यूपी में 73 के आंकड़े तक नहीं पहुंच रही भाजपा, पार्टी में कई 'बड़ों' का भविष्य तय करेंगे नतीजे
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एग्जिट पोल से यह संकेत मिल गए हैं कि 23 मई को घोषित होने वाले लोकसभा चुनाव नतीजे सिर्फ उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला ही नहीं करेंगे, बल्कि भाजपा सरकार व संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों की किस्मत का भी निर्णय करने वाले होंगे। सवाल यह नहीं है कि किस एजेंसी के एग्जिट पोल सही होंगे या किसके गलत। प्रदेश में भाजपा को कितनी सीटें मिलेंगी।
असली सवाल तो यह दिखाई दे रहा है कि प्रदेश सरकार के किस ओहदेदार और संगठन के किस पदाधिकारी के क्षेत्र में भाजपा का कैसा प्रदर्शन रहता है। कारण, इसी प्रदर्शन के आधार पर इनकी भी किस्मत का फैसला होना तय है।
दरअसल, एग्जिट पोल में किसी ने भाजपा को 60 पार बताया है तो किसी ने 22 के आसपास ठहराया है। पर, एग्जिट पोल के रुझानों से जो संकेत मिल रहै हैं, उसके अनुसार भाजपा की जीत का आंकड़ा पिछली बार मिली 73 सीटों तक नहीं पहुंच रहा है। ऐसी स्थिति में भाजपा संगठन से लेकर सरकार तक उन कारणों की खोजबीन जरूर करेगा, जिनके कारण प्रदेश में 74 प्लस का सपना साकार नहीं हो पाया।
जाहिर है कि भाजपा की हारी हुई सीटों की समीक्षा की चपेट में कहीं न कहीं वे चेहरे भी आएंगे, जो सरकार से लेकर विभिन्न निगमों, आयोगों और बोर्डों में बैठे हैं। जहां कहीं भी गठबंधन की गणित ने भाजपा के समीकरण बिगाड़े होंगे, उस इलाके के सत्ता व संगठन में बडे़ पदों पर बैठे चेहरों के मौजूदा समीकरणों का बदलना भी तय है।
एक वजह यह भी
चुनाव में प्रदेश सरकार के चार मंत्री सत्यदेव पचौरी, मुकुट बिहारी वर्मा, डॉ. एसपी सिंह बघेल और डॉ. रीता बहुगुणा जोशी खुद चुनाव लड़ रहे हैं। इसलिए 23 मई को न सिर्फ इनकी जीत-हार का नतीजा आएगा बल्कि इससे मौजूदा पद व कद का भी फैसला हो जाएगा।
यदि ये जीत जाते हैं, तो इनके स्थान पर नए लोगों को मौका मिलेगा। जाहिर है कि उन विधायकों को भी मौका दिया जा सकता है, जिनके इलाके में भाजपा का प्रदर्शन बेहतर रहा है। अगर नतीजा उन संभावनाओं के इर्द-गिर्द न रहा, जैसा कि उम्मीद की जा रही है तो परिणाम इसके उलट भी हो सकते हैं। इनके मौजूदा कद व पद पर संकट छा सकता है।
लोकसभा चुनाव के अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालने वाले मंत्रियों की भी परीक्षा
चुनाव नतीजे सिर्फ इन्हीं चार मंत्रियों का भविष्य तय नहीं करने जा रहे हैं बल्कि उन मंत्रियों का भी भविष्य तय करने वाले हैं, जिन्हें चुनाव के मद्देनजर लोकसभा के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभारी बनाकर तैनात किया गया था। प्रभार वाले क्षेत्रों का नतीजा इनके रणकौशल और लोगों से संपर्क व संवाद का प्रमाण भी देगा।
जाहिर है कि इनके आगे की राह का दारोमदार 23 मई को आने वाले नतीजों पर निर्भर करेगा। सिर्फ इनका ही नहीं बल्कि उन लोगों के भविष्य का फैसला भी चुनाव के नतीजों में छिपा है, जिन्हें चुनाव आचार संहिता लगने से ठीक पहले निगमों, बोर्डों और आयोगों में बैठाकर उन्हें सत्ता सुख में हिस्सेदारी देने की कोशिश की गई थी।
संगठन से सरकार तक फेरबदल तय
लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद संगठन से सरकार तक फेरबदल तय है। इसकी आहट सुभासपा के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर की बर्खास्तगी के साथ सुनाई देने लगी है। नतीजे मंत्रिमंडल फेरबदल में मंत्री बनने का सपना संजोये कई विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों की उम्मीदों को भी झटका दे सकते हैं।
जाहिर है कि अब मंत्रिमंडल में शामिल करने या न करने के फैसले में लोकसभा चुनाव के नतीजे और संबंधित चेहरे की क्षमता का भी आकलन होगा।