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सरकारी धन की लूट ने बिगाड़ी बिहार की छवि: राज्यपाल

Fri, 18 Dec 2015 02:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 18 Dec 2015 02:30 AM IST
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Bihar governor speaks about poverty in Bihar.

बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविद ने बिना किसी का नाम लिए इशारों व कहानियों के सहारे बीते 30 वर्षों में सूबे की सत्ता संभालने वालों को राज्य की बदहाली के लिए जिम्मेदार ठहराया।

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उन्होंने बिहार की विशिष्टाओं का उल्लेख किया और एक कहानी का हवाला देते हुए कहा कि राजा (शासक) के मन में कुटिलता की प्रवृत्ति व सरकारी धन में लूट की छूट ने बिहार की छवि बिगाड़ दी।
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बिहार के नतीजों से परहेज करते हुए उन्होंने यह जरूर कहा कि बिहार की छवि खराब होने के कारणों को जनता ने महसूस कर लिया।

कोविद बृहस्पतिवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में आयोजित अखिल भारतीय साहित्य परिषद के नागरिक अभिनंदन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बिहार की छवि आमतौर पर अच्छी नहीं मानी जाती। उन्हें भी जब बिहार का राज्यपाल  बनाया गया तो लगा कि कहां जा रहा हूं। पर, चार महीने रहने के बाद यह महसूस हुआ कि बिहार जबर्दस्त विशिष्टताओं वाला राज्य है।
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नालंदा व तक्षशिला से लेकर राजा जनक, मां सीता, गौतम बुद्ध व भगवान महावीर की जन्मस्थली, पितरों को मोक्ष प्रदान करने वाली गया भूमि, आजादी की लड़ाई की प्रारंभिक स्थली चंपारण, सम्राट अशोक व चंद्रगुप्त मौर्य व चाणक्य जैसे नीतिशास्त्री सब कुछ इसी धरती ने दिया। प्राकृतिक संसाधन भरपूर होने के बावजूद बिहार की छवि बिगड़ी है तो सरकारी धन में लूट की बढ़ती प्रवृत्ति से।

लोकतंत्र व संविधान का जनक है बिहार

Bihar governor speaks about poverty in Bihar.

राज्यपाल ने कहा कि भले ही लोग यह मानते हों कि देश के लोकतंत्र व संविधान की अवधारणा इंग्लैंड-अमेरिका से ली गई है। पर सच तो यह है कि इसकी अवधारण बिहार के प्राचीनतम लोकतांत्रिक राज्यों लिच्छवी व वैशाली से ली गई है।

देश को डॉ. राष्ट्रपति के रूप में पहला राष्ट्रपति भी इसी राज्य ने दिया तो दूसरी आजादी अर्थात आपातकाल के विरुद्ध आंदोलन का नेतृत्व भी इसी राज्य में जयप्रकाश नारायण ने किया।

कहानी के सहारे निशाना
: कोविद ने कहा कि अब सवाल है कि इतनी विशिष्टताओं वाले राज्य की छवि इतनी नकरात्मक क्यों बन गई है। एक कहानी से इसका कारण पता चल सकता है। एक राजा जंगल में भटक गया। काफी रात हो गई। भूख व थकान से व्याकुल राजा दूर एक झोपड़ी में टिमटिमाता हुआ दीपक देख अपने सिपहसालारों के साथ वहां पहुंचा।

झोपड़ी में रहने वाली बुढ़िया ने राजा को गन्ने के रस की खीर खिलाई तो उनको रोज खाने की इच्छा जाग उठी। कुछ खास लोगों की सलाह पर बुढ़िया के इलाके की जमीन का अधिग्रहण कर उसे जेल में डाल दिया। पर, जब खीर में झोपड़ी वाली मिठास नहीं मिली तो राजा ने बुढ़िया से इसका कारण पूछा।

बुढ़िया ने कहा, ‘आपके मन में कुटिलता आ गई और जमीन ही छीन ली। इन्हीं कारणों से गन्ने की मिठास चली गई।’ कोविद ने कहा कि यही कुछ बिहार के साथ हुआ।

अभिनंदन समारोह को पूर्व सांसद लालजी टंडन, भाजपा के विधानपरिषद में नेता हृदयनारायण दीक्षित, भारतीय नागरिक परिषद के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश अग्निहोत्री, साहित्यकार डॉ. सुशील त्रिवेदी ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन पवन पुत्र बादल ने किया।

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