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तो ये है आजम खां की नाराजगी की वजह

Thu, 28 Nov 2013 10:24 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/लखनऊ
शोभित श्रीवास्तव/लखनऊ Updated Thu, 28 Nov 2013 10:24 AM IST
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azam khan anger due to this matter

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां एक बार फिर नाराज हो गए हैं।

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इस बार उनकी नाराजगी अपने विभाग के छोटे-छोटे कार्यों तक में वित्त विभाग की अड़ंगेबाजी को लेकर है।

दरअसल वित्त विभाग ने आठ साल पहले पास हो चुके गाजियाबाद हज हाउस प्रोजेक्ट के औचित्य के बारे में पूछ लिया था।

गाजियाबाद हज हाउस की घोषणा भी करीब 10 साल पहले उस समय हुई थी जब लखनऊ में हज हाउस की घोषणा हुई थी।

वर्ष 2005 में मुलायम सिंह की सरकार के समय ही ये दोनों हज हाउस प्रोजेक्ट पास हुए थे। गाजियाबाद हज हाउस 3.64 करोड़ रुपये की लागत से बनना था।

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इसके लिए दो करोड़ रुपये रिलीज भी हो गए। 70 लाख रुपये से चारदीवारी व ऑफिस बनाया गया।

इसके बाद हज हाउस अदालत के पचड़े में फंस गया। कोर्ट से स्टे होने के कारण इसका काम रुक गया। इसके बाद मायावती की सरकार आ गई और यह हज हाउस ठंडे बस्ते में चला गया।
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जब पिछले वर्ष समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो एक बार फिर आजम को यही महकमा मिल गया और उन्हें अपने पुराने प्रोजेक्ट की सुध आई।

उन्होंने विभागीय अधिकारियों को इस प्रोजेक्ट में लगाया। हज कमेटी के अधिकारियों ने यूपीपीसीएल से इसका एस्टीमेट बनवाया।

यूपीपीसीएल ने 27.80 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाया, लेकिन उस पर अड़ंगा लगा कि यह कार्यदायी संस्था 10 करोड़ से कम के काम कर सकती है।

इसके बाद कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस से एस्टीमेट बनवाया गया। इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष के बजट में 10.80 करोड़ का प्रावधान भी रखा गया। इसके बावजूद गाजियाबाद हज हाउस के लिए एक भी पैसा रिलीज नहीं हो सका।
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वित्त विभाग ने फिर आपत्ति लगाई कि तब से रेट में काफी अंतर आ गया है, इसलिए दोबारा प्रस्ताव बनाकर भेजा जाए।

इसके बाद हज कमेटी के अधिकारियों ने एक बार फिर एस्टीमेट बनाया और यह बढ़कर 41 करोड़ रुपये पहुंच गया।

हालांकि पहले व अब के हज हाउस के प्रोजेक्ट में कई बदलाव भी किए गए हैं। पहले के हज हाउस में 259 लोगों के ठहरने की व्यवस्था थी जबकि नया प्रस्ताव 1800 लोगों के रुकने के हिसाब से बना है।

इस नए प्रस्ताव पर ही वित्त विभाग ने अड़ंगा लगा दिया है। वित्त विभाग ने इस हज हाउस के औचित्य के बारे में पूछ लिया है।

साथ ही पहले मिले पैसे के खर्च के बारे में कई आपत्तियां भी लगाई हैं। चूंकि हज कमेटी के अध्यक्ष आजम खां खुद हैं, इसलिए फाइल पर जब वित्त विभाग के अधिकारियों की टिप्पणी देखी तो उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई।

अभी दिल्ली हज कमेटी भेजती यूपी के हाजियों को
दिल्ली से सटे आस-पास के यूपी के जिलों से काफी अधिक संख्या में लोग हज करने जाते हैं। दिल्ली हज कमेटी ही इन हाजियों को अपने यहां से भेजती है।

इसलिए प्रदेश सरकार ने गाजियाबाद में हज हाउस बनाने की योजना बनाई थी। लखनऊ के साथ ही गाजियाबाद में हज हाउस बनाना आजम की महत्वाकांक्षी योजना है।

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