{"_id":"66dfeeed3cbfa69ad4086411","slug":"bahraich-four-girls-get-drowned-in-nawabganj-thana-kshetra-2024-09-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich: तालाब में डूबकर चार बालिकाओं की मौत, एक ही गांव में चार मौतों से पसरा मातम, सीएम योगी ने जताया शोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich: तालाब में डूबकर चार बालिकाओं की मौत, एक ही गांव में चार मौतों से पसरा मातम, सीएम योगी ने जताया शोक
Wed, 11 Sep 2024 06:45 AM IST
ishwar ashish
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 11 Sep 2024 06:45 AM IST
सार
तीन बालिकाओं की तालाब में डूबने से मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक बालिका को ग्राम प्रधान की मदद से अस्पताल लाया गया। अस्पताल पहुंचते ही उसकी भी मौत हो गई।
विज्ञापन
मौतों से गांव में पसरा मातम।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
बहराइच के नवाबगंज थाना क्षेत्र के सतीजोर गांव में स्थित तालाब में डूबकर चार बालिकाओं की मौत हो गई। इससे हड़कंप मच गया। सभी के शव तालाब से बरामद कर लिए गए हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना से हुई जनहानि पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने दिवगंतो के परिजनों को अनुमन्य राहत राशि तत्काल वितरित किए जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मृतक बच्चियों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
विज्ञापन
सतीजोर गांव स्थित तालाब में किशोरियों के डूबने से हुई मौत के कारण पूरे गांव में चारों तरफ मातम पसरा रहा। लोग उस घड़ी को कोसते नजर आए जिस समय किशोरियों के मन में तालाब में लगे फूल को तोड़ने की इच्छा जागी।
विज्ञापन
तालाब किनारे मौजूद जाकरून की छह वर्षीय बेटी मोबीन ने परिजनों को बताया कि तालाब में दो कमल के फूल निकलते हुए थे। उसे तोड़ते समय महक (14) डूबने लगी थी। उसे बचाने के लिए सामिया (11), साइबा (11) और सरिकुल (13) भी तालाब में उतर गईं और सभी गहरे पानी में डूब गईं। चारों को डूबता देख उसने शोर मचाकर लोगों को बुलाया। छोटी होने के चलते वह किनारे पर ही मौजूद रही।
विज्ञापन
चारों किशोरियों की मौत के बाद जब उनके शव घर पहुंचे। तो महक की मां हासदीन बेटी के शव से लिपटकर रोने लगी। उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि बेटी उन्हें छोड़कर चली गई। वहीं साइबा की मां कमरुननिशा और सामिया की मां यास्मीन रो-रोकर बेसुध हो रही थीं। सरिकुल की मां मेहताब रोते-रोते बोल रही थी कि काश उसने बेटी को घर पर ही रोक लिया होता और बाहर घूमने नहीं जाने दिया होता।
उधर हादसे के बाद नानपारा एसडीएम अश्वनी पांडेय, सीओ नानपारा प्रदुम्न सिंह पुलिस फोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और परिजनों को ढांढ़स बंधाया।
पोस्टमार्टम के लिए परिजनों को समझाने में अधिकारियों के छूटे पसीने
चचेरी बहनों की डूबकर मौत हो जाने के बाद परिजन व ग्रामीण पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार नहीं थे। इसके चलते काफी गहमागहमी का माहौल रहा। अधिकारियों ने सतर्कता बरतते हुए परिजनों को किशोरियों का पोस्टमार्टम कराने के लिए मनाया। तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद परिजन राजी हुए।
जिसने सुना घटनास्थल की तरफ भागा
हादसे में पाटीदार परिवारों की चार किशोरियों की मौत की खबर जिसने भी सुनी वह सीधा घटनास्थल की तरफ भागा। इसके चलते मौके पर आसपास के गांवों की हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। वहीं परिजनों के रोने बिलखने और चीख पुकार से घटनास्थल पर मौजूद सभी की आंखें नम नजर आईं।
चचेरी बहनें होने के साथ थीं पक्की सहेली
ग्रामीणों ने बताया कि महक, सामिया, साइबा, सरिकुल और मोबीन के परिजन एक ही खानदान से थे। इसके चलते वह पाटीदार होने के साथ ही चचेरी बहनें थीं और अक्सर साथ रहकर यहां वहां घूमती व खाती थीं। आपस में पक्की सहेलियां भी थीं। घूमते हुए तालाब किनारे पहुंची और फूल को तोड़ने के चक्कर में जान गवां बैंठीं। मोबीन छोटी होने के कारण तालाब में नहीं उतरी। चारों बहनों की मौत होने से वह गुमसुम हो गई है।
गांव में चारों तरफ पसरा रहा मातम
एक साथ चार मौतें होने से गांव में मातम और सन्नाटा पसर गया। हर ग्रामीण पीड़ित परिजनों के गम में शामिल होने पहुंचा। एक साथ चार चारपाइयों पर किशोरियों की लाश जिसने भी पड़ी देखी उसका कलेजा पसीज गया। गम और चीत्कार की आवाजें सुन वहां मौजूद ग्रामीण और अधिकारियों के चेहरे भी मुरझाए नजर आए। वहीं मातम के चलते देर शाम तक ग्रामीणों के घरों में चूल्हा तक नहीं जला।
प्राइमरी तक ही हुई थी पढाई
परिजनों ने बताया कि सभी किशोरियों गांव स्थित प्राइमरी स्कूल में कक्षा पांच तक शिक्षा ग्रहण किए हुए थी। इसके बाद उन लोगों ने सभी की पढ़ाई बंद करा दी थी। मृतक किशोरयिों के परिजनों ने पुलिस को बताया कि उन्हें किशोरियों के गांव के बाहर स्थित तालाब पर जाने का बिल्कुल भी अंदेशा नहीं था। अक्सर वह लोग गांव में ही रहती थी। अगर उन्हें ऐसा मालूम होता तो घर से ही बाहर नहीं निकलने देते।
मुंबई, कर्नाटक से गांव के लिए निकले पिता
मौत की सूचना मिलने पर महक के पिता कलीम मुंबई से घर के लिए निकल पड़े हैं। वह वहां रहकर रोजगार करते हैं। वहीं मृतक सामिया के पिता इशरत कर्नाटक में रोजगार करते हैं, जो मौत की सूचना पाकर बदहवास हो गए और गांव के लिए रवाना हो गए। सरिकुल के पिता मकबूल खेतीबाड़ी और साइबा के पिता मेराज मजदूरी कर परिवारों का भरण पोषण करते हैं।