निजी बात नहीं करनी है। उनका कोई काम भी नहीं है। वह पार्टी की बात करना चाहते हैं।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें बहराइच में आयोजित पार्टी के प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने जाना है। इसके बाद वह और पार्टी के महामंत्री संगठन सुनील बंसल दोनों लोग चले।

विधायकों ने बताई पार्टी नेतृत्व की खामियां

BJP MLAs alleged leaders for defeta in bypoll.

विधायक ने कहा कि वह अध्यक्ष को बताना चाहते थे कि उपचुनाव में हार का बड़ा कारण संवादहीनता भी है। उपचुनाव में कुछ को छोड़ ज्यादातर विधायकों से कोई सहयोग ही नहीं लिया गया। न उनसे कोई बातचीत की गई। जिन्हें लगाया भी गया तो प्रत्याशी या संगठन की तरफ से लगे लोगों ने विधायकों से समन्वय बनाने की जरूरत ही नहीं समझी।

इस विधायक की पीड़ा में कुछ और विधायकों ने भी हां में हां मिलाई। कहा कि नेतृत्व को फैसला करने का अधिकार है लेकिन एक बार विधायकों से बातचीत कर लेने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।

उपचुनाव के प्रत्याशी तय करने में अगर संबंधित क्षेत्र के विधायकों से भी बातचीत कर ली जाती तो उन्हें भी संतोष हो जाता कि उनकी सुनी गई। इससे विधायकों को चुनाव में जुटने का भी हौसला बढ़ता।

विधायकों ने यह शिकायत भी की कि जिन विधायकों के सांसद चुने जाने के बाद ये चुनाव हो रहा था, उन तत्कालीन विधायकों व मौजूदा सांसदों से भी प्रत्याशी चयन के बारे में कोई सलाह करने की जरूरत नेतृत्व ने नहीं समझी।

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