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पैक्ड फूड खाने लायक है या नहीं, ये बताएगा अब बायो-सेंसर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 14 Aug 2018 02:40 PM IST
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फोकस मिशन की जानकारी देते आईआईटीआर के निदेशक डॉ. आलोक धवन।
- फोटो : amar ujala
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पैक्ड खाना खाने लायक है या नहीं, यह जानने के लिए फिलहाल ‘यूज बेस्ट बिफोर’ या ‘एक्सपायरी डेट’ का उपयोग हो रहा है, लेकिन यह तरीका सही नहीं है। दरअसल, खाना पैक किए जाने वाली जगह से छोटे दुकानदारों तक पहुंचने में काफी परिस्थितियां बदल जाती हैं, जैसे कि कोल्ड चेन टूटने पर खाना खराब हो जाता है।
पैकेट के ऊपर लिखी तारीख, इसमें पहचान करने के लिए मदद नहीं करेगी। ऐसे में अब बायो-सेंसर पर काम किया जा रहा है। यह सेंसर बताएगा कि पैक्ड दूध या जूस पीने लायक है या नहीं। यह जानकारी आईआईटीआर के निदेशक डॉ. आलोक धवन ने सोमवार को दी।
उन्होंने बताया कि पैक्ड फूड चाहे वह दूध हो या जूस, सॉस हो या कोई सॉलिड फूड, खराब बैक्टीरिया पनपने के समय पैकेट पर लगा सेंसर अपना रंग बदल देगा। इससे ग्राहक देखकर समझ जाएगा कि खाना सुरक्षित नहीं बचा है। डॉ. धवन ने बताया कि मार्च 2020 तक खाने-पीने के सामान और खासतौर पर पैक्ड फूड में सुरक्षा मानक स्मार्ट हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर इसके लिए केंद्र सरकार ने इसके लिए फोकस मिशन लॉन्च किया है।
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प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीआईएसआर) ने इसकी जिम्मेदारी लखनऊ की वैज्ञानिक लैब भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) को दी है।
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पैकेट के ऊपर लिखी तारीख, इसमें पहचान करने के लिए मदद नहीं करेगी। ऐसे में अब बायो-सेंसर पर काम किया जा रहा है। यह सेंसर बताएगा कि पैक्ड दूध या जूस पीने लायक है या नहीं। यह जानकारी आईआईटीआर के निदेशक डॉ. आलोक धवन ने सोमवार को दी।
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उन्होंने बताया कि पैक्ड फूड चाहे वह दूध हो या जूस, सॉस हो या कोई सॉलिड फूड, खराब बैक्टीरिया पनपने के समय पैकेट पर लगा सेंसर अपना रंग बदल देगा। इससे ग्राहक देखकर समझ जाएगा कि खाना सुरक्षित नहीं बचा है। डॉ. धवन ने बताया कि मार्च 2020 तक खाने-पीने के सामान और खासतौर पर पैक्ड फूड में सुरक्षा मानक स्मार्ट हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर इसके लिए केंद्र सरकार ने इसके लिए फोकस मिशन लॉन्च किया है।
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प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीआईएसआर) ने इसकी जिम्मेदारी लखनऊ की वैज्ञानिक लैब भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) को दी है।
आईआईटीआर बना नोडल संस्था
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- फोटो : amar ujala
