राज्य सरकार एक धर्म विशेष के लोगों की सरकार बनकर कर रही काम: बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी
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कानून बनाकर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कराने के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी ने नाराजगी जताई है। राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने के बयान को गंभीरता से लेते हुए कमेटी ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो सुप्रीम कोर्ट का सहारा लिया जाएगा।
कमेटी ने आरोप लगाया कि प्रदेश की मौजूदा सरकार खुद को एक विशेष धर्म के लोगों की सरकार समझ कर काम कर रही है। अमीरुद्दौला इस्लामिया कॉलेज में गुरुवार को हुई कमेटी की बैठक में कमेटी ने साफ किया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा उसे माना जाएगा।
कमेटी के उपाध्यक्ष मौलाना यासीन अली उस्मानी ने इस मसले पर डिप्टी सीएम, विहिप व अन्य संगठनों के बयान को सियासी एजेंडा बताया। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कमेटी के संयोजक जफरयाब जीलानी ने कहा कि प्रदेश की मौजूदा सरकार अयोध्या मामले में 1950 में दाखिल मुकदमे में राज्य सरकार और डीएम की ओर से दाखिल तहरीरी बयान के खिलाफ काम कर रही है। पूर्व में सरकार ने माना है कि बाबरी मस्जिद में मुसलमान कई साल से नमाज पढ़ते हैं। इसमें हिंदुओं ने कभी पूजा नहीं की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का दिया हवाला
उन्होंने कहा, इस्माइल फारूकी मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि अयोध्या मामले की सुनवाई तथ्यों के आधार पर होगी न कि आस्था के। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान कोई मायने नहीं रखते क्योंकि कुंभ में पीएम मोदी कह चुके हैं कि अयोध्या मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी। अगर पीएम बयान से मुकर कर अध्यादेश लाते हैं तो उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
मध्यस्थता कमेटी की कोशिश के सवाल पर उन्होंने कहा कि मध्यस्थता कमेटी अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी जिस पर सर्वोच्च अदालत ही फैसला करेगी। इस मामले में मुसलमानों के सभी मसलकों का मानना है कि जिस जमीन पर एक बार मस्जिद बन गई वो हमेशा मस्जिद रहती है। हालांकि सर्वोच्च अदालत जो भी फैसला सुनाएगी उसे माना जाएगा।
16 अगस्त से सुनवाई की उम्मीद
बैठक में जीलानी ने सदस्यों को अयोध्या मामले की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। कहा, 16 अगस्त या उसके बाद सुप्रमी कोर्ट में सुनवाई की तारीख तय होने की उम्मीद है। कमेटी का मानना है कि इस मामले में किसी तरह की जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए क्योंकि सुनवाई में तमाम दस्तावेजी सुबूत और कई बिंदुओं पर चर्चा होनी है।
कहा, सभी पक्षकारों को बहस का पूरा मौका मिलना चाहिए। बैठक में हिमासुद्दीन सिद्दीकी, अरशद जमाल, इलियास आजमी, मुश्ताक अहमद सिद्दीकी, मो. कमर आलम, अबरार अहमद और अय्यूब उल्लाह खां समेत तमाम सदस्य शामिल हुए।