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मोदी के 'शाह' के सामने खुली भाजपा की पोल
अखिलेश बाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 09 Jan 2014 11:09 AM IST
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लोकसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करने बैठे भाजपा प्रदेश प्रभारी अमित शाह के सामने संगठन के कामकाज की पोल खुल गई।
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जिस पर उन्हें पार्टी के लोगों के पेंच कसने पड़े। बैठक में उन्हें कुछ ऐसे सवालों का सामना भी करना पड़ा जिनका जवाब देना उनके लिए मुश्किल दिखाई दिया।
कुछ ऐसे चुभते हुए सवाल उनके सामने आए कि उन्हें डैमेज कंट्रौल की चिंता सताने लगी।
दूसरे दलों के लोगों को भाजपा में शामिल करने और टिकट मांगने के दावेदारों की बढ़ती संख्या जैसे कुछ पदाधिकारियों की आंशकाओं पर पहले तो शाह ने दावा किया कि पार्टी के विस्तार के लिए लोगों को पार्टी में शामिल करना जरूरी है।
पर, बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि इसके खतरे भी काफी हैं। इसलिए पार्टी के पदाधिकारियों को अभी से इसकी चिंता करनी होगी।
उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से भी चुनावी होड़ में शामिल न होने की सलाह दी। कहा कि पदाधिकारियों को चुनाव लड़ने के बजाय चुनाव लड़ाने की चिंता करनी चाहिए।
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पार्टी मजबूत होगी और सरकार में रहेगी तो बहुत अवसर मिलेंगे। बैठक में शाह के सामने यह सवाल आया कि जिस तरह दूसरे दलों के लोगों को भाजपा में तवज्जो और जगह दी जा रही है।
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वह खतरनाक है। इससे पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं में अभी से तमाम आशंकाएं पैदा हो रही हैं। लोगों को लग रहा है कि फिर वही कहानी दोहराई जाने वाली है जो अब तक होती रही है।
अच्छे दिन में मलाई दूसरे काटे और बुरे दिन में संघर्ष पार्टी कार्यकर्ता करें। शाह ने तर्क दिया कि विस्तार के लिए लोगों को शामिल करना जरूरी है।
इससे पार्टी की मजबूती का संदेश जाता है। इनके होर्डिंग लगाने से पार्टी का ही प्रचार होता है। जो लोग आ रहे हैं उनमें किसी को भी टिकट देने का वादा नहीं किया गया है।
जब कुछ पदाधिकारियों ने यह सवाल उठाया कि टिकट न मिलने पर यह लोग पार्टी के खिलाफ जिस तरह माहौल बनाते हैं, उससे नुकसान भी काफी होता है तो शाह ने भी इसे स्वीकार किया।
अभी से उपाय सोचें
शाह ने पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे प्रयास करें कि चुनाव के लिए गंभीर दावेदारों के नाम ही पैनल में शामिल किए जाएं।
पदाधिकारी भी चुनाव लड़ने की होड़ से दूर रहें और चुनाव लड़ाने पर ध्यान दें। पार्टी मजबूत होगी और सत्ता में आएगी तो सभी लोगों को पद व प्रतिष्ठा के तमाम अवसर मिलेंगे।
उन्होंने उन नेताओं के नाम भी अभी से तय कर लेने की सलाह दी जो जिलों में डैमेज कंट्रौल की बागडोर संभाल सकते हैं।
सच्चाई ने बढ़ाई चिंता
जानकारी के मुताबिक, शाह ने जब चुनावी तैयारियों के लिहाज से जानकारी जुटानी शुरू की तो जो सच्चाई सामने आई उससे वह भी चिंतित दिखे।
समीक्षा के दौरान यह सच सामने आया कि अभी सभी बूथों पर कमेटियां गठित नहीं हो पाई हैं।
भाजपा युवा मोर्चा ने दावे तो बड़े-बड़े किए हैं लेकिन उस लिहाज से काम नहीं हुआ है। युवाओं को जोड़ने को लेकर काम काफी पीछे है।
कसे पेंच
शाह ने सभी के पेंच भी कसे। कहा कि बूथों से ही नेताओं की कद-काठी तय होगी। उन्होंने बूथ कमेटियों के सत्यापन को कहा। यह भी कहा कि जहां कमेटियां गठित होनी बताई जा रही हैं। उनके मोबाइल नंबर उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही एक जिले के लोगों को दूसरे जिलों में भेजकर इसकी जांच कराई जाए।
कहा कि भाजपा की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने और चुनावी चंदे पर निर्भरता कम करने के लिए कई बूथों का लक्ष्य पूरा नहीं किया गया है।
इससे भी बूथ कमेटियों को लेकर आशंका पैदा हो रही है। पर, इससे छूट नहीं मिलेगी। बूथवार तय लक्ष्य के अनुसार धन की व्यवस्था करनी होगी।