डॉ. आलोक धवन ने बताया कि आईआईटीआर को लोगों को शुद्ध खाना और पानी उपलब्ध कराने के लिए बने फोकस मिशन का नोडल संस्था बनाया गया है। वहीं सीएसआईआर की पांच लैब इसमें सहयोग करेंगी। इसके लिए सीरी पिलानी, सीएफटीआरआई मैसूर, सीएसआईओ चंडीगढ़, नीस्ट तिरूवंतपुरम को शामिल किया गया है। फोकस मिशन में छह कार्य योजनाएं तय की गई हैं। इसमें खाद्य पदार्थों के खेत में उत्पादन के बाद लंबे समय तक सुरक्षित बनाए रखने से लेकर लोगों के खाने तक खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए तकनीक विकसित की जाएंगी।
डॉ. धवन ने बताया कि हमारी लैब ने ऐसे बायो-सेंसर्स विकसित किए हैं जो खाद्य पदार्थों की पैकिंग का हिस्सा बनाए जाएंगे। इनके परीक्षण के बाद अब बायो-सेंसर्स को पैकिंग में शामिल करने के लिए प्रयास चल रहे हैं। इसके लिए हमने फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) और निफ्टेम सोनीपत के साथ एमओयू किए हैं। निफ्टेम जहां पैकिंग मैटेरियल के लिए विशेषज्ञ संस्थान है, वहीं एफएसएसएआई को खाद्य पदार्थ बनाने और बिक्री करने वाली कंपनियों से इन बायो-सेंसर्स का उपयोग करने के लिए प्रोटोकॉल बनाकर लागू कराएगा। बायो-सेंसर्स के अंतिम चरण के परीक्षण के लिए तीनों संस्थान संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं।
डॉ. धवन ने बताया कि हमारी लैब ने ऐसे बायो-सेंसर्स विकसित किए हैं जो खाद्य पदार्थों की पैकिंग का हिस्सा बनाए जाएंगे। इनके परीक्षण के बाद अब बायो-सेंसर्स को पैकिंग में शामिल करने के लिए प्रयास चल रहे हैं। इसके लिए हमने फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) और निफ्टेम सोनीपत के साथ एमओयू किए हैं। निफ्टेम जहां पैकिंग मैटेरियल के लिए विशेषज्ञ संस्थान है, वहीं एफएसएसएआई को खाद्य पदार्थ बनाने और बिक्री करने वाली कंपनियों से इन बायो-सेंसर्स का उपयोग करने के लिए प्रोटोकॉल बनाकर लागू कराएगा। बायो-सेंसर्स के अंतिम चरण के परीक्षण के लिए तीनों संस्थान संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं।
छह कार्ययोजना पर होना है काम
- खेतों में उत्पादन के बाद खाद्य पदार्थ को सुरक्षित रखते हुए उनके खराब होने की उम्र को बढ़ाना।
- दूध उत्पादों में मिलावट रोकने और खराब होने से बचाने के लिए बायो-सेंसर विकसित किया जाना।
- पेय-पदार्थों की पैकिंग पर बायो सेंसर के साथ डिवाइस लगाना।
- खाद्य तेलों में मिलावट रोकने और इसकी जांच के लिए आसान तकनीक लोगों को उपलब्ध कराना।
- कम कीमत और कम समय में खाद्य पदार्थों में जहरीले तत्वों की जांच करने के लिए तकनीक विकसित करना। जैसे, राष्ट्राध्यक्षों के आने के समय 45 मिनट में बताना होता है कि खाना सुरक्षित या नहीं। आईआईटीआर इस पर काम कर रहा है।
- डिजिटल फूड सेफ्टी पोर्टल लॉन्च करना, इसकी शुरुआत आईआईटीआर ने कर दी है। इसमें सूचनाएं अपडेट की जाएंगी। एफएसएसएआई इमसें मदद करेगा।
शुरू हो चुका है काम
फोकस मिशन पर काम शुरू हो गया है। तकनीक विकसित करने के साथ खाद्य सुरक्षा पोर्टल को मोबाइल एप के रूप में भी लॉन्च किया जाएगा। इससे लोगों को अपने खाने के लिए जागरूक किया जा सकेगा।
