आजम खां को अब चाहत है 'ताज' की!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण व वक्फ मंत्री आजम खां ऐतिहासिक इमारत ताजमहल को वक्फ संपत्ति घोषित करने और उसका मुतवल्ली बनने की चाहत रखते हैं।
वहीं राजधानी स्थित ईदगाह के इमाम खालिद रशीद फरंगी महली ने मुख्यमंत्री को मांगपत्र सौंपकर ताजमहल परिसर की मस्जिद में पांचों वक्त नमाज पढ़ने की इजाजत देने की मांग की।
दरअसल, बुधवार को यहां आयोजित वक्फ कॉन्फ्रेंस के पहले सत्र में आजम खां मुतवल्लियों की वक्फ संपत्तियों से जुड़ी समस्याएं सुन रहे थे। इसी बीच उर्दू अनुवादकों की काहिली का जिक्र छिड़ा तो आजम ने ताज पर तंज कसा।
उन्होंने कहा कि उर्दू अब वही चलेगी, जिसमें नुक्ता कम हो। शायद यही वजह है कि शाहजहां ने महबूबा के याद में बनवाई इमारत का नाम मुमताजमहल न रखकर ताजमहल रखा।
इसके बाद समस्याएं सुनते-सुनते बोले, बड़े खुशनशीब हैं वह कि किसी कमेटी में नहीं हैं।
ताजमहल वक्फ बोर्ड में शामिल हो
ताजमहल को भी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में शामिल होना चाहिए। यदि हमें इसका मुतवल्ली बना दिया जाए तो भी इसका नाम मुमताजमहल नहीं, ताजमहल ही रखेंगे।
दूसरे सत्र में मुख्यमंत्री के सामने जब फरंगी महली ने माइक संभाला तो पहले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के कसीदे पढ़े।
फिर वक्फ से जुड़ी सरकारी इमारतें वक्फ बोर्ड को सौंपने, वक्फ संपत्तियों से अवैध कब्जे हटाकर वहां स्कूल, अस्पताल आदि बनवाने के साथ ही ताजमहल परिसर में बनी मस्जिद में पांचों वक्त नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व आजम खां को मांगपत्र भी सौंपा। इन सभी बातों को सुनकर लगता है कि वक्फ बोर्ड और आजम खां के इरादे कुछ और ही हैं।