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बनारस-लखनऊ आतंकी हमलों के आरोपी को उम्रकैद

Fri, 24 Apr 2015 04:29 PM IST
इंदूभूषण पांडेय/ब्यूरो अमर उजाला, बाराबंकी
इंदूभूषण पांडेय/ब्यूरो अमर उजाला, बाराबंकी Updated Fri, 24 Apr 2015 04:29 PM IST
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banaras-lucknow attackers sentenced lifetime imprisonment
लखनऊ, फैजाबाद और बनारस की कचहरी में वर्ष 2007 में हुए सीरियल ब्लास्ट मामले के दो आरोपियों के खिलाफ यहां चल रहे अपराधिक मामले में सुनवाई कर रही अदालत ने एक आरोपी तारिक कासमी को दोषी करार देते हुए अदालत ने उसे उम्रकैद व एक लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
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मामले में वर्ष दिसंबर 2007 में बाराबंकी शहर में रेलवे स्टेशन के पास से तारिक काजमी व खालिद मुजाहिद को एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किया गया था। दो साल पूर्व खालिद मुजाहिद की मौत हो जाने के बाद अब तारिक कासमी को ही सजा सुनाई गई है।
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बताते चले कि लखनऊ, फैजाबाद और वाराणसी कचहरी में हुए सीरियल बम विस्फोट के आरोप में एटीएस व एसटीएफ ने 22 दिसंबर 2007 की सुबह खालिद मुजाहिद व तारिक कासमी को बाराबंकी रेलवे स्टेशन के नजदीक एक होटल के पास से गिरफ्तार किया था। और इनके कब्जे से जिलेटिन की नौ राड, तीन स्टील बजर और डेटोनेटर बरामद हुए थे।
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बाराबंकी कोतवाली में इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। सीओ चिरंजीवी नाथ सिन्हा और राजेश कुमार श्रीवास्तव ने तीन माह में ही न्यायालय में आरोप पत्र पेश कर दिया था। तफ्तीश में तारिक कासमी को उत्तर प्रदेश का हूजी चीफ और खालिद मुजाहिद को यूपी के फौजी दस्ते का कमांडर बताया गया था। बताते चले कि इस मामले में आरोपी रहे खालिद मुजाहिद की 18 मई 2013 को मौत हो चुकी है।

इसी मामले में शुक्रवार को जिला कारागार में विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश एसपी अरविंद ने दोपहर करीब 2 बजे तारिक कासमी को दोषी करार दिया है।

सजा पर सुनवाई करते हुए अदालत ने तारिक कासमी को उम्रकैद व एक लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। पुलिस द्वारा तारिक काजमी को जेल में लाने के दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए है। वहीं एसटीएफ व एटीएस की टीमें भी सक्रिय रही है।

प्रदेश सरकार ने की थी मुकदमा वापसी की सिफारिश

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सीरियल ब्लास्ट मामले के दो आरोपियों के खिलाफ यहां चल रहे अपराधिक मामले में 3 मई 2013 को विशेष लोक अभियोजक अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने शासन के निर्देश का हवाला देते हुए आरोपियों पर से मुकदमा वापस लिए जाने का अनुरोध करते हुए विशेष अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था।

जिसे अदालत ने 10 मई 2013 को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त अभियुक्तों के विरुद्ध चल रहा वाद वापस लेने पर कौन सा जनहित होगा, यह न्यायालय की समझ से परे है। इसी मामले में आरोपी को अदालत ने अब दोषी करार दिया है।

मालूम हो कि प्रदेश सरकार ने कचहरी सीरियल ब्लास्ट के आरोपियों के मुकदमें वापसी के लिए प्रमुख सचिव न्याय की ओर से जिलाधिकारी को पत्र भेजा था।

इसी के आधार पर 3 मई 2013 को मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत में तत्कालीन विशेष लोक अभियोजक अपर जिला शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार द्विवेदी ने मुकदमा वापसी के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें कहा गया था कि क्षेत्र की सुरक्षा, व्यापक जनमानस व सांप्रदायिक सौहार्द को दृष्टिगत रखते हुए आरोपियों पर से मुकदमा वापस लिया जाना न्यायोचित होगा।

इसके बाद 10 मई 2013 को इस मामले की सुनवाई कर रही तत्कालीन विशेष अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एससी एसटी एक्ट) कल्पना मिश्रा ने अभियोजन पक्ष की अर्जी खारिज करते हुए अपने आदेश में लिखा था कि मामला आतंकवादी गतिविधियों से संबंधित है तथा अभियुक्तों के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य होने के उपरांत न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया है।

अदालत ने सुनाया कठोर फैसला

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अदालत ने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त रहने वाले अभियुक्तों के विरुद्ध चल रहा वाद वापस लेने पर कौन सा जनहित होगा, यह न्यायालय की समझ से परे है। आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त रहने वाले व्यक्ति किसी जाति संप्रदाय से जुड़े नहीं होते, उनका एक मात्र मकसद जनमानस में आतंक पैदा करना होता है।

अदालत ने कहा कि इस मामले में समस्त अभियोजन साक्ष्य प्रस्तुत किए जा चुके हैं, अंतिम साक्षी के तौर पर विवेचक की साक्ष्य लगभग समाप्त की ओर है जिसमें 83 पेज बयान लिखे जा चुके हैं। न्यायधीश ने आदेश में लिखा था कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है, मात्र राज्य सरकार के दिए गए आदेश के अनुक्रम में मुकदमा वापसी का प्रार्थना पत्र दिया गया है।

इसमें कोई तथ्य वर्णित नहीं है जिससे जनहित, न्याय हित, सुरक्षा, सामप्रदायिक सौहार्द व न्याय व्यवस्था कायम करने के उद्देश्य से वाद को वापस लिया जा सके। यह कहते हुए अदालत ने अभियोजन पक्ष की मुकदमा वापसी की अर्जी खारिज कर दी थी।

बताते चले कि लखनऊ, फैजाबाद और वाराणसी कचहरी में हुए सीरियल बम विस्फोट के आरोप में एटीएस व एसटीएफ ने 22 दिसंबर 2007 की सुबह खालिद मुजाहिद व तारिक कासमी को बाराबंकी रेलवे स्टेशन के नजदीक विश्वनाथ होटल के पास से गिरफ्तार किया था। और इनके कब्जे से जिलेटिन की नौ राड, तीन स्टील बजर और डेटोनेटर बरामद हुए थे।

बाराबंकी कोतवाली में इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। सीओ चिरंजीवी नाथ सिन्हा और राजेश कुमार श्रीवास्तव ने तीन माह में ही न्यायालय में आरोप पत्र पेश कर दिया था।

तफ्तीश में तारिक कासमी को उत्तर प्रदेश का हूजी चीफ और खालिद मुजाहिद को यूपी के फौजी दस्ते का कमांडर बताया गया है। इन पर चल रहे मुकदमें की वापसी के लिए करीब तीन माह पहले शासन ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी। इसी के तहत अब मुकदमा वापसी की कार्रवाई अदालती अंजाम तक पहुंची थी।
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