- डॉ. आलोक धवन, निदेशक, आईआईटीआर
- दूध उत्पादों में मिलावट रोकने और खराब होने से बचाने के लिए बायो-सेंसर विकसित किया जाना।
- पेय-पदार्थों की पैकिंग पर बायो सेंसर के साथ डिवाइस लगाना।
- खाद्य तेलों में मिलावट रोकने और इसकी जांच के लिए आसान तकनीक लोगों को उपलब्ध कराना।
- कम कीमत और कम समय में खाद्य पदार्थों में जहरीले तत्वों की जांच करने के लिए तकनीक विकसित करना। जैसे, राष्ट्राध्यक्षों के आने के समय 45 मिनट में बताना होता है कि खाना सुरक्षित या नहीं। आईआईटीआर इस पर काम कर रहा है।
- डिजिटल फूड सेफ्टी पोर्टल लॉन्च करना, इसकी शुरुआत आईआईटीआर ने कर दी है। इसमें सूचनाएं अपडेट की जाएंगी। एफएसएसएआई इमसें मदद करेगा।
शुरू हो चुका है काम
फोकस मिशन पर काम शुरू हो गया है। तकनीक विकसित करने के साथ खाद्य सुरक्षा पोर्टल को मोबाइल एप के रूप में भी लॉन्च किया जाएगा। इससे लोगों को अपने खाने के लिए जागरूक किया जा सकेगा।
- डॉ. आलोक धवन, निदेशक, आईआईटीआर
दो पैसा प्रति लीटर आएगी साफ पानी की लागत
निजी कंपनी से अनुबंध करते आईआईटीआर के वैज्ञानिक।
- फोटो : amar ujala
आईआईटीआर ने अपनी विकसित की कम लागत में साफ पानी की तकनीक ‘ओ नीर’ को मार्केट में लाने की तैयारी कर ली है। इसके लिए लखनऊ के ही एक स्टार्टअप एसएस मेजर्स को तकनीक दी गई है। सोमवार को इसके लिए अनुबंध आईआईटीआर ने निजी कंपनी के साथ किया। निदेशक डॉ. आलोक धवन ने बताया कि दो पैसा प्रति लीटर के खर्च में ही शुद्ध पानी लोगों को इससे मिल सकेगा। इसमें फिल्टर बदलने का झंझट नहीं होगा।
कंपनी के निदेशक विनायक दास ने बताया कि घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए चार मॉडल हम लॉन्च करने जा रहे हैं। दीपावली से पहले यह उत्पाद मार्केट में आ जाएगा। घरेलू मॉडल की शुरुआती कीमत छह हजार रुपये होगी। फीचर बढ़ने के साथ ही कीमत 14 हजार रुपये तक हो जाएगी। यूपी के अलावा हम अपने उत्पाद आंध्रप्रदेश सरकार के वाटर मिशन में भी देने जा रहे हैं। यहां स्कूल और अस्पताल में यह डिवाइस लगाई जाएगी।
डॉ. धवन ने बताया कि इन डिवाइस की खासियत यह होगी कि इन्हें पूरी तरह पर्यावरण फ्रेंडली बनाया गया है। वहीं शोधन के समय पानी में मौजूद अच्छे तत्व खत्म नहीं होते हैं। बिजली नहीं होने पर सौर ऊर्जा से इसे चलाया जा सकता है।
कंपनी के निदेशक विनायक दास ने बताया कि घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए चार मॉडल हम लॉन्च करने जा रहे हैं। दीपावली से पहले यह उत्पाद मार्केट में आ जाएगा। घरेलू मॉडल की शुरुआती कीमत छह हजार रुपये होगी। फीचर बढ़ने के साथ ही कीमत 14 हजार रुपये तक हो जाएगी। यूपी के अलावा हम अपने उत्पाद आंध्रप्रदेश सरकार के वाटर मिशन में भी देने जा रहे हैं। यहां स्कूल और अस्पताल में यह डिवाइस लगाई जाएगी।
डॉ. धवन ने बताया कि इन डिवाइस की खासियत यह होगी कि इन्हें पूरी तरह पर्यावरण फ्रेंडली बनाया गया है। वहीं शोधन के समय पानी में मौजूद अच्छे तत्व खत्म नहीं होते हैं। बिजली नहीं होने पर सौर ऊर्जा से इसे चलाया जा सकता है।