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बहराइच हिंसा: सरकार ने कोर्ट में कहा- ध्वस्तीकरण का नोटिस हो गए हैं वापस, कोर्ट का सवाल- पहले सर्वे किया था

Mon, 18 Nov 2024 08:20 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 18 Nov 2024 08:20 PM IST
सार

Bahraich violence: बहराइच हिंसा में आरोपियों के घर बुलडोजर चलाने के मामले में यूपी सरकार ने कोर्ट में साफ किया है कि जिन लोगों को ध्वस्तीकरण के नोटिस दिए गए थे वह वापस ले लिए गए हैं। 
 

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Bahraich violence: UP government told the court that the demolition notice has been taken back, the court aske
बहराइच हिंसा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बहराइच हिंसा से जुड़े आरोपियों के घरों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के मामले में सरकार ने उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में बताया कि ध्वस्तीकरण की नोटिस वापस ले ली गई है। अदालत ने याचिका दाखिल करने वाली संस्था के अधिवक्ता से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के खिलाफ जन हित याचिका का क्या औचित्य है। याची अधिवक्ता ने बताया कि सरकार ने संप्रदाय विशेष के खिलाफ बदले की भावना से की कार्रवाई जिसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई में याचिका दाखिल करने वाली संस्था का हलफनामा न पाकर मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर नियत की है।

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दाखिल हुई थी जनहित याचिका 

Bahraich violence: UP government told the court that the demolition notice has been taken back, the court aske
हिंसा की चपेट में बहराइच। - फोटो : अमर उजाला।

एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स संस्था ने बहराइच मामले से जुड़े आरोपियों के घरों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर जनहित याचिका दाखिल की थी। 20 अक्तूबर, रविवार को मामले की पहली सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से मामले की विस्तृत जानकारी के साथ हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही जनहित याचिका दाखिल करने वाली संस्था से भी जनहित याचिका के औचित्य पर सवाल किया था। 

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अदालत से सरकार से पूछा सर्वे किया था? 

Bahraich violence: UP government told the court that the demolition notice has been taken back, the court aske
बहराइच हिंसा। - फोटो : अमर उजाला।

अदालत ने सरकार से सवाल पूछे कि ध्वस्तीकरण के आदेश की कार्रवाई से पहले क्षेत्र में सर्वे किया गया था या नहीं। साथ ही जिन 23 घरों पर ध्वस्तीकरण की नोटिस चस्पा की गई है उनके अलावा क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर क्या स्थिति है। याची अधिवक्ता सौरभ शंकर श्रीवास्तव ने अदालत को बताया था कि मामले में कार्रवाई की नोटिस जारी करने के लिए सक्षम अधिकारी जिलाधिकारी हैं जबकि पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता के माध्यम से नोटिस भेजी गई। साथ ही नोटिस पर जवाब देने का उचित समय भी नहीं दिया गया था।

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