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यूं ही नहीं चुना गया मोदी की रैली के लिए कानपुर को

Wed, 09 Oct 2013 08:24 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ Updated Wed, 09 Oct 2013 08:24 AM IST
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benifits of modi rally in kanpur

यूपी में नरेंद्र मोदी की पहली रैली के लिए कानपुर का चयन यूं ही नहीं कर लिया गया है। इसके पीछे भाजपा व संघ की सोची-समझी रणनीति दिख रही है।

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दिल्ली में भाजपा को सत्ता मिलने का रास्ता उत्तर प्रदेश से ही होकर जाना है। यहां से मिलने वाली सीटों की संख्या पर ही मोदी की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी टिकी है।
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सूबे के सियासी समीकरणों के लिहाज से कानपुर का विशेष महत्व है। संभवत: इसीलिए भगवा खेमे के रणनीतिकारों ने कानपुर के रास्ते यूपी में मोदी को प्रवेश दिलाने की तैयारी की है।
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मंशा मुलायम को ललकारने के साथ कांग्रेस पर भी करारा हमला बोलने, हिंदुत्व व विकास के साथ भ्रष्टाचार को लोकसभा चुनाव का एजेंडा सेट करने की दिख रही है।

कानपुर रैली में भाजपा ने कानपुर शहर व देहात के अलावा इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, औरैया, और फतेहपुर जिलों से भीड़ जुटाने की योजना बनाई है।

यह इलाका सूबे में बड़ी ताकत बन चुकी समाजवादी पार्टी नेतृत्व की जन्मस्थली और कर्मस्थली से जुड़ा है।
भगवा ब्रिगेड से आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए पहचान बना चुके मुलायम सिंह यादव के वर्चस्व व प्रतिष्ठा के लिए जाना जाता है। सूबे में सरकार चूंकि सपा की है।

स्वाभाविक रूप से लोकसभा चुनाव में भाजपा को हमला केंद्र की कांग्रेस सरकार के साथ यूपी की सपा सरकार पर भी करना होगा।

भगवा खेमे के रणनीतिकार सूबे के इस प्रमुख सियासी यादव परिवार का वर्चस्व उसी के गढ़ में तोड़कर लोगों को संदेश देना चाहते हैं, जिससे यूपी में उनकी आगे की लड़ाई आसान हो जाए।

भाजपा न सिर्फ दिल्ली में बल्कि यूपी की सियासत में भी अपनी खोई जमीन तलाश सके। मोदी की मौजूदा छवि के सहारे भगवा टोली ने कानपुर में अगर दो-तीन लाख भीड़ जुटा ली तो उसके लिए यूपी में मुलायम को चुनौती देना आसान हो जाएगा।

एक वजह यह भी
संघ परिवार की रणनीति वजह हो या मोदी का अपना प्रशिक्षण अथवा समय व संयोग का मेल। मोदी की छवि जिस तरह हिंदुत्व, विकास और ईमानदार शख्स के रूप में बन गई है, उसके चलते भी संघ शायद आश्वस्त है कि मोदी के सहारे यूपी में हिंदुत्व को धार भी जा सकती है।

साथ ही विकास व ईमानदारी के नारों के साथ भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर भाजपा विरोधी दलों को घेरा जा सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर यूपीए सरकार के कई घोटाले चर्चा में आ चुके हैं। पर, उनका यूपी से रिश्ता नहीं निकल रहा है।


इसके विपरीत कोयला खदान आवंटन घोटाला के जरिये यूपी में यूपीए सरकार में कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल के सहारे कांग्रेस को घेरा जा सकता है।

संयोग से श्रीप्रकाश जायसवाल कानपुर के ही हैं। मोदी के चुनाव अभियान में भ्रष्टाचार को एजेंडा सेट करने के लिए भी संभवत: कानपुर का चयन किया गया।

कोयला खदान आवंटन घोटाला के जरिये भाजपा को मुलायम व मायावती को भी निशाना बनाने में सुविधा होगी। पार्टी नेता यह आरोप लगा सकेंगे कि कांग्रेस के साथ खड़े यह दोनों दल भी यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार के साथी हैं।

भगवा टोली के लिए उर्वरा
भाजपा के पहले संस्करण जनसंघ की राजनीति में अटल के आगाज की साक्षी रही इस धरती की आबोहवा संघ परिवार के लिए हमेशा लंबे समय तक फलदायी रही है।

कानपुर भगवा खेमे में हिंदुत्व, विकास व ईमानदार नेता के रूपस्थापित हुए अटल बिहारी वाजपेयी की लंबे समय तक कर्मस्थली रही है। भगवा खेमा मोदी को भी अटल के विकल्प की तरह ही प्रस्तुत कर रहा है। शायद इस वजह से भी कानपुर का चयन किया गया।

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