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अयोध्या: राम मंदिर मार्ग में बदलाव से कई पुराने मंदिर हो जाएंगे सूने, कभी लगता था इनमें भक्तों का तांता
Tue, 01 Aug 2023 06:35 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला संवाद, अयोध्या
अमर उजाला संवाद, अयोध्या
Published by: रोहित मिश्र
Updated Tue, 01 Aug 2023 06:35 PM IST
सार
रामलला दर्शन करने के लिए मार्ग में बदलाव कर दिया गया है। इस बदलाव से कई सारे वह मंदिर उपेक्षित हो जाएंगे जिनमें कभी भक्तों की बहुत भीड़ उमड़ती थी।
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श्री रामजन्म भूमि पथ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राममंदिर के दर्शन मार्ग में बदलाव कर दिया गया है। अब रामलला के भक्त नए दर्शन मार्ग रामजन्मभूमि पथ से रामजन्मभूमि परिसर में प्रवेश कर रहे हैं और इसी मार्ग से वापस आ रहे हैं। दर्शन मार्ग में बदलाव से पुराने दर्शन मार्ग पर स्थित कई प्राचीन मंदिर भक्तों से सूने हो गए हैं, इसका असर इन मंदिरों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
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राममंदिर का परंपरागत दर्शन मार्ग अब भक्तों से सूना हो गया है। अयोध्या में राम मंदिर जाने का मार्ग बदल जाने के कारण पुराने रास्ते के 10 से भी अधिक मन्दिर सूने हो गए हैं। पिछले सात दशक में ऐसा पहली बार हुआ है। जिन मंदिरों में कभी भक्तों का तांता लगा रहता था, वहां आज भूले-भटके श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इन मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की बदौलत ही भगवान का भोग-राग व साधु-संतों की व्यवस्थाएं निर्भर होती थीं। 1949 में रामलला के प्राकट्य के बाद से ही श्रद्धालु अमावां मंदिर, राम कचेहरी, लवकुश मंदिर, जगन्नाथ मंदिर और रंग महल बैरियर से प्रवेश करते थे, अब यह रास्ता मंदिर निर्माण कार्य के चलते बंद कर दिया गया है।
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80 फीसदी घट गई श्रद्धालुओं की संख्या
रामजन्मभूमि से सटे रंगमहल के महंत रामशरण दास ने कहा कि श्रद्धालुओं की संख्या करीब 80 फीसदी घट गई है। पिछले दो दिनों में गिने-चुने श्रद्धालु ही पहुंचे हैं, इससे मंदिर की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। जगन्नाथ मंदिर के महंत राघव दास बताते हैं कि भगवान का भोग-राग और इनमें रहने वाले साधु संतों की व्यवस्था आने वाले श्रद्धालुओं पर निर्भर होती है। रामलला के दर्शन को आने वाले श्रद्धालु पुराने दर्शन मार्ग पर स्थित मंदिरों में भी दर्शन-पूजन करते थे, चढ़ावा व दान देते थे, अब सन्नाटा है। दर्शन मार्ग में बदलाव के चलते अब श्रद्धालु इधर नहीं आ रहे हैं।
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