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यूपी सियासत: भाजपा के सहयोगियों की पौ बारह, 2027 के समर में सीट बंटवारे पर बड़ा दिल दिखाएगी पार्टी

Sun, 20 Sep 2026 09:48 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ/नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ/नई दिल्ली Published by: Bhupendra Singh Updated Sun, 20 Sep 2026 09:48 AM IST
सार

यूपी में भाजपा के सहयोगियों की पौ बारह होते दिख रही है। 2027 के समर में सीट बंटवारे पर पार्टी बड़ा दिल दिखाएगी। चार सहयोगियों को 70 से 75 सीटें देने की तैयारी है। इन चार में से तीन सहयोगियों के जनाधार का केंद्र पूर्वांचल है। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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BJP might allocate good number of seats to its allies in Purvanchal region For 2027 elections in UP
यूपी सियासत: 2027 में सीट बंटवारे पर बड़ा दिल दिखाएगी भाजपा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक के लिए भाजपा सीट बंटवारे के मामले में पहले से अधिक उदार रवैया अपनाएगी। खासकर उस पूर्वांचल में जहां बीते लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने पार्टी के लिए खतरे की घंटी बजाई थी। इस क्षेत्र में जातीय समीकरण को एक बार फिर से अपने पक्ष में मोड़ने के लिए पार्टी काफी हद तक इसी क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले तीन दलों अपना दल (एस), निषाद पार्टी और सुभासपा के करिश्मे पर निर्भर है।

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पूर्वांचल में ही अपना मुख्य आधार रखने वाली इन तीनों पार्टियों को भाजपा 50 से 55 सीटें दे सकती है। पार्टी की योजना पश्चिम यूपी में अपनी इकलौती सहयोगी रालोद को अधिकतम 20 सीटों पर मनाने की है। हालांकि बीते चुनाव में सपा के साथ 33 सीटों पर मैदान में उतरी रालोद सीट बंटवारे में बड़ा मोलभाव करने की तैयारी में है। सहयोगियों की संख्या बढ़ने के कारण इस बार भाजपा 330 से 335 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। सीट बंटवारे पर नवरात्र के बाद बातचीत शुरू होगी।

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पूरब को लेकर चिंता

चुनाव में पार्टी की मुख्य चिंता पूर्वी उत्तर प्रदेश को लेकर है। इस क्षेत्र में 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 2022 में कमजोर प्रदर्शन के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने भाजपा को बहुत पीछे धकेल दिया था। सपा गठबंधन ने क्षेत्र की 27 में से 15 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 

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अब पार्टी की योजना अपने तीन सहयोगियों के जरिये गैरयादव ओबीसी में अपनी पुरानी पकड़ कायम करने की है। इन तीनों ही दलों की अलग-अलग कुर्मी, निषाद और राजभर समुदाय में पकड़ है। इनमें करीब 100 सीटों पर अपने वोट बैंक के जरिए परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता है।

कड़े मोलभाव की तैयारी में सहयोगी

बीते विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार भाजपा के सहयोगियों की संख्या 2 से बढ़ कर 4 हो गई है। सभी सहयोगी सीट बंटवारे पर कड़ा मोलभाव करने की तैयारी कर रहे हैं। पिछले चुनाव में सपा की अगुवाई वाले गठबंधन का हिस्सा रहे रालोद और सुभासपा अपनी पुरानी संख्या क्रमशः 33 और 18 सीटों पर दावेदारी कर रहे हैं।



बीते चुनाव में 16 सीटों पर लड़ने वाली निषाद पार्टी 25 सीटें मांग रही है, जबकि 17 सीटों पर लड़ने वाली अपना दल (एस) भी पहले के मुकाबले अधिक सीटों की मांग करेगी।

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