'शिवसेना के मुसलमान विरोधी बयान के पीछे भाजपा'
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मौका अंबेडकर जयंती का था, लेकिन बसपा सुप्रीमो की नजर 2017 के विधानसभा चुनाव पर है। मायावती ने मंगलवार को डॉ. अंबेडकर के बहाने विपक्षियों को जमकर कोसा। सपा से लेकर कांग्रेस और भाजपा-आरएसएस व शिवसेना पर तीखे तीर चलाए।
मुसलमानों से वोट का हक छीनने वाले बयान पर प्रधानमंत्री से शिवसेना को सरकार से बाहर करने की चुनौती दी तो मुस्लिम समाज को भाजपा व शिवसेना को तगड़ा जवाब देने के लिए ललकारा भी।
कहा, शिवसेना भाजपा के इशारे के बिना ऐसा बयान नहीं दे सकती। उन्होंने दलितों को समझाया कि भाजपा विधानसभा चुनाव के पहले कांशीराम को भारत रत्न दे सकती है, लेकिन इससे गुमराह मत होना।
मायावती डॉ. अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर श्रद्धांजलि समारोह में बोल रही थीं। उन्होंने डॉ. अंबेडकर की 125 वीं जयंती पर कांग्रेस के साल भर चलने वाले अभियान और भाजपा के कार्यक्रमों पर सवाल उठाए।
मोदी सरकार का ग्राफ तेजी से गिरा
मायावती ने कहा,दस महीने में मोदी सरकार का ग्राफ तेजी से गिरा है। अगले साल से चुनावी माहौल हो जाएगा। ऐसे में हो सकता है केंद्र सरकार अपनी खराब हालत देखकर कांशीराम को भारत रत्न देने व दिल्ली में अली रोड स्थित बंगले को अंबेडकर स्मारक में बदलने की घोषणा कर दे।
पर, इससे गुमराह नहीं होना है। वजह, ये कभी दलितों के हितैषी नहीं हो सकते। ये आरक्षण विरोधी हैं। जबसे मोदी सरकार आई है हिंदूवादी संगठनों का मुस्लिमों व इसाइयों पर हमला बढ़ा है। अब शिवसेना कह रही है कि मुसलमानों से वोट का अधिकार ले लेना चाहिए।
यह भारतीय संविधान की आत्मा के खिलाफ है। उन्होंने प्रधानमंत्री से शिवसेना को सरकार से बाहर करने की मांग की। आशंका जताई कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो यह पार्टी दलितों व पिछड़े वर्गों के लिए भी ऐसी ही असंवैधानिक भाषा का इस्तेमाल कर सकती है।
उन्होंने मुसलमानों को समझाया कि जो गलती उन्होंने लोकसभा चुनाव में की, उसे विधानसभा चुनाव में न दुहराएं। भाजपा को जवाब देने के लिए एकजुट होकर बसपा को वोट दें क्योंकि बसपा ही भाजपा को रोक सकती है।