गन्ना किसानों को अखिलेश सरकार ने दी बड़ी राहत
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लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद लगता है अखिलेश सरकार समाज के हरवर्ग को अपने साथ जोड़ना चाहती है, अब अखिलेश सरकार को गन्ना किसानों की याद आई है।
गन्ना आयुक्त सुभाष चन्द शर्मा ने प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए कृषि निवेश ऋण सीमा 20 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी है।
20 हजार की सीमा पिछले 21 साल से चली आ रही थी। गन्ना किसान सहकारी गन्ना विकास समितियों से गन्ने की खेती के लिए हर साल ऋण लेते हैं।
नाबार्ड के दिशा निर्देशों के मुताबिक 1993 में समितियों से लिए जाने वाले ऋण की सीमा 20 हजार रुपये तय की गई थी।
30 लाख किसानों को लाभ
विभाग के मुख्य प्रचार अधिकारी डॉ. भूपेन्द्र सिंह बिष्ट ने बताया कि प्रदेश में 30 लाख से अधिक गन्ना किसान इस ऋण सुविधा का लाभ उठाते हैं।
बढ़ती महंगाई और गन्ना मूल्य में वृद्धि के चलते किसान काफी समय से ऋण सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे। किसानों का कहना था कि 20 हजार रुपये ऋण से वे फसलों पर सही तरीके से निवेश नहीं कर पाते हैं।
गन्ना आयुक्त ने इस प्रकरण में सभी पक्षों की राय जानने के बाद प्रति कृषक अधिकतम ऋण सीमा को बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया है।
इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए उन्होंने सहकारी गन्ना समिति संघ के प्रबंध निदेशक को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश से भी राहत
वहीं गन्ना किसानों के बकाया धन के मुद्दे पर भी हाईकोर्ट ने फैसला गन्ना किसानों के पक्ष में ही सुनाया था।
किसानों के बकाया धन पर हाईकोर्ट ने कहा था कि सरकार को 20 रूपये प्रति क्विंटल अधिक देकर भुगतान करना होगा।
जिससे कि चीनी मिलें देरी से चलने और पेमेंट में विलंब से टूटे किसानों को अब एक किस्त में 280 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना मूल्य मिलेगा।
अभी तक उन्हें 260 रुपये के रेट से भुगतान हो रहा था, वह भी बहुत धीमी रफ्तार से।