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यूपी का रण : आजमगढ़ मंडल की रिपोर्ट, दिग्गजों का कर्मक्षेत्र... अब प्रश्नक्षेत्र

Thu, 02 Dec 2021 09:26 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 02 Dec 2021 09:26 AM IST
सार

साहित्य में महापंडित राहुल सांकृत्यायन,  कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ से लेकर कैफी आजमी तक और सियासत में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, पूर्वांचल के दिग्गज नेता कल्पनाथ राय, धरतीपुत्र मुलायम सिंह और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कर्मक्षेत्र रहा यह इलाका अब प्रश्नक्षेत्र बन गया है।

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Azamgarh Division's report, the field of work of veterans... now the question area
अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव

विस्तार

साहित्य में महापंडित राहुल सांकृत्यायन,  कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ से लेकर कैफी आजमी तक और सियासत में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, पूर्वांचल के दिग्गज नेता कल्पनाथ राय, धरतीपुत्र मुलायम सिंह और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कर्मक्षेत्र रहा यह इलाका अब प्रश्नक्षेत्र बन गया है। समृद्ध विरासत के बावजूद पूरा मंडल विकास की गंगा से असिंचित ही कहा जाएगा। उद्योगों, बेरोजगारी और शिक्षा के अभाव की वजह से युवाओं में भटकाव ज्यादा दिखाई देता है। मंडल के तीनों जिलों, आजमगढ़, बलिया और मऊ में कमोबेश यही स्थिति दिखाई देती है। 

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2012 में यहां की 21 सीटों में से 16 पर सपा ने परचम फहराया था तो बसपा को महज चार सीटें ही मिली थीं। जबकि एक सीट कौमी एकता दल को मिली थी। वहीं, वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा ने सपा के इस किले का द्वार तोड़ दिया और नौ सीटों पर कब्जा जमा लिया। बसपा और सपा को छह-छह सीट से संतोष करना पड़ा। मंडल मुख्यालय की 10 में से पांच सीट सपा बचाने में कामयाब रही, लेकिन मऊ में खाता नहीं खोल पाई। 
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यहां अक्सर यह चर्चा आम रहती है कि मंडल की 21 सीटों पर बढ़त बनाने वाली पार्टी को सत्ता हासिल होती है। जाहिर है ये चर्चाएं यहां लोगों को गर्व की अनुभूति कराती हैं। पर, दूसरे पहलू पर नजर दौड़ाएं तो एक अलग तस्वीर उभरती है। गांवों को जोड़ने वाली ज्यादातर सड़कें खराब हैं। कॉटन मिल है। सिल्क साड़ी का कारोबार है। पर, बेरोजगारी की मार भी कम नहीं है। अस्पताल तो हैं, पर इलाज के लिए भटकना पड़ता है। बलिया के कुछ इलाकों में पानी में आर्सेनिक लोगों को जवानी में ही बूढ़ा बना रहा है।
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सियासी समीकरण बदले जरूर, पर चुनौतियां भी बढ़ी हैं
मऊ निवासी कम्युनिस्ट नेता रामकुमार भारती कहते हैं, मंडल में चुनाव से पहले सियासी समीकरण बदलने के साथ चुनौतियां भी बदली हैं। आजमगढ़ के फूलपुर पवई से भाजपा विधायक अरुण यादव के पिता पूर्व सांसद रमाकांत यादव सपा के साथ हैं। बसपा के कद्दावर नेता सुखदेव राजभर के निधन के बाद उनका बेटा भी सपा के साथ है। मुबारकपुर के विधायक और बसपा के नेता विधानमंडल दल रहे शाह आलम भी सपा के साथ आ गए हैं। इस सबसे सपा का पलड़ा भारी जरूर दिख रहा हो, लेकिन पुराने और नए कार्यकर्ताओं में सामंजस्य बनाना ही बड़ी चुनौती है। वहीं, मऊ के ही इंजीनियर विंध्याचल चौहान कहते हैं, मऊ सहित पूरे मंडल मे चौहान समाज का अच्छा वोटबैंक है। मऊ में दारा सिंह चौहान और फागू चौहान जैसे कद्दावर नेता हैं, जो हमेशा भाजपा के साथ रहे हैं। पर, इस समाज के ही डॉ. संजय चौहान जनवादी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष हैं। इस पार्टी का सपा से गठबंधन है। हालांकि, वह यह भी कहते हैं कि चौहान और यादवों के बीच यहां जो रस्साकशी देखने को मिलती रही है उससे इस समीकरण का कितना फायदा मिलेगा, यह कहना मुश्किल है।

