जानें, ये हैं यूपी विधान परिषद चुनाव के लिए भाजपा के 10 प्रत्याशी, एक सीट अपना दल को
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भाजपा के केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने रविवार को राज्य विधान परिषद के लिए अपने दस उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इनमें सरोजनी अग्रवाल के रूप में एक महिला को प्रतिनिधित्व मिला है। एक सीट पर अपना दल (एस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के पति आशीष सिंह पटेल लड़ेंगे। पार्टी ने कार्यकर्ताओं को तवज्जो देते हुए तीन प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक, अशोक कटारिया और विद्यासागर सोनकर को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा मौजूदा ग्राम्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेन्द्र सिंह और मुस्लिम वक्फ राज्यमंत्री मोहसिन रजा और पार्टी के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष व पूर्व एमएलसी वाराणसी के अशोक धवन को भी उम्मीदवार बनाकर निष्ठा को सम्मान देने का संदेश दिया है।
विजय बहादुर पाठक: आजमगढ़ निवासी विजय बहादुर पाठक की पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीतिक रही है। उनके पिता राधेश्याम पाठक ने 1974 में भारतीय जनसंघ से विधायक का चुनाव लड़ा था। विजय बहादुर ने 1986 में आजमगढ़ में भारतीय युवा मोर्चा अध्यक्ष पद के साथ राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वह 1987 में दुर्गाजी पीजी कॉलेज आजमगढ़ में छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीते। 1988 में भाजयुमो के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य और 1990 में प्रदेश मंत्री रहे। 1994 से भाजपा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य रहे। 2002 में उन्होंने निजामाबाद से विधानसभा चुनाव लड़ा। 2005 और 2010 से जुलाई 2016 तक पार्टी के प्रवक्ता रहे। 11 जुलाई 2016 को भाजपा के प्रदेश महामंत्री नियुक्त हुए। 9 फरवरी 2018 को पुन: प्रदेश महामंत्री बनाए गए। दूसरे राजनीतिक दलों के लोगों से भी उनके मधुर संबंध हैं।
अशोक कटारिया: बिजनौर में जन्मे अशोक कटारिया ने 1990 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जरिए छात्र राजनीति में कदम रखा। 1996 में मेरठ और 2001 तक बरेली में अभाविप के विभाग संगठन मंत्री रहे। 2001 में उन्हें भाजयुमो का प्रदेश महामंत्री और 2003 में प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वे करीब 6 वर्ष तक भाजपा के प्रदेश मंत्री रहे। 11 जुलाई 2016 को उन्हें भाजपा का प्रदेश महामंत्री बनाया गया। 9 फरवरी 2018 को वे लगातार दूसरी बार प्रदेश महामंत्री बने। भाजपा में कटारिया की पहचान पश्चिमी यूपी के तेज-तर्रार युवा नेता रूप में है। विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण से लेकर सरकार के गठन और संगठन की गोपनीय गतिविधियों में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। नगरीय निकाय चुनाव में वे लखनऊ के प्रभारी बनाए गए। कैराना के सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद कटारिया को भाजपा में गुर्जर समाज का चेहरा माना जा रहा है।
जानें, इन तीन प्रत्याशियों के बारे में
सरोजनी अग्रवाल: मेरठ निवासी डॉ. सरोजनी अग्रवाल पेशे से महिला रोग विशेषज्ञ हैं। वे कई तकनीकी शिक्षण संस्थानों की अध्यक्ष भी हैं। 1995 में राजनीति में आईं डॉ. सरोजनी समाजवादी पार्टी से मेरठ जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। वे लगातार सपा की राष्ट्रीय सचिव और 2005 में अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य नियुक्त हुईं। 2009 में पहली बार सपा से विधान परिषद सदस्य चुनी गईं। 2015 में दोबारा सपा ने उन्हें परिषद भेजा। वह कई सामाजिक संगठनों से जुड़ी हैं। उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्होंने 4 अगस्त 2017 को सपा और एमएलसी पद से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। इनके इस्तीफे से खाली हुई सीट पर परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह एमएलसी निर्वाचित हुए थे।
विद्यासागर सोनकर: पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर गाजीपुर के निवासी हैं। बूथ अध्यक्ष से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले सोनकर 1995 से लगातार भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रहे। वे गाजीपुर के पार्षद और सांसद भी रहे हैं। सोनकर ने 2009 में मछलीशहर से लोकसभा का चुनाव लड़ा और 2017 में सैदपुर गाजीपुर से विधानसभा चुनाव लड़ा। सोनकर 11 जुलाई 2016 को प्रदेश महामंत्री नियुक्त हुए। फरवरी 2018 में उन्हें दोबारा प्रदेश महामंत्री नियुक्त किया गया। गत महीने हुए राज्यसभा चुनाव में सोनकर ने भाजपा के डमी उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया था।
डॉ. महेंद्र सिंह: ग्राम्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेंद्र सिंह प्रतापगढ़ के निवासी हैं, पर उनकी ज्यादातर शिक्षा-दीक्षा लखनऊ में हुई। यहीं से उन्होंने राजनीतिक सफर शुरू किया। वे लखनऊ नगर निगम के पार्षद भी रहे। प्रोफेसर रहे महेंद्र की अच्छे लेखक और वक्ता के तौर पर भी पहचान है। वे 2012 में विधान परिषद के सदस्य चुने गए। भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री नियुक्त होने के बाद उन्हें असम का चुनाव प्रभारी बनाया गया। 2016 में असम विधानसभा में भाजपा को मिली जीत का श्रेय भी डॉ. महेंद्र सिंह के चुनाव प्रबंधन को दिया जाता है। उनके मंत्रित्व काल में उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में देश में अव्वल रहा है।
वक्फ राज्यमंत्री मोहसिन रजा के साथ ये बनेंगे विधान परिषद सदस्य
मोहसिन रजा: वक्फ राज्यमंत्री मोहसिन रजा उन्नाव के निवासी हैं। रणजी खिलाड़ी रहे मोहसिन रजा मॉडलिंग और एक्टिंग में भी रुचि रखते हैं। उन्होंने 2014 में भाजपा की सदस्यता ली। वे पार्टी की तरफ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर पक्ष भी रखते रहे। मार्च 2017 में रजा को राज्यमंत्री बनाया गया। सितंबर में उन्हें पहली बार विधान परिषद भेजा गया। अब लगातार दूसरी बार उन्हें विधान परिषद भेजा जा रहा है।
यशवंत सिंह: मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज गोरखपुर से ग्रेजुएट यशवंत सिंह छात्र नेता भी रहे। शुरुआत से ही चंद्रशेखर से विचारों से प्रभावित रहे मऊ जिले के निवासी यशवंत सिंह लोकतंत्र सेनानी हैं। 1976 में उन्हें आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 1989 और 1996 में वह मुबारकपुर (आजमगढ़) से विधायक चुने गए। वह कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह सरकार में मंत्री रहे। 2004, 2010 और 2016 में वह सपा से विधान परिषद सदस्य चुने गए। 29 जुलाई 2017 को उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्वाचन के लिए अपनी विधान परिषद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। यशवंत बसपा, जनतांत्रिक बसपा और सपा में रह चुके हैं।
ठाकुर जयवीर सिंह: अलीगढ़ के रहने वाले ठाकुर जयवीर सिंह बसपा से दो बार विधायक रहे। मायावती सरकार में मंत्री भी रहे। इनकी पत्नी राजकुमारी चौहान बसपा से सांसद रहीं। इनके पुत्र अरविंद सिंह बसपा के टिकट पर 2014 का लोकसभा चुनाव लड़े थे। जयवीर शुरुआती दिनों में भाजपा की जिला इकाई में भी रहे। जयवीर ने भी पिछले वर्ष यशंवत के साथ ही विधान परिषद से त्याग पत्र दिया था। इनकी सीट से मोहसिन रजा एमएलसी बने थे।
बुक्कल नवाब को मुलायम ने भेजा था विधान परिषद
बुक्कल नवाब: लखनऊ के रहने वाले बुक्कल नवाब ने नगर निगम की पार्षदी से राजनीति शुरू की। वह लखनऊ पश्चिम सीट से विधानसभा चुनाव भी लड़े लेकिन जीत नहीं सके। शिया समुदाय के बुक्कल को 2012 में सपा के तत्कालीन मुखिया मुलायम सिंह यादव ने विधान परिषद भेजा। 2016 में वह फिर सपा से विधान परिषद पहुंचे। उन पर इस समय भूमि घोटाले और गलत तरीके से मुआवजा लेने के मामले चल रहे हैं। बुक्कल ने भी पिछले वर्ष विधान परिषद से त्याग पत्र दिया था। इनकी सीट से उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य को विधान परिषद भेजा गया।
अशोक धवन: बनारस के व्यापारी नेता अशोक धवन पहले भी विधान परिषद सदस्य रहे हैं। भाजपा के बनारस अध्यक्ष के साथ प्रदेश कोषाध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य सहित विभिन्न पदों पर रहे अशोक गृहमंत्री राजनाथ सिंह के करीबी है। भाजपा के परम्परागत वोट बैंक खत्री पंजाबी समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए खत्री को विधान परिषद भेजा जाएगा।
आशीष सिंह पटेल: चित्रकूट जिले के निवासी आशीष सिंह पटेल अपना दल (सोनेलाल) के अध्यक्ष हैं। 38 वर्षीय केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल के पति हैं। वह सिविल इंजीनियरिंग हैं और मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (एमईएस) और उत्तर प्रदेश जल निगम में तैनात रह चुके हैं। 2009 में अनुप्रिया के साथ शादी होने के बाद से ही उन्होंने पर्दे के पीछे से अपना दल की मदद शुरू कर दी थी। वह पूर्णकालिक तौर पर 2017 में राजनीति में आए और अपना दल (सोनेलाल) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए।