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Lucknow News: बैक्टीरिया की मदद से बढ़ेगी आलू की पैदावार
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सबहेड- बीबीएयू के पर्यावरण विज्ञान विभाग में हुआ शोध
- छात्रा सोनम गुप्ता के शोध को प्रतिष्ठित जर्नल एल्जेवियर ने किया प्रकाशित
आयुष तिवारी
लखनऊ। किसानों की आय बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका उसकी फसल की अच्छी पैदावार होती है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग ने अपने शोध में किसानों के लिए एक ऐसी खोज की है जिसमें बैक्टीरिया की मदद से आलू की पैदावार बढ़ाई जा सकेगी।
पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. राणा प्रताप के मार्गदर्शन में शोध करने वाली छात्रा सोनम गुप्ता ने अपने शोध में इस बात का दावा किया है। प्रतिष्ठित जर्नल एल्जेवियर ने इसको मान्यता देते हुए प्रकाशित भी किया है। शोधार्थी सोनम गुप्ता ने बताया कि तीन वर्ष तक चले उनके शोध में उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड और झारखंड के तपोवन फसली इलाकों से मिट्टी के दो सौ से अधिक नमूने एकत्रित किए गए। इन नमूनों को विवि की प्रयोगशाला में लाकर आलू की फसल में रोपित किया गया। कई चरणों में हुए शोध में यह सामने आया कि बैक्टीरिया रोपित होने के बाद आलू की फसल में उत्पादकता कई गुना तक बढ़ गई है। इसके साथ ही मिट्टी में फसल की उर्वरक क्षमता को बढ़ाने वाले तत्वों में भी सुधार हुआ है।
खाने में बढ़ेगा जिंक और आयरन
पर्यावरण विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. राणा प्रताप ने बताया कि शोध का मूल उद्देश्य एक बड़ी आबादी तक पोषण युक्त खाद्यान्न पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि भारत कि करीब 50 फीसदी फसली मिट्टी में जिंक की कमी है। जिंक वह पोषक तत्व है जो मिट्टी में अघुलनशील रूप में मौजूद रहता है। पौधों, जानवरों और मनुष्यों के लिए यह सबसे आवश्यक पोषक तत्व है। शोध से सिद्ध हुआ है कि फसल में इस माध्यम से जिंक और आयरन की मौजूदगी बढ़ाई जा सकती है। प्रो. राणा प्रताप ने कहा कि अधिकतम आबादी पोषणयुक्त भोजन नहीं ले पाती है। लेकिन आलू हर वर्ग में खाया जाता है। अगर इसमें जिंक की मात्रा बढ़ेगी तो सभी पोषणयुक्त भोजन मिल पाएगा।
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फर्टिलाइजर पर घटेगी निर्भरता
सोनम ने बताया कि वर्तमान में हम आलू में जिंक बढ़ाने के लिए तमाम महंगे रासायनिक उत्पाद डालते हैं। जबकि इससे सामान्य और सस्ते तत्वों से फसल की उत्पादकता बढ़ाने के साथ जिंक व आयरन बढ़ाया जा सकेगा। इसमें खर्च भी कम आएगा और फसल अच्छी होने के साथ पोषणयुक्त भी होगी।
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- छात्रा सोनम गुप्ता के शोध को प्रतिष्ठित जर्नल एल्जेवियर ने किया प्रकाशित
आयुष तिवारी
लखनऊ। किसानों की आय बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका उसकी फसल की अच्छी पैदावार होती है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग ने अपने शोध में किसानों के लिए एक ऐसी खोज की है जिसमें बैक्टीरिया की मदद से आलू की पैदावार बढ़ाई जा सकेगी।
पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. राणा प्रताप के मार्गदर्शन में शोध करने वाली छात्रा सोनम गुप्ता ने अपने शोध में इस बात का दावा किया है। प्रतिष्ठित जर्नल एल्जेवियर ने इसको मान्यता देते हुए प्रकाशित भी किया है। शोधार्थी सोनम गुप्ता ने बताया कि तीन वर्ष तक चले उनके शोध में उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड और झारखंड के तपोवन फसली इलाकों से मिट्टी के दो सौ से अधिक नमूने एकत्रित किए गए। इन नमूनों को विवि की प्रयोगशाला में लाकर आलू की फसल में रोपित किया गया। कई चरणों में हुए शोध में यह सामने आया कि बैक्टीरिया रोपित होने के बाद आलू की फसल में उत्पादकता कई गुना तक बढ़ गई है। इसके साथ ही मिट्टी में फसल की उर्वरक क्षमता को बढ़ाने वाले तत्वों में भी सुधार हुआ है।
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खाने में बढ़ेगा जिंक और आयरन
पर्यावरण विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. राणा प्रताप ने बताया कि शोध का मूल उद्देश्य एक बड़ी आबादी तक पोषण युक्त खाद्यान्न पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि भारत कि करीब 50 फीसदी फसली मिट्टी में जिंक की कमी है। जिंक वह पोषक तत्व है जो मिट्टी में अघुलनशील रूप में मौजूद रहता है। पौधों, जानवरों और मनुष्यों के लिए यह सबसे आवश्यक पोषक तत्व है। शोध से सिद्ध हुआ है कि फसल में इस माध्यम से जिंक और आयरन की मौजूदगी बढ़ाई जा सकती है। प्रो. राणा प्रताप ने कहा कि अधिकतम आबादी पोषणयुक्त भोजन नहीं ले पाती है। लेकिन आलू हर वर्ग में खाया जाता है। अगर इसमें जिंक की मात्रा बढ़ेगी तो सभी पोषणयुक्त भोजन मिल पाएगा।
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फर्टिलाइजर पर घटेगी निर्भरता
सोनम ने बताया कि वर्तमान में हम आलू में जिंक बढ़ाने के लिए तमाम महंगे रासायनिक उत्पाद डालते हैं। जबकि इससे सामान्य और सस्ते तत्वों से फसल की उत्पादकता बढ़ाने के साथ जिंक व आयरन बढ़ाया जा सकेगा। इसमें खर्च भी कम आएगा और फसल अच्छी होने के साथ पोषणयुक्त भी होगी।