मुद्दे तो बनते हैं पर नहीं बदली तस्वीर

आजमगढ़ : बिजली संकट कायम
आजमगढ़ में मेडिकल कॉलेज व कृषि महाविद्यालय है। यूनिवर्सिटी की नींव पड़ चुकी है। लेकिन 20 एकड़ में बना पैरामेडिकल कॉलेज 28317.95 लाख खर्च होने के बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। हवाई पट्टी को हवाई अड्डा में तो तब्दील कर दिया गया, पर उड़ान भरने का इंतजार अब भी जारी है। यहां तैयार होने वाली साड़ियों को दुनियाभर में बनारसी साड़ी का खिताब मिला है। रेशमी साड़ी उद्योग को ओडीओपी में भी चुना गया है। पर, जिस तरह के बाजार की जरूरत है, नहीं मिल पा रहा है। सपा सरकार में बना पावरलूम विपणन केंद्र उद्घाटन का इंतजार कर रहा है। विधानसभा क्षेत्र मेहनगर हो या सदर या फिर गोपालपुर, हर जगह सड़कों का बुरा हाल है। उपकेंद्र बनने के बाद भी बिजली समस्या बरकरार है।

मऊ : सरयू के कटान की चिंता
अब बात करते हैं मऊ की। यह इलाका कभी कम्युनिस्टों का गढ़ रहा है। अब यहां सपा, बसपा और भाजपा के बीच सियासी संघर्ष होता रहता है। यहां से बाहुबली मुख्तार अंसारी विधायकी बरकरार रखे हैं, तो तीन सीट पर भाजपा का कब्जा है। वर्षों तक बंद रही घोसी चीनी मिल चलने जा रही है, तो मऊ-आनंदविहार एक्सप्रेस शुरू होने से लोगों को बड़ी राहत मिली है। पर, यूपी स्टेट स्पिनिंग मिल्स और स्वदेशी कॉटन मिल को चालू करने का वादा पूरा नहीं हो सका है। सरयू में पानी बढ़ते ही कटान का डर यहां के लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच देती है।

बलिया : मिलें बंद
सात विधानसभा क्षेत्र वाला यह जिला तीन तरफ से बिहार से घिरा है। एक तरफ से सरयू आती है तो दूसरी तरफ से गंगा। बाढ़ से बचाने के लिए बिहार की तरफ पक्का निर्माण करा दिया गया है। ऐसे में पानी बढ़ते ही बलिया डूबने लगता है। यहां कभी बोल्डर रखवाए जाते हैं तो कभी मिट्टी भरी बोरियां। हर बाढ़ में यह कवायद बदस्तूर जारी रहती है। वक्त के साथ यहां डूब क्षेत्र बढ़ता जा रहा है। यह किसानों के लिए आफत बना है तो सरकारी मशीनरी के लिए कामधेनु। दोआबा के इलाके में आर्सेनिक की अधिकता की वजह से लोग चर्मरोग, हड्डियों की कमजोरी सहित तमाम बीमारियों से जूझ रहे हैं। कॉटन और चीनी मिलें बंद हैं। 

टिकट बंटवारे में होगा इम्तिहान
आजमगढ़ निवासी एसबीआई के पूर्व बैंक मैनेजर जीउत राम कहते हैं कि आजमगढ़ और मऊ ही नहीं, बलिया में भी समीकरण बदले हैं। तमाम प्रयासों के बाद भी सपा के नेता विरोधी दल रामगोविंद चौधरी किसानों को डूब क्षेत्र से मुक्ति नहीं दिला पाए हैं। इसी तरह अंबिका चौधरी सपा में लौट आए हैं। 
आजमगढ़ निवासी और इंटर कॉलेज के प्रवक्ता अच्छेलाल यादव कहते हैं कि भाजपा के लिए भी यहां चुनौतियां कम नहीं हैं। इससे सपाई भले ही उत्साह में दिख रहे हैं, पर टिकट बांटने में उसे काफी सावधानी बरतनी होगी। 
शिब्ली कॉलेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सरफराज अहमद राज कहते हैं, इस मंडल में काम तो काफी हुए हैं, लेकिन खराब सड़कें, बाढ़, बेरोजगारी जैसी समस्याएं बरकरार हैं। बुनकरों की समस्या भी बरकरार है। इन सारी चुनौतियों से सियासी दलों को जूझना पड़ेगा।

