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बिकरू कांड: 19 प्रशासनिक अफसरों और आठ राजस्वकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश
Thu, 19 Nov 2020 10:17 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 19 Nov 2020 10:17 AM IST
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विकास दुबे केस: विकरू कांड
- फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार कानपुर के बिकरू कांड में नजीर वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की योजना पर काम कर रही है। बिकरू कांड में पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के बाद 19 प्रशासनिक अफसरों व आठ राजस्वकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है। आरोपी अफसरों व कर्मियों के खिलाफ सक्षम अधिकारी से प्रारंभिक जांच कराकर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश संबंधित विभागों को दे दिए गए हैं। विभाग नियमों के अनुसार आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर कार्रवाई कर मुख्यमंत्री को बताएंगे।
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गृह विभाग के एक सूत्र ने नाम न छापने के आग्रह के साथ अमर उजाला को बताया कि एसआईटी जांच में 19 प्रशासनिक अधिकारियों व आठ राजस्वकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच करवाकर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों में अपर जिलाधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदार तक शामिल हैं। पीसीएस सेवा के तत्कालीन कई अधिकारी बाद में पदोन्नत होकर आईएएस व जिलाधिकारी बन चुके हैं।
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एक प्रमोटी आईएएस सहित कई अफसर नौकरी पूरी कर रिटायर भी हो चुके हैं। कई वर्तमान में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्यरत हैं। एक तत्कालीन उपजिलाधिकारी वर्तमान में एक जिले के कलेक्टर हैं। अब इनके खिलाफ प्रशासनिक विभाग को नियमों के अनुसार कार्रवाई करनी है। तत्कालीन राजस्व निरीक्षक व लेखपालों के संबंध में मंडलायुक्त कानपुर को सक्षम अधिकारी से प्रारंभिक जांच करवाकर कार्रवाई के लिए सिफारिश की गई है।
शस्त्र लाइसेंस जारी करने में फंसे अफसर
एसआईटी ने प्रशासनिक अधिकारियों व राजस्वकर्मियों पर विकास दुबे, उसके परिजनों, सहयोगियों व फाइनेंसर के शस्त्र लाइसेंस जारी करने व रिन्यूअल करने में नियमों व तय प्रक्रियाओं की जानबूझकर अनदेखी करने का संगीन आरोप लगाया है। शस्त्र व कारतूसों की जांच में शिथिलता के लिए भी अफसरों की जवाबदेही प्रस्तावित की गई है। दुर्दांत अपराधी रहे विकास दुबे व उसके सहयोगियों को संरक्षण देने, संपर्क रखने व प्रशासनिक सूचनाओं का आदान-प्रदान करने को लेकर भी अफसर चिह्नित किए गए हैं।
एसआईटी रिपोर्ट पर सवाल भी : आईएएस अफसरों पर मेहरबानी
सूत्र ने यह भी खुलासा किया कि शस्त्र लाइसेंस जारी करने में गड़बड़ियों के लिए किसी भी तत्कालीन जिलाधिकारी (आईएएस अधिकारी) जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। जानकार बताते हैं कि शस्त्र लाइसेंस जिलाधिकारी जारी करता है और इसे वह अपना सबसे मजबूत अधिकार मानता है। बिना उसकी इच्छा किसी को लाइसेंस जारी नहीं हो सकता।