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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Bahraich: Read about the story of Shivalebag Shivling.

अद्भुत है शिवालेबाग शिवलिंग की कथा: जंजीरों से बांधकर शिवलिंग को हाथियों ने खींचा तो बही थी खून की धारा

Mon, 22 Jul 2024 12:08 AM IST
ishwar ashish संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Published by: ishwar ashish Updated Mon, 22 Jul 2024 12:08 AM IST
सार

सावन के पवित्र मास के पहले दिन जानें बहराइच के उस शिवलिंग के बारे में जहां से अद्भुत कथाएं जुड़ी हुई हैं। शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा टूटा हुआ है। इससे जुड़ी कथाएं लोगों को आकर्षित करती हैं।

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Bahraich: Read about the story of Shivalebag Shivling.
पौराणिक शिवालेबाग शिव मंदिर - फोटो : amar ujala

विस्तार

बहराइच के नानपारा नगर के बाईपास रोड स्थित पांडव कालीन पौराणिक शिवालेबाग शिव मंदिर लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक है। सावन मास में यहां आस्था का सैलाब उमड़ता है और जलाभिषेक के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगती है। वहीं, हजारो कांवड़िए यहां जलाभिषेक के बाद दूसरे मंदिरों में जलाभिषेक के लिए कूच करते हैं। ग्रामीणों में मान्यता है कि मंदिर का शिवलिंग हल से खेत की जोताई के दौरान भूमि से निकला था। वहीं, अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने भी यहां कई दिनों तक पूजन-अर्चना की थी।

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नानपारा तहसील स्थित शिवालेबाग शिव मंदिर बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और गोंडा के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल के भी लाखों हिंदुओं के आस्था का प्रतीक है। सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पूजन अर्चन के लिए आते हैं वहीं नव दंपत्ति भी यहां आर्शीवाद व दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सावन मास के दौरान इस पांडव कालीन मंदिर पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है और लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। श्रद्धालुओं की आस्था है कि सच्चे मन से यहां पूजा-अर्चना करने से भोलेनाथ हर मनोकामना पूरी कर देते हैं। सावन के साथ ही शिवरात्रि में यहां मेले जैसा माहौल रहता है।
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खेत से निकली थी शिवलिंग, पांडवों ने की थी पूजा-अर्चना
शिव भक्तों की माने तो शिवालेबाग मंदिर की शिवलिंग हल से खेत की जोताई के दौरान भूमि से निकली थी। जमीन से शिवलिंग प्रकट होने के बाद लोगों ने अरघा बनाकर पूजना शुरु कर दिया था। जब अज्ञातवास के दौरान पांचो पांडव यहां पहुंचे तो कई दिनों तक उन्होंने भी यहां पूजन किया।
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हाथियों से शिवलिंग निकालने का हुआ प्रयास तो बहने लगी खून की धारा

शिवभक्तों की मानें तो लोगों की आस्था का केन्द्र बिंदु बने शिवलिंग को तत्कालीन राजाओं ने जंजीर से बांध कर हाथियों से बाहर निकलवाने का प्रयास किया था। इस दौरान शिवलिंग अपनी जगह से हिली तक नहीं। वहीं, शिवलिंग से खून की धारा बहने लगी जिसके बाद इसे भगवान शिव का चमत्कार मान मंदिर का निर्माण करवाया गया।

टूटा है शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा
पांडवकालीन शिवालेबाग मंदिर के शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा टूटा हुआ है। जो लोगों की प्राचीन कहानियों को सच साबित करता नजर आता है। मंदिर के महाराज वीरेंद्र ने बताया कि मंदिर में भस्म आरती होती है। वहीं, लाखों लोगों की आस्था के प्रतीक इस मंदिर पर श्रद्धालुओं की ओर से समय-समय पर विभिन्न आयोजन किए जाते हैं।

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