बहुत कुछ बाकी है...
सपा के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी बांसडीह से विधायक हैं। वह दावा करते हैं, जो भी विकास दिख रहा है, वह सपा की देन है। अस्पताल से लेकर कटान रोकने के लिए ठोकर तक बनवाई गई। बुनकरों के लिए विपणन केंद्र बना। लेकिन भाजपा सरकार ने हर कार्य को ठप कर दिया। यहां के लोगों को रोजगार के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ रहा है। डूब क्षेत्र के लिए कई बार विधानसभा में भी मामला उठाया गया। लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया।

आजमगढ़ (10 सीटें)

मेहनगर (सु.) : सपा के कल्पनाथ पासवान विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 20 हजार, क्षत्रिय 23 हजार, यादव 70 हजार, राजभर 38 हजार, चौहान 35 हजार, अनुसूचित जातियां 1.26 लाख और मुस्लिम 20 हजार।
आजमगढ़ (सदर) : सपा के दुर्गा प्रसाद यादव विधायक हैं।
जातिगत समीकरण :  यादव करीब 75 हजार, अनुसूचित जातियां 62 हजार, क्षत्रिय 45 हजार, ब्राह्मण 21 हजार और मुस्लिम 58 हजार।
अतरौलिया : सपा के डॉ. संग्राम यादव विधायक हैं।
जातिगत समीकरण :  यादव करीब 68 हजार, अनुसूचित जातियां 53 हजार, मुस्लिम 32 हजार, निषाद 35 हजार, ब्राह्मण 48 हजार, क्षत्रिय 38 हजार।
लालगंज (सु.) : बसपा के आजाद अरिमर्दन विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 90 हजार, क्षत्रिय 45 हजार, भूमिहार 47 हजार, मुस्लिम 40 हजार और यादव 30 हजार। 
मुबारकपुर : बसपा से शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली विधायक हैं। हालांकि वह अब साइकिल पर सवार हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.10 लाख, अनुसूचित जातियां 78 हजार, यादव 61 हजार, राजभर 17 हजार, चौहान 14 हजार, ब्राह्मण साढ़े पांच हजार।
सगड़ी (सु.) : बसपा की बंदना सिंह विधायक हैं। हालांकि उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया है।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 82 हजार, यादव 55 हजार, कुर्मी 40 हजार, मुस्लिम 30 हजार, क्षत्रिय 20 हजार, और ब्राह्मण 13 हजार।
दीदारगंज : बसपा के सुखदेव राजभर विधायक थे।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 85 हजार, अनुसूचित जातियां 80 हजार, यादव 43 हजार और राजभर 45 हजार।
फूलपुर-पवई : भाजपा के अरुण कुमार यादव विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : यादव करीब 58 हजार, अनुसूचित जातियां 43 हजार, मुस्लिम 42 हजार, ब्राह्मण 15 हजार, क्षत्रिय 16 हजार।
गोपालपुर : सपा के नफीस अहमद विधायक हैं।
जातिगत समीकरण :  यादव करीब 68 हजार, अनुसूचित जातियां 53 हजार, मुस्लिम 42 हजार, राजभर 28 हजार, ब्राह्मण 18 हजार, और क्षत्रिय 18 हजार।
निजामाबाद : सपा के आलमबदी आजमी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 62 हजार, मुस्लिम 57 हजार, भूमिहार 33 हजार, ब्राह्मण 22 हजार, क्षत्रिय 19 हजार और अनुसूचित जातियां 20 हजार।

मऊ (4 सीटें)
मधुबन : कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान विधायक हैं।
जातिगत समीकरण :  यादव करीब 80 हजार, अनुसूचित जातियां 70 हजार, राजभर 25 हजार, चौहान 24 हजार, मुस्लिम 22 हजार और ब्राह्मण 16 हजार।
घोसी : भाजपा के विजय राजभर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 85 हजार, अनुसूचित जातियां 70 हजार, यादव 56 हजार, राजभर 52 हजार, चौहान 46 हजार और ब्राह्मण आठ हजार।
मुहम्मदाबाद गोहना (सु.) : भाजपा के श्रीराम सोनकर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 88 हजार, यादव 62 हजार, मुस्लिम 58 हजार और ब्राह्मण 6 हजार।
मऊ सदर : बसपा से मुख्तार अंसारी विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.70 लाख, अनुसूचित जातियां 91 हजार, यादव व राजभर 45-45 हजार, चौहान 42 हजार, क्षत्रिय 18 हजार और ब्राह्मण 6 हजार।

