कोल्हू में फंसकर कटा हाथ सात घंटे की सर्जरी के बाद जोड़ा
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तेल निकालते समय कोल्हू में फंसकर अलग हुए युवक के हाथ को केजीएमयू के डॉक्टरों ने फिर जोड़ दिया है। सात घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद चिकित्सकों ने आठ से नौ महीने में नसों में मूवमेंट होने का दावा किया है।
सुल्तानपुर, निवाया इशाकपुर, हनुमानगंज निवासी राम मिलन पाल का बेटा कुलदीप (17) 15 मार्च को शाम पांच बजे सरसों की पिराई कर रहा था। कुलदीप ने बाएं हाथ में कड़ा पहना था।
इसी दौरान खली खींचते वक्त कुलदीप के हाथ का कड़ा कोल्हू में फंस गया। जब तक लोग शोर सुनकर वहां पहुंचते हाथ की रेडियस बोन तीन जगह से टूट गई और हाथ कटकर अलग हो गया।
आनन-फानन में परिवारीजन कुलदीप को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों ने बाजू के पास टांका लगाकर खून रोक दिया। इसके बाद कटे हुए हाथ को बर्फ में रखकर ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। रात करीब साढ़े नौ बजे परिजन कुलदीप को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे।
इस तरह की गई सर्जरी
ट्रॉमा कैजुअल्टी में मौजूद रेजिडेंट ने ऑर्थोपैडिक और प्लास्टिक सर्जरी विभाग के रेजिडेंट को कॉल दी। प्लास्टिक सर्जन डॉ. बृजेश मिश्रा केस की फोटो व्हाट्स एप पर मंगाई। फोटो देखने के बाद डॉ. बृजेश ने कुलदीप को ओटी में शिफ्ट करने को कहा।
रात ग्यारह बजे शुरू हुआ ऑपरेशन
डॉ. बृजेश मिश्रा ने बताया कि बाएं हाथ के मांस और हड्डी के चीथड़े उड़े हुए थे। कंधे और हाथ की हड्डी बुरी तरह टूट गई थीं। मांसपेशियां फटी थीं।
टीम ने डॉक्यूमेंटेशन ऑफ फ्रैक्चर (हाथ को हुए नुकसान) का पता लगाने के लिए एक्स-रे कराया। इसके बाद वायरल मार्कर जांच कराकर सर्जरी शुरू की गई।
कंधे से अलग हुए हाथ की आर्टरी, वेंस और नर्व को खोजा गया। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से को साफ कर हाथ की नसों को रिपयेर किया गया। सुबह छह बजे तक चली सर्जरी के बाद हाथ को रिपेयर कर दिया गया।
जोड़ी गईं चूर-चूर हड्डियां
हाथ की हड्डी तीन जगह से टूट कर चूरा हो गई थी। इसे जोड़ने के लिए ऑर्थो सर्जन की मदद ली गई। बुरी तरह खराब हो चुकी हड्डी को अलग कर दिया गया। कंधे और हाथ की हड्डी को जोड़ने के लिए एक्सटर्नल फिक्सेटर लगाया गया।
इसके बाद नसों और कोशिकाओं को जोड़कर विशेष तरह के टांके लगाए गए, जिससे हाथ को दोबारा कंधे से जोड़ दिया गया। हाथ की सात सेंटीमीटर हड्डी काटने की वजह से कुलदीप का हाथ सामान्य हाथ की तुलना में छोटा हो गया है।
...इसलिए नहीं हो पाया था कोई नुकसान
डॉ. बृजेश ने बताया कि रक्त प्रवाह के लिए नसों और मांसपेशियों को जोड़ने के साथ आर्टरी और वेन्स को जोड़ा गया। नसों के भीतर एक ऐसी लेयर होती है जिससे नसों में ताकत आती है। कंधे के पास मौजूद नसें शरीर के दूसरे हिस्से से जुड़ी थीं इसलिए उनको कोई नुकसान नहीं हुआ था।
नसों में फाइबर होने से कटे हुए अंग में ताकत पहुंचती रहती है। ऐसे में हाथ की नस को कंधे की नसों से जोड़ा गया, जिससे फाइबर बनने और हाथ के आखिरी हिस्से यानी अंगुलियों के पास तक ताकत पहुंचने में कम से कम छह से नौ महीने का समय लगेगा।
यह समय पूरा होने और नए फाइबर बनने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हाथ में ताकत आ सकेगी और मरीज सामान्य हो सकेगा। हालांकि कुलदीप को अपंगता से बचा लिया गया है।
जांघ से त्वचा को निकालकर हाथ व कंधे के पास लगाया गया
हाथ और हड्डी को जोड़ने की प्रक्रिया के बाद जांघ से त्वचा को निकालकर हाथ व कंधे के पास लगाया गया जिससे कुलदीप के जख्मों को भरा जा सके। सर्जरी के बाद किसी तरह का संक्रमण न हो इसके लिए उसकी लगातार निगरानी की जा रही है।
सर्जरी में शामिल रही टीम
प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. बृजेश मिश्रा के नेतृत्व में शिवानी, डॉ. रविंद्र कुमार गोयल, डॉ. रवि कुमार सिंह, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक सैनी, डॉ. सौरभ, एनेस्थेटिस्ट डॉ. हिमांशु प्रिंश, डॉ. अभिषेक और ओटी स्टाफ सिस्टर प्रिया और भास्कर तिवारी पूरे समय मौजूद रहे।