मतदाता जागा तो खुद सो गए भाजपा के दिग्गज
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इसे लोकसभा चुनाव में जीत के लिए अतिआत्मविश्वास कहें या फिर टीम भावना की कमी। चुनावी माहौल में इन भाजपा नेताओं का कहना है कि वह आराम कर रहे हैं।
लोकसभा चुनाव के कुरुक्षेत्र उत्तर प्रदेश में पहले चरण के लिए आज मतदान हो रहा है। पर, भाजपा के कई नेता पूरे चुनावी परिदृश्य से गायब हैं।
न तो इनके दौरे हो रहे हैं और न इनके भाषण सुनाई दे रहे हैं। यह कहां हैं, शायद न तो इसकी आज किसी को चिंता है और न इन्हें ही इस बात की फिक्र कि पार्टी के नाते उन्हें चुनाव मैदान में दिखना चाहिए।
पहले चरण पर नजर दौड़ाएं तो सिर्फ तीन नेता ही प्रचार का भार अपने कंधों पर लादे दिखते हैं। इनमें नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह और कल्याण सिंह शामिल हैं।
पार्टी में नहीं है एकजुटता
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह दावा करते हैं कि उनकी पार्टी सामूहिक नेतृत्व वाली है। पर, उत्तर प्रदेश में इस बार सामूहिक नेतृत्व का दूर-दूर तक पता नहीं है।
न तो टिकट वितरण में यह सामूहिक नेतृत्व दिखा और न अब चुनावी प्रबंधन व प्रचार में यह धरातल पर दिख रहा है।
सूबे में भाजपा के आठ नेता अब तक प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, लेकिन कलराज मिश्र व डॉ. रमापति राम त्रिपाठी को छोड़ कहीं कोई चुनावी समर में किसी भूमिका में नहीं दिख रहा है।
कलराज मिश्र खुद देवरिया से चुनाव लड़ रहे हैं तो डॉ. रमापति राम त्रिपाठी के पुत्र शरद त्रिपाठी चुनाव मैदान में होने के कारण व्यस्त हैं।
नेता बदले या बदला माहौल
बदलाव माहौल में आया हो अथवा नेतृत्व में या मंच पर गरजने से इन नेताओं में खुद आया हो लेकिन कई चेहरे मंचों से गायब हैं। विधानसभा के पिछले चुनाव तक उमा भारती के भाषण की तमाम सीटों से डिमांड रहती थी।
पर, राम जन्मभूमि आंदोलन का यह प्रमुख भगवा चेहरा लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सिर्फ अपने चुनाव क्षेत्र झांसी तक सिमटकर रह गया है।
अभी तक इनकी एक भी सभा नहीं हुई है। विनय कटियार भले ही दो बार से खुद चुनाव न जीत पा रहे हों लेकिन तमाम लोगों को उनके चेहरे व भाषण से अपनी नैया पार लगने की उम्मीद रहती थी। अभी तक कटियार भी घर बैठे हैं।
अपने ही क्षेत्रों तक सीमित हैं नेता
कहते हैं कि यह शांतिकाल है। संगठन के कार्यकर्ता हैं। वह जो आदेश करेगा, वैसा करेंगे। वरुण गांधी भले ही राम जन्मभूमि आंदोलन से सीधे न जुड़े रहे हों लेकिन उनका भाषण भी भगवा धार लिए रहता था।
इस कारण कई जगह से उनके भाषणों की भी लोगों को जरूरत रहती थी। पर, वह इन दिनों अपने निर्वाचन क्षेत्र सुल्तानपुर में सिमटे हुए हैं।
योगी आदित्यनाथ भी अभी तक गोरखपुर इलाके से बाहर नहीं निकले हैं। कोई विश्राम तो कोई शांत पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे नेताओं में कुछ भीड़ जुटाऊ तो कुछ समीकरण साधने वाले चेहरे माने जाते रहे हैं।
उसी लिहाज से इनका अब तक उपयोग होता था। यह भले ही मंच पर मोर्चा न संभालते हों लेकिन नाराज लोगों को समझाने-बुझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
प्रचार के बजाए आराम कर रहे हैं ये
ये नेता कहीं जातीय समीकरणों के लिहाज से जरूरत को देखते हुए भी पार्टी के लिए उपयोगी भूमिका निभाते थे। पर, इस बार इनकी भी सक्रियता नहीं दिख रही है।
पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह घर बैठे हैं। चुनाव में भूमिका और कहां हैं? कहते हैं, घर पर विश्राम कर रहा हूं। पढ़-लिख रहा हूं। कभी-कभी विश्राम भी जरूरी होता है।’
सूर्यप्रताप शाही की नाराजगी तो अब ढकी-छिपी बात नहीं रह गई है। चुनाव में वह अपने इलाके में नहीं बल्कि लखनऊ में हैं।
केशरी नाथ त्रिपाठी भी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। वह भी चुनावी परिदृश्य से पूरी तरह गायब हैं। इलाहाबाद मेंअपने घर पर बैठे हैं।