मोदी सरकार को मिलेगी अब तक की सबसे बड़ी चुनौती
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भाजपा विरोधी गैर कांग्रेसी दलों का सोमवार को दिल्ली में बड़ा जमावड़ा होगा। इसमें जनता परिवार का हिस्सा रहीं छह पार्टियां शामिल होंगी। इन दलों के विलय से पहले समाजवादी पार्टी दिल्ली में भीड़ जुटाकर शक्ति प्रदर्शन करेगी।
केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद यह पहला राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन है। सपा ने वेस्ट यूपी के हर जिले से 10-10 हजार से ज्यादा लोगों को जंतर-मतर ले जाने का लक्ष्य रखा है।
भीड़ जुटाने में सबसे आगे रहकर सपा न केवल जनता परिवार के घटक दलों को अपनी शक्ति का अहसास कराएगी, वरन केंद्र सरकार को भी चेतावनी देगी।
जंतर-मंतर पर धरने के बाद सपा, जनता दल (यू), जनता दल (एस), राष्ट्रीय जनता दल, इंडियन नेशनल लोकदल और समाजवादी जनता पार्टी के विलय की प्रक्रिया तेज होगी। समाजवादी जनता दल का गठन किया जा सकता है। नए दल की कमान सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को सौंपे जाने की तैयारी है।
सेकुलर दलों के रुख पर नजर
जनता परिवार से अलग हुए छह दलों की नजर गैर भाजपा और गैर कांग्रेसवाद की राजनीति करने वाली दूसरी सेकुलर पार्टियों पर भी है। इनमें वामपंथी दल, बीजू जनता दल, तृणमूल कांग्रेस, तेलगुदेशम और टीआरएस मुख्य हैं।
बहुत संभव है कि धरने में कुछ दलों के प्रतिनिधि सांकेतिक तौर पर शामिल हों। पश्चिमी यूपी में प्रभाव रखने वाला राष्ट्रीय लोकदल फिलहाल जनता परिवार से अलग हुए दलों से दूरी बनाए हुए है।