UP News: यूपी में बैंकिंग नेटवर्क बढ़ा, बैंक-मित्रों का भी जाल मजबूत; लेकिन बैंक-सखियां अभी भी कमजोर कड़ी
यूपी में बैंकिंग नेटवर्क बढ़ा है। बैंक-मित्रों का भी जाल मजबूत है। लेकिन, बैंक-सखियां अभी भी कमजोर कड़ी हैं। वित्तीय समावेशन में जेंडर गैप कायम है। 21 माह में बैंक मित्र 56% बढ़े। बैंक सखियों की संख्या में सिर्फ 3% का इजाफा हुआ। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में बैंकिंग आउटलेट्स के तेज विस्तार के बावजूद महिला बैंकिंग एजेंट यानी बैंक सखियों (बीसी सखी) की संख्या व वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम है। बैंकों द्वारा शासन को दी गई रिपोर्ट के अनुसार जहां बैंक मित्रों (बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट) की संख्या तेजी से बढ़ी है, वहीं बैंक सखियों की वृद्धि सीमित है।
रिपोर्ट से साफ है कि जेंडर गैप (पुरुषों और महिलाओं के बीच सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षिक अवसरों व उपलब्धियों में असमानता) बरकरार है। मार्च 2024 में बैंक मित्रों की संख्या प्रदेश में 236342 थी जो दिसंबर 2025 में बढ़ककर 369772 हो गई। इसी अवधि में बैंक सखियों की संख्या 38655 थी जो दिसंबर 2025 तक मात्र 39880 तक ही पहुंच सकी।
बैंक सखियों का विस्तार धीमा है
इससे साफ है कि 21 माह में बैंक मित्रों की संख्या करीब 56% बढ़ी, वहीं बैंक सखियों में वृद्धि बेहद सीमित करीब 3% रही। वित्तीय समावेशन के लिहाज से देखें तो बैंक मित्रों का नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ा आधार बन चुका है। जबकि, बैंक सखियों का विस्तार धीमा है।
बैंकिंग आंकड़ों के मुताबिक मार्च-24 से मार्च-25 के बीच बैंक मित्रों की संख्या में 123442 का इजाफा हुआ है। वहीं, मार्च से दिसंबर-25 के बीच उनकी संख्या 9958 बढ़ी है। बीसी सखियों की संख्या पर नजर डालें तो मार्च-24 से मार्च-25 के बीच महज 1023 की वृद्धि हुई है। इसके बाद नौ माह में उनकी संख्या में सिर्फ 202 का इजाफा हुआ। बैंक मित्र तो प्रत्येक 660 मीटर पर मौजूद हैं तो दूसरी तरफ बैंक सखियां 6.10 किलोमीटर पर मिलेंगी।
डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग तकनीक का सीमित ज्ञान बड़ी बाधा
कुल बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट नेटवर्क में महिलाओं की हिस्सेदारी 10% से भी कम है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के चार बड़े बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक बीसी सखियों की संख्या बढ़ाने के लिए बैंकों का पूरा जोर है लेकिन पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की कम संख्या कम होने के कई कारण हैं।
ग्रामीण महिलाओं में डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग तकनीक का सीमित ज्ञान बड़ी बाधा है। कई महिलाओं के पास पूंजी, संसाधन या परिवार का समर्थन नहीं होता। बैंक सखी बनने के लिए स्वयं सहायता समूह से जुड़ाव और प्रशिक्षण जरूरी होता है जिससे चयन का दायरा सीमित हो जाता है। उनका सुझाव है कि यदि प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता और आय सुरक्षा पर जोर दिया जाए तो बैंक सखियों का नेटवर्क भी बैंक मित्रों की तरह तेजी से बढ़ सकता है।
बैंक मित्रों और बैंक सखियों की संख्या
| पद | मार्च-24 | मार्च-25 | दिसंबर-25 |
| बैंक मित्र | 236342 | 359784 | 369772 |
| बैंक सखी | 38655 | 39678 | 39880 |
अन्य बैंकिंग आउटलेट्स की संख्या
- ब्रिक एंड मोर्टार शाखाएं : 20,913
- कुल बैंक मित्र : 369772
- कुल बैंक सखी : 39,880
- कुल बैंकिंग आउटलेट्स : 430565
- एटीएम : 19191