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Lucknow News: बीबीएयू की लैब को मिली एनिमल ट्रायल्स की मंजूरी
Wed, 09 Jul 2025 01:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Wed, 09 Jul 2025 01:11 AM IST
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बीबीएयू की लैब को मिली एनिमल ट्रायल्स की मंजूरी
लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) को अब प्रयोगशाला चूहों पर वैज्ञानिक अनुसंधान की अनुमति मिल गई है। विश्वविद्यालय को केंद्र सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अधीन ''पशुओं पर प्रयोगों की निगरानी और नियंत्रण समिति'' से अपने एनिमल हाउस के लिए राष्ट्रीय पंजीकरण प्राप्त हुआ है। साथ ही विश्वविद्यालय ने संस्थानिक पशु नैतिकता समिति (आईएईसी) का गठन भी कर लिया है।
बीबीएयू की प्रवक्ता डॉ. रचना गंगवार ने बताया कि इस उपलब्धि में फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग के अध्यक्ष व आईएईसी के चेयरपर्सन प्रो. पीएस रजनीकांत, डॉ. विकास मिश्रा, प्रो. आभा मिश्रा और प्रो. वी. एलांगोवन का विशेष योगदान रहा। पंजीकरण के साथ अब विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के तहत चूहों पर प्रीक्लिनिकल स्टडीज, दवा विकास परीक्षण और जैव-चिकित्सकीय प्रयोग संभव होंगे।
अनुसंधान और उद्योग सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
यह कदम बीबीएयू में न सिर्फ फार्मास्युटिकल साइंसेज, बल्कि जीवन विज्ञान के अन्य क्षेत्रों के शोधकर्ताओं के लिए भी नई संभावनाएं खोलेगा। अब वैज्ञानिक दवा परीक्षणों के पूर्व-चरण में गहराई से काम कर सकेंगे, जिससे शोध की गुणवत्ता और प्रयोगात्मक दायरा दोनों का विस्तार होगा। साथ ही यह प्रगति उद्योगों के साथ शोध सहयोग के नए द्वार भी खोल सकती है, जिससे विश्वविद्यालय की नवाचार क्षमता को बल मिलेगा।
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बीबीएयू की प्रवक्ता डॉ. रचना गंगवार ने बताया कि इस उपलब्धि में फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग के अध्यक्ष व आईएईसी के चेयरपर्सन प्रो. पीएस रजनीकांत, डॉ. विकास मिश्रा, प्रो. आभा मिश्रा और प्रो. वी. एलांगोवन का विशेष योगदान रहा। पंजीकरण के साथ अब विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के तहत चूहों पर प्रीक्लिनिकल स्टडीज, दवा विकास परीक्षण और जैव-चिकित्सकीय प्रयोग संभव होंगे।
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अनुसंधान और उद्योग सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
यह कदम बीबीएयू में न सिर्फ फार्मास्युटिकल साइंसेज, बल्कि जीवन विज्ञान के अन्य क्षेत्रों के शोधकर्ताओं के लिए भी नई संभावनाएं खोलेगा। अब वैज्ञानिक दवा परीक्षणों के पूर्व-चरण में गहराई से काम कर सकेंगे, जिससे शोध की गुणवत्ता और प्रयोगात्मक दायरा दोनों का विस्तार होगा। साथ ही यह प्रगति उद्योगों के साथ शोध सहयोग के नए द्वार भी खोल सकती है, जिससे विश्वविद्यालय की नवाचार क्षमता को बल मिलेगा।
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