फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Ayodhya: The Ram Temple Trust cannot be dissolved under any circumstances; only amendments to the system are p

अयोध्या: किसी भी हाल में भंग नहीं हो सकता राम मंदिर ट्रस्ट, सिर्फ व्यवस्था में संशोधन संभव; बढ़ी सुरक्षा भी

Mon, 20 Jul 2026 07:08 AM IST
रोहित मिश्र नितिन मिश्र, अमर उजाला अयोध्या
नितिन मिश्र, अमर उजाला अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 20 Jul 2026 07:08 AM IST
सार

Ram Temple offerings stolen: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद भी इसके ट्रस्ट को भंग नहीं किया जा सकता। इस मामले में कई बार ट्रस्ट को भंग करने की बात उठी है। 

विज्ञापन
Ayodhya: The Ram Temple Trust cannot be dissolved under any circumstances; only amendments to the system are p
राम मंदिर ट्रस्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

निर्मोही अखाड़ा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग उठाई गई है। इससे पहले हिंदू महासभा ने भी राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग उठाई है। इसके बाद ट्रस्ट की स्थापना संबंधी मूल ट्रस्ट डीड और नौ नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। उपलब्ध ट्रस्ट डीड के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि ट्रस्ट को भंग करने का कोई प्रावधान नहीं है।

विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने नौ नवंबर 2019 को अपने फैसले के पैरा 805(2)(i) में केंद्र सरकार को तीन माह के भीतर अयोध्या अधिनियम, 1993 की धारा छह और सात के तहत एक योजना बनाकर ट्रस्ट की स्थापना करने का निर्देश दिया था। फैसले में कहा गया है कि योजना में ट्रस्ट के गठन, उसके प्रबंधन, ट्रस्टियों की शक्तियों, मंदिर निर्माण और उससे जुड़े सभी आवश्यक विषयों का प्रावधान किया जाएगा।
विज्ञापन


इसी आदेश के अनुपालन में भारत सरकार ने पांच फरवरी 2020 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया और ट्रस्ट डीड निष्पादित की। ट्रस्ट डीड में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि स्थापित ट्रस्ट अपरिवर्तनीय होगा। इसका अर्थ है कि ट्रस्ट को निरस्त या समाप्त करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसे में ट्रस्ट डीड के उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार, ट्रस्टियों में बदलाव या ट्रस्ट डीड की कुछ धाराओं में सीमित संशोधन संभव हैं, लेकिन ट्रस्ट को भंग करने का कोई स्पष्ट प्रावधान ट्रस्ट डीड में नहीं दिया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज को डीड में संशोधन का अधिकार

बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज को ट्रस्ट डीड में संशोधन का अधिकार दिया गया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया गया है कि ट्रस्ट की मूल संरचना, ट्रस्ट के उद्देश्य, केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई योजना तथा नौ नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मूल ढांचे के विपरीत कोई संशोधन नहीं किया जा सकता। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की संरचना वही रहेगी जो ट्रस्ट डीड में निर्धारित की गई है। ट्रस्ट डीड में केवल ट्रस्टियों के इस्तीफे और उन्हें दो-तिहाई बहुमत से हटाने की प्रक्रिया का उल्लेख है। किसी भी स्थान पर पूरे ट्रस्ट को भंग करने या समाप्त करने की व्यवस्था का उल्लेख नहीं है।

राम मंदिर की सुरक्षा और सख्त, 50 निजी सुरक्षाकर्मी बढ़ाए गए

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार पहले मंदिर परिसर में लगभग 300 निजी सुरक्षाकर्मी तैनात थे, जिनकी संख्या बढ़ाकर अब 350 कर दी गई है। वहीं, निजी सुरक्षा कर्मियों का मासिक मानदेय 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये कर दिया गया है।

मंदिर की सुरक्षा पहले से ही उत्तर प्रदेश पुलिस, पीएसी और अन्य सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के जिम्मे है। इनके अलावा दो निजी सुरक्षा एजेंसियों के कर्मी भी मंदिर परिसर में विभिन्न प्रवेश द्वारों, परिक्रमा मार्ग, यात्री सेवा केंद्र और अन्य संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं। सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा चोरी की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की गई। इसके तहत अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने तथा सुरक्षा कर्मियों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से उनके मानदेय में भी वृद्धि का निर्णय लिया गया है।

जनप्रतिनिधियों ने चंपत राय से मुलाकात कर दिया बड़ा संदेश

 श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से शनिवार की शाम जिले के पांचों विधायक और महापौर ने तीर्थ क्षेत्र भवन पहुंचकर मुलाकात की। राम मंदिर से जुड़े प्रकरण के बीच हुई इस मुलाकात को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जनप्रतिनिधियों ने चंपत राय का हालचाल जाना और पूरे घटनाक्रम पर चर्चा की।

मुलाकात करने वालों में नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रुदौली विधायक रामचंद्र यादव, मिल्कीपुर विधायक चंद्रभानु पासवान, बीकापुर विधायक डॉ. अमित सिंह चौहान, गोसाईगंज विधायक अभय सिंह, महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रोहित सिंह शामिल रहे।

मुलाकात के बाद जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही है। जांच अपने अंतिम चरण में है और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले का सच सामने आ जाएगा, इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।

चंपत राय से लगातार हो रही मुलाकातों को कई लोग एक स्पष्ट संदेश के रूप में देख रहे हैं। पहले अयोध्या के व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला। इसके बाद रामनगरी के अनेक साधु-संतों ने उनसे भेंट कर सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया और उन्हें पूरे प्रकरण में निर्दोष बताया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी लगातार उनसे मिलने पहुंच रहे हैं। अब जिले के सभी जनप्रतिनिधियों का एक साथ पहुंचना इस क्रम की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इन लगातार हो रही मुलाकातों से यह संदेश उभरकर सामने आ रहा है कि समाज और संगठन के विभिन्न वर्ग जांच पूरी होने से पहले चंपत राय से दूरी बनाने के बजाय उनके साथ खड़े दिखाई देना चाहते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed