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अयोध्या : साकेत महाविद्यालय में शिक्षकों को पानी की जगह पिला दिया तेजाब, चार की बिगड़ी हालत

Thu, 16 Jun 2022 07:51 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव संवाद न्यूज़ एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज़ एजेंसी, अयोध्या Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 16 Jun 2022 07:51 PM IST
सार

कर्मचारी द्वारा की गई घोर लापरवाही के सवाल पर साकेत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अभय कुमार सिंह का कहना है कि कर्मचारी ने जान-बूझकर ऐसा नहीं किया है। गलती से उसने पानी समझकर तेजाब गिलास में भरकर दे दिया होगा। शिक्षकों की हालत ठीक है, कोई चिंताजनक बात नहीं है।

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Ayodhya: Teachers were given acid instead of water, the matter of Saket College, the condition of four teachers deteriorated
मेडिकल कॉलेज जांच कराने पहुंचे शिक्षक - फोटो : amar ujala

विस्तार

अयोध्या में साकेत महाविद्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने पीने के लिए पानी मांगने पर शिक्षकों को पानी की जगह पर तेजाब पिला दिया। शिक्षकों ने एक घूंट ली तुरंत उन्हें अहसास हुआ कि यह पानी नहीं बल्कि कुछ और है। तेजाब पीने वाले चार शिक्षकों की हालत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज दर्शननगर में भर्ती कराया गया। जहां इलाज व जांच के बाद उन्हें घर भेज दिया गया है। बताया गया कि तेजाब पीने वाले चार शिक्षकों में से एक की हालत ज्यादा खराब है।

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घटना बुधवार की दोपहर तीन बजे की है। साकेत महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के शिक्षक डॉ. सुधीर राय, लॉ विभाग के डॉ. अशोक राय, अंग्रेजी विभाग के जन्मेजय तिवारी व उर्दू विभाग के डॉ. मुजफ्फर मेंहदी ने परीक्षा ड्यूटी के बाद महाविद्यालय के कर्मचारी चंद्रप्रकाश सिंह से पानी मांगा। वह रोज की तरह गिलास भरकर लाया।
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शिक्षकों ने भी पानी समझकर पी लिया लेकिन एक घूंट पीते ही उन्हें अहसास हुआ कि यह पानी नहीं तेजाब है। इसके बाद हड़कंप मच गया। शिक्षकों ने श्रीराम अस्पताल जाकर जांच कराई। चिकित्सकों ने इंजेक्शन लगाया और जांच की। जिसके बाद सभी घर चले गये। रात में चारों शिक्षकों की हालत खराब होने लगी। गुरुवार सुबह सभी शिक्षक दर्शननगर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। चिकित्सकों ने इंडोस्कोपी के जरिए शिक्षकों की जांच की तो पाया कि तेजाब पीने के कारण डॉ. सुधीर राय व डॉ. मुजफ्फर मेंहदी के अंदर के अंग 15 प्रतिशत जल चुके हैं। डॉ. अशोक राय को करीब 60 प्रतिशत नुकसान हुआ है।
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कॉलेज प्रशासन पर सवाल
सवाल यह है कि कॉलेज में जहां पीने के लिए पानी रखा जाता है क्या वहां तेजाब भी रखा गया था। अगर ऐसा था तो किसी लापरवाही है। किसने वहां पर तेजाब रखा। इस बारे में कॉलेज प्रशासन कुछ नहीं बोल रहा है। अगर अनजाने में कोई छात्र तेजाब पी लेता तो किसकी जिम्मेदारी होती। क्या चंद्रप्रकाश सिंह को पानी और तेजाब में अंतर नहीं पता। तेजाब की गंध तेज होती है उसके पास जाते ही अंदाजा लग जाता है। फिर उसने पानी की जगह तेजाब गिलास में भरकर कैसे दे दिया।


प्राचार्य कह रहे, अनजाने में पिलाया
कर्मचारी द्वारा की गई घोर लापरवाही के सवाल पर साकेत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अभय कुमार सिंह का कहना है कि कर्मचारी ने जान-बूझकर ऐसा नहीं किया है। गलती से उसने पानी समझकर तेजाब गिलास में भरकर दे दिया होगा। शिक्षकों की हालत ठीक है, कोई चिंताजनक बात नहीं है। कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई के सवाल पर कहा कि जब उसने जानबूझकर ऐसा नहीं किया तो कार्रवाई की जरूरत नहीं है। जो भी घटना हुई वह अनजाने में हुई है, फिलहाल इसकी जांच की जा रही है।

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