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भाजपा के लिए अबूझ पहेली बने यूपी के 15 हजार बूथ

Fri, 02 Jan 2015 10:08 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 02 Jan 2015 10:08 PM IST
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Big problem against BJP membership campaign in UP.

भाजपा के सदस्यता अभियान की रफ्तार में सूबे के करीब 15 हजार बूथ रोड़ा बन गए हैं। इन स्थानों पर तमाम कोशिशों के बावजूद पार्टी के सौ सदस्य बनाने का लक्ष्य पूरा होना चुनौती बन गया है।

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ये वे बूथ हैं जिनमें लोकसभा चुनाव में भी पार्टी के वोटों का आंकड़ा सौ के भीतर सिमट गया है। इनमें ज्यादातर बूथ मुस्लिम बहुल इलाकों में हैं।

प्रदेश प्रभारी ओम माथुर के सुझाव पर इन स्थानों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर सदस्यता अभियान का लक्ष्य पूरा करने का फैसला किया गया है।

ये बूथ बाराबंकी, रामपुर, सहानपुर, मुजफ्फरनगर, आगरा, कानपुर देहात, मुरादाबाद, आजमगढ़, मैनपुरी, कन्नौज, फीरोजाबाद , बदायूं, बहराइच, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर सहित करीब 35 जिलों में हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी इससे अलग नहीं है।
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पार्टी के रणनीतिकार इन बूथों पर सदस्यता के सहारे ही विधानसभा के 2017 के चुनाव की तैयारी कर लेना चाहते हैं। इसीलिए उनकी कोशिश है कि किसी तरह इन स्थानों पर पार्टी के पास कुछ ऐसे लोग हो जाएं जिससे चुनाव में इन जगहों पर पार्टी का झंडा व बैनर लगाने की कठिनाई न हो।
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मोदी के संसदीय क्षेत्र का भी यही हाल

Big problem against BJP membership campaign in UP.

भले ही लोकसभा चुनाव में पार्टी को यूपी में अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिल गई है। लेकिन पार्टी के रणनीतिकार जमीनी सच्चाई को सामने रखकर ही आगे बढ़ना चाहते हैं।

पार्टी सूत्र बताते हैं कि लोकसभा चुनाव की सफलता के बावजूद 15 हजार बूथों पर पार्टी को मिलने वाला वोट सौ का आंकड़ा पार नहीं कर पाया है।

बाराबंकी की सीट पर भाजपा की उम्मीदवार प्रियंका रावत चुनाव तो जीत गई लेकिन टंडवा, बेलहरा, मदनपुर, विशुनपुर, आजाद स्कूल जैसे कई बूथों पर उन्हें सौ वोट भी नहीं मिले।

पीएम के संसदीय क्षेत्र में भी कुछ बूथों का यही हाल रहा है। कमल गड़हा, नवापुरा और चेतगंज क्षेत्रों के कई बूथों पर भाजपा के वोटों का आंकड़ा सौ के भीतर ही रहा था।

आगरा में जवाहर इंटर कॉलेज, जगदंबा इंटर कॉलेज, नगवा जार तो कानपुर देहात के लउवा पुरवा जैसे कई बूथों पर पार्टी को मिले वोटों का आंकड़ा भी कमोवेश ऐसा ही रहा।

कई जगहों पर तो यह आंकड़ा बमुश्किल दहाई पार कर पाया। यह स्थिति विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए बाधा बन सकती है।

इस तरह होगा काम

Big problem against BJP membership campaign in UP.

इन बूथों पर वहां के हर तरह के समीकरण देखते हुए फिट बैठने वाले नेताओं को भेजा जाएगा। यह नेता स्थानीय स्तर पर प्रवास करेंगे और वहां के लोगों को भाजपा के करीब लाने की कोशिश करेंगे।

मुस्लिम बहुल इलाकों के लिए अल्पसंख्यक मोर्चे के नेताओं को जुटाने की रणनीति है। योजना के अनुसार, अल्पसंख्यक मोर्चे के नेता इन स्थानों पर सबसे पहले किसी स्थानीय व्यक्ति से संपर्क कर उसे पार्टी से जोड़ने का प्रयास करेंगे। फिर उसी के माध्यम से अन्य स्थानीय लोगों से बातचीत करके उन्हें भाजपा के साथ जोड़ने की कोशिश होगी।

हर गांव भाजपा, हर बूथ भाजपा : पार्टी के प्रदेश सदस्यता प्रमुख स्वतंत्र देव सिंह इस बात से इन्कार करते हैं कि कुछ बूथों पर सदस्यता नहीं हो पा रही है। वह कहते हैं कि सभी जगह सदस्य बन रहे हैं। कहीं-कहीं कुछ गति जरूर सुस्त है। इसे ठीक करने के लिए प्रदेश प्रभारी ओम माथुर और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल के मार्गदर्शन में कार्ययोजना बनाई जा रही है।

मुस्लिम बहुल इलाकों के लिए अलग से कार्ययोजना बनाने की बात पर वह कहते हैं कि संगठन ने सभी संबंधित मोर्चा व प्रकोष्ठों को सदस्यता अभियान से जोड़ा है। जिसका जहां उपयोग हो सकता है, वह किया जा रहा है। अल्पसंख्यक मोर्चा के लोगों को भी जिम्मेदारी दी गई है।

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