बलिया (7 सीटें)
बलिया : भाजपा के आनंद स्वरूप शुक्ला विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : वैश्य करीब 51 हजार, ब्राह्मण 46 हजार, यादव 42 हजार, क्षत्रिय. 36 हजार, मुस्लिम 35 हजार और भूमिहार 12 हजार।
बांसडीह : विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सपा के रामगोविंद चौधरी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण :  राजभर करीब 50 हजार, क्षत्रिय और यादव 45-45 हजार, ब्राह्मण 40 हजार, बिंद-मल्लाह 20 हजार, अन्य अनुसूचित जातियां 20 हजार और मुस्लिम 15 हजार। 
फेफना : भाजपा के उपेंद्र तिवारी विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : यादव करीब 60 हजार, अनुसूचित जातियां 60 हजार, क्षत्रिय 35 हजार, राजभर 20 हजार, ब्राह्मण और भूमिहार 15-15 हजार और मुस्लिम 10 हजार।
सिकंदरपुर : भाजपा के संजय यादव विधायक हैं।
जातिगत समीकरण :  क्षत्रिय करीब 30 हजार, यादव, राजभर और मुस्लिम 25-25 हजार, ब्राह्मण 16 हजार और भूमिहार 12 हजार।
रसड़ा : बसपा के उमाशंकर सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 90 हजार, मुस्लिम 42 हजार, यादव 37 हजार, क्षत्रिय 33 हजार, वैश्य 15 हजार, ब्राह्मण 10 हजार और कुशवाहा 13 हजार। 
बेल्थरारोड : भाजपा के धनंजय कन्नौजिया विधायक हैं।  
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 80 हजार, यादव 60 हजार, मुस्लिम 30, क्षत्रिय 25 हजार, कुशवाहा 20 हजार और ब्राह्मण 10 हजार।
बैरिया : भाजपा के सुरेंद्र सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 85 हजार, क्षत्रिय 80 हजार, अनुसूचित जातियां 60 हजार, ब्राह्मण 40 हजार, मुस्लिम 10 हजार।

नकली से लड़े असली मुलायम

Azamgarh Division's report, the field of work of veterans... now the question area
मुलायम सिंह यादव - फोटो : self

चुनाव में जीत के लिए नेता न जाने क्या-क्या करते हैं। मुलायम सिंह यादव को 1993 के विधानसभा चुनाव में तीन सीटों जसवंतनगर, फिरोजाबाद की शिकोहाबाद और एटा जिले की निधौली कलां पर दूसरे दलों के साथ नकली मुलायम से भी लड़ना पड़ा। दरअसल, इन तीनों ही सीटों पर उनके विरोध में दूसरे मुलायम भी मैदान में उतर पड़े। वरिष्ठ पत्रकार स्व. कमल नयन ने एक बार यह किस्सा सुनाया था। उन्होंने बताया था कि शायद सपा के विरोधी दलों ने यह सोचकर तीनों ही सीटों पर मुलायम सिंह के ही नाम वाले प्रत्याशी उतारे थे कि वे ‘नेताजी’ अर्थात मुलायम सिंह यादव के वोटों में सेंध लगा लेंगे। चुनाव में सपा के कार्यकर्ताओं पर इसका असर भी दिखा। उनकी तरफ से असली बनाम नकली के मुद्दे पर मजेदार ढंग से प्रचार किया गया। सपा के कार्यकर्ता लोगों के बीच जाते और उनसे कहते, ‘असली को पहचानो बाकी को काटो। साइकिल वाले असली हैं बाकी सब नकली हैं।’ बहरहाल, मुलायम तीनों ही स्थानों से अच्छे वोटों से चुनाव जीत गए। उनके नाम के ही दूसरे उम्मीदवारों में से कोई वोटों का आंकड़ा दो शतक भी नहीं पहुंचा सका। पर, असली बनाम नकली की लड़ाई ने सपा के लोगों को चकरघिन्नी बना दिया।

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