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बैंक लोन फ्रॉड : विक्रम कोठारी को केजीएमयू से मिली छुट्टी, सीबीआई ने जेल अस्पताल में कराया भर्ती
Tue, 09 Jul 2019 09:16 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Tue, 09 Jul 2019 09:16 PM IST
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विक्रम कोठारी
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लंबी जद्दोजहद व सीबीआई के बढ़ते दबाव बाद मंगलवार को बैंक लोन फ्रॉड मामले में फंसे रोटोमैक कंपनी के चेयरमैन विक्रम कोठारी की केजीएमयू से छुट्टी कर दी गई। वह करीब ढाई माह से लिंब सेंटर के (पीएमआर) फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैब्लिटेशन विभाग में भर्ती थे।
मेडिकल बोर्ड में कोठारी के सभी जांच रिपोर्ट पर मंथन बाद उन्हें पीजीआई ले जाने की सलाह दी गई। मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों का कहना था इलाज के बाद भी कोठारी का ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं हो रहा था। लिहाजा उन्हें पीजीआई भेजा गया था। सीबीआई टीम सुबह विक्रम कोठारी को लेकर यहां से निकल गई। सीबीआई ने करीब शाम पांच बजे कोठारी को जेल अस्पताल में भर्ती कराया है। जहां डॉक्टरों की टीम कोठारी का इलाज कराने में जुटी है।
रोटोमैक कंपनी के चेयरमैन विक्रम कोठारी का मुंबई के एक अस्पताल में रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद कोठारी ने हाथ पैरों में कमजोरी की बात कही थी। जेल डॉक्टरों ने उन्हें केजीएमयू के पीएमआर विभाग रेफर कर दिया था। यहां दो अप्रैल को उन्हें भर्ती किया गया था।
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इस दौरान उन्होंने पेट में दर्द की शिकायत बताई। गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड जांच कराई। इसमें गॉल ब्लेडर में पथरी की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की जरूरत बताई। उनका ब्लड शुगर काफी बढ़ा होने की वजह से ऑपरेशन नहीं हो सका। केजीएमयू इंडोक्राइन समेत दूसरे विभाग के डॉक्टरों ने शुगर का इलाज किया। केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार ने बताया कोठारी को मेडिकल बोर्ड टीम ने पीजीआई ले जाने की सलाह दी थी।
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मेडिकल बोर्ड में कोठारी के सभी जांच रिपोर्ट पर मंथन बाद उन्हें पीजीआई ले जाने की सलाह दी गई। मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों का कहना था इलाज के बाद भी कोठारी का ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं हो रहा था। लिहाजा उन्हें पीजीआई भेजा गया था। सीबीआई टीम सुबह विक्रम कोठारी को लेकर यहां से निकल गई। सीबीआई ने करीब शाम पांच बजे कोठारी को जेल अस्पताल में भर्ती कराया है। जहां डॉक्टरों की टीम कोठारी का इलाज कराने में जुटी है।
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रोटोमैक कंपनी के चेयरमैन विक्रम कोठारी का मुंबई के एक अस्पताल में रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद कोठारी ने हाथ पैरों में कमजोरी की बात कही थी। जेल डॉक्टरों ने उन्हें केजीएमयू के पीएमआर विभाग रेफर कर दिया था। यहां दो अप्रैल को उन्हें भर्ती किया गया था।
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इस दौरान उन्होंने पेट में दर्द की शिकायत बताई। गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड जांच कराई। इसमें गॉल ब्लेडर में पथरी की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की जरूरत बताई। उनका ब्लड शुगर काफी बढ़ा होने की वजह से ऑपरेशन नहीं हो सका। केजीएमयू इंडोक्राइन समेत दूसरे विभाग के डॉक्टरों ने शुगर का इलाज किया। केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार ने बताया कोठारी को मेडिकल बोर्ड टीम ने पीजीआई ले जाने की सलाह दी थी।
हाईकोर्ट भी हुआ था सख्त
अस्पताल में भर्ती के बाद भी कोठारी की सेहत में सुधार न होने पर कोर्ट ने सख्ती की थी। सीबीआई ने कोठारी की सभी जांच रिपोर्ट लेकर पीजीजाई-बलरामपुर अस्पताल के विशेषज्ञों से राय ली थी। वहीं केजीएमयू में भी पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड गठित किया गया।
सीबीआई का बढ़ा दबाव तब बना मेडिकल बोर्ड
केजीएमयू डॉक्टरों पर सीबीआई शिकंजा कसने की तैयारी कर रही थी। सीबीआई के बढ़ते दबाव के चलते केजीएमयू प्रशासन ने आनन फानन में मेडिकल बोर्ड गठित किया था। बोर्ड की राय लेने बाद उन्हें पीजीआई ले जाने की सलाह दी गई।
बैंक लोन फ्राड में जेल में हैं कोठारी
मालूम हो कि पिछले साल 19 फरवरी को सीबीआई मुख्यालय (दिल्ली) की टीम ने बैंक आफ बड़ौदा से लिए गए लोन न चुकाने के मामले में एफआईआर दर्ज की थी और विक्रम कोठारी और उनके बेटे राहुल कोठारी को गिरफ्तार किया था। बैंक आफ बड़ौदा की ओर से सीबीआई में शिकायत की गई थी कि कोठारी ने 2919 करोड़ रुपये का लोन लिया जो ब्याज सहित बढ़कर लगभग 3700 करोड़ रुपये का हो गया। जिसे विक्रम कोठारी वापस नहीं कर रहे थे।
कोठारी को पीजीआई में भर्ती नहीं किया गया है। सीबीआई ने मरीज को लाने के बारे में भी कोई सूचना नहीं दी थी। संभव है विक्रम कोठारी को टीम ओपीडी में दिखाकर वापस ले गई हो।
डॉ. राकेश कपूर, पीजीआई निदेशक
सीबीआई का बढ़ा दबाव तब बना मेडिकल बोर्ड
केजीएमयू डॉक्टरों पर सीबीआई शिकंजा कसने की तैयारी कर रही थी। सीबीआई के बढ़ते दबाव के चलते केजीएमयू प्रशासन ने आनन फानन में मेडिकल बोर्ड गठित किया था। बोर्ड की राय लेने बाद उन्हें पीजीआई ले जाने की सलाह दी गई।
बैंक लोन फ्राड में जेल में हैं कोठारी
मालूम हो कि पिछले साल 19 फरवरी को सीबीआई मुख्यालय (दिल्ली) की टीम ने बैंक आफ बड़ौदा से लिए गए लोन न चुकाने के मामले में एफआईआर दर्ज की थी और विक्रम कोठारी और उनके बेटे राहुल कोठारी को गिरफ्तार किया था। बैंक आफ बड़ौदा की ओर से सीबीआई में शिकायत की गई थी कि कोठारी ने 2919 करोड़ रुपये का लोन लिया जो ब्याज सहित बढ़कर लगभग 3700 करोड़ रुपये का हो गया। जिसे विक्रम कोठारी वापस नहीं कर रहे थे।
कोठारी को पीजीआई में भर्ती नहीं किया गया है। सीबीआई ने मरीज को लाने के बारे में भी कोई सूचना नहीं दी थी। संभव है विक्रम कोठारी को टीम ओपीडी में दिखाकर वापस ले गई हो।
डॉ. राकेश कपूर, पीजीआई निदेशक