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भाजपा चिंतन, मनन, भोजन और विश्राम में व्यस्त, जनता त्रस्त : अखिलेश
Fri, 04 Jun 2021 05:17 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 04 Jun 2021 05:17 PM IST
सार
अखिलेश ने कहा कि सरकार झूठे आंकड़ों के सहारे जनता को बरगलाना चाहती है। कोरोना संक्रमित कर्मचारियों की ड्यूटी पर मौत के मामलों को छुपाकर मुआवजा देने से बचना चाहती है।
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समाजवादी पार्टी अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
विस्तार
सपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि चिंतन-मनन, मंथन और भोजन-विश्राम के बीच ही भाजपा अपनी चुनावी रणनीति बनाती है। वह इसी में व्यस्त है और जनता बुरी तरह से त्रस्त है ।
अखिलेश ने कहा कि कोरोना और फंगस संक्रमण के इलाज में लापरवाही के चलते लाखों जानें गईं हैं। गांवों में स्थिति तो और ज्यादा खराब है। वहां दवा, इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। कानून व्यवस्था चौपट है। हड़बड़ाहट में भाजपा नेतृत्व दिल्ली से लखनऊ तक दौड़ लगाने लगा है।
सच तो यह है कि भाजपा कार्यकर्ता और आरएसएस स्वयंसेवक दोनों अपनी उपेक्षा के चलते विश्राम की मुद्रा में चले गए हैं। नेतृत्व उनके विद्रोही तेवरों से हैरान है। डरा सहमा भाजपा का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली से लखनऊ तक एसी कमरो में चिंतन-मनन, मंथन और भोजन के साथ लगातार बैठकों में लग गया है। लेकिन हालात ये है कि भेजे गए दूत एक को मनाते हैं तो दूसरा रूठ जाता है। सरकार और संगठन में दरार-रार पाटने के लिए ट्वीट पर ट्वीट कर किसी तरह अपना पिंड छुड़ा रहे हैं।
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सरकार झूठे आंकड़ों के सहारे जनता को बरगलाना चाहती है। कोरोना संक्रमित कर्मचारियों की ड्यूटी पर मौत के मामलों को छुपाकर मुआवजा देने से बचना चाहती है। अपनी नाकामी छुपाने को कोरोना मृतकों संख्या को कम बता रही है। अगर उसकी नीयत साफ है तो वह सभी मृतकों की सूची क्यों नहीं जारी करती है। भाजपा बढ़ते जनाक्रोश और किसान आंदोलन से डरी हुई है। इसी से उत्तर प्रदेश में कभी संगठन में तो कभी सरकार में फेरबदल की चर्चा छेड़ी जाती है।
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अखिलेश ने कहा कि कोरोना और फंगस संक्रमण के इलाज में लापरवाही के चलते लाखों जानें गईं हैं। गांवों में स्थिति तो और ज्यादा खराब है। वहां दवा, इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। कानून व्यवस्था चौपट है। हड़बड़ाहट में भाजपा नेतृत्व दिल्ली से लखनऊ तक दौड़ लगाने लगा है।
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सच तो यह है कि भाजपा कार्यकर्ता और आरएसएस स्वयंसेवक दोनों अपनी उपेक्षा के चलते विश्राम की मुद्रा में चले गए हैं। नेतृत्व उनके विद्रोही तेवरों से हैरान है। डरा सहमा भाजपा का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली से लखनऊ तक एसी कमरो में चिंतन-मनन, मंथन और भोजन के साथ लगातार बैठकों में लग गया है। लेकिन हालात ये है कि भेजे गए दूत एक को मनाते हैं तो दूसरा रूठ जाता है। सरकार और संगठन में दरार-रार पाटने के लिए ट्वीट पर ट्वीट कर किसी तरह अपना पिंड छुड़ा रहे हैं।
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सरकार झूठे आंकड़ों के सहारे जनता को बरगलाना चाहती है। कोरोना संक्रमित कर्मचारियों की ड्यूटी पर मौत के मामलों को छुपाकर मुआवजा देने से बचना चाहती है। अपनी नाकामी छुपाने को कोरोना मृतकों संख्या को कम बता रही है। अगर उसकी नीयत साफ है तो वह सभी मृतकों की सूची क्यों नहीं जारी करती है। भाजपा बढ़ते जनाक्रोश और किसान आंदोलन से डरी हुई है। इसी से उत्तर प्रदेश में कभी संगठन में तो कभी सरकार में फेरबदल की चर्चा छेड़ी